बालिका बचाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया
| Rainbow News - Jun 5 2019 4:05PM

अम्बेडकरनगर। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार 4 जून 2019 को तहसील सभागार, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर में बालिका बचाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर को सम्बोधित करते हुये प्राधिकरण सचिव श्रीमती पूजा विश्वकर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि औरतें समाज का बहुत महत्वपूर्ण भाग हैं और पृथ्वी पर जीवन के हर एक पहलू में बराबर भाग लेती हैं हालांकि भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के कारण स्त्रियों के निरन्तर गिरते लिंग अनुपात ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। इसलिये लिंगानुपात को समान करने के लिये बालिकाओं को बचाना बेहद आवश्यक है। उन्होने लड़का एवं लड़की में भेद-भाव न करने पर बल दिया। उन्होने बताया की यदि अल्ट्रा साउंड मशीन से किसी भी प्रकार की गलत जांच चिकित्सकों द्वारा की जा रही है उसमें जुर्माना एवं सजा दोनो का प्राविधान है एवं बताया कि आज का सभ्य समाज कुरीतियों में घिरता चला जा रहा है।

     आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में बेटियों को भ्रूण में ही समाप्त कर दिया जाता है। टेक्नोलॉजी का उपयोग हमेशा अच्छे कार्यों के लिये होना चाहिये जिससे देश का विकास हो किन्तु आज के समय में इसका उपयोग विध्वंस कार्यों के लिये किया जा रहा है। जिसका परिणाम भविष्य में अत्यंत घातक होने वाला है और यदि समय रहते हम नहीं जागे तो इस विध्वंस से हमें कोई बचा नहीं सकता है। सचिव ने घटते लिंगानुपात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बालिकाओं के लिये समाज में जागरूकता पैदा करने की बात करते हुए कहा कि यदि समाज में जागरूकता पैदा होगी तो भू्रण जांच स्वतः ही बन्द हो जायेगी और लोग लड़के-लड़कियों में फर्क नहीं करेगें। 

शिविर में बोलते हुये गिरिवर सिंह, तहसीलदार/सचिव, तहसील-अकबरपुर, अम्बेडकरनगर ने गर्भ में पल रहे शिशु के बारें में बड़े रोचक ढ़ंग से बताया तथा समाज में अल्ट्रा साउण्ड मशीन के जरिये लिंग परीक्षण करने वाले डॉक्टरों के ऊपर गम्भीर कटाक्ष किया। उन्होंने शिविर को सम्बोधित करते हुये बताया कि बालिकाओं के संरक्षण एवं पालन-पोषण में किसी भी तरह का भेद-भाव, आप्राकृतिक व निन्दनीय है। इसके अतिरिक्त उन्होंने गर्भावस्था के दौरान माता एवं होने वाले शिशु के स्वास्थ्य एवं कुपोषण के बारें में भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत में कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या अन्य देशों की अपेक्षा अधिक है। 

    शिविर का संचालन करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रामचन्द्र वर्मा ने बताया कि यदि अवैध रूप से भू्रण जांच के लिये अल्ट्रा साउण्ड मशीन का दुरूपयोग इसी प्रकार होता रहा तो हमारे देश में कन्या शिशु के लिये गम्भीर स्थिति पैदा हो जायेगी। ऐसे केन्द्र/क्लीनिक जहां अल्ट्रा साउण्ड मशीन या इमेजिंग मशीन या स्कैनर या अन्य कोई तकनीकी उपलब्ध है, जिससे गर्भस्थ शिशु का लिंग निर्धारण किया जा सकता है, का पंजीकृत होना अनिवार्य है। स्वेच्छा से लिंग परीक्षण कराने पर महिला के विरूद्ध भी सजा और जुर्माना हो सकता है।      

    इस शिविर में सविता सिंह खण्ड विकास अधिकारी, वन्दना वर्मा, चन्द्रभान सिंह, रामआशीष शर्मा, हरिश्चन्द्र वर्मा, अजय कुमार वर्मा, त्रिभुवन लाल श्रीवास्तव, उमापति उपाध्याय, रामशेष वर्मा, रबीन्द्र कुमार, विजय कुमार श्रीवास्तव, अमजद अली, मोहसिन रजा, मंशाराम, विश्वनाथ, शशिभूषण वर्मा, जगदीशचन्द्र यादव, अमित वर्मा, पंकज नायक व मो0 फिराज व तहसील के कर्मचारीगण एवं मीड़ियाकर्मी आदि उपस्थित थे।



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