सभी पर है पर्यावरण सुरक्षा की जिम्मेदारी
| Rainbow News - Jun 10 2019 1:57PM

पृथ्वी का संरक्षण, सुरक्षा और सुधार, हमारे जीवन का है आधार। इससे जनमानस की भलाई एवं आर्थिक विकास संभव है। संयुक्त राष्ट्र इससे भली-भांति समझता है इसलिए प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाये जाने की अपील करता है। पहला पर्यावरण दिवस 1974 मे मनाया गया था। तब से प्रत्येक वर्ष पर्यावरण के किसी न किसी मुद्दे पर लोगों का ध्यान केंद्रित करने लिए यह दिवस मनाया जाता है।

नरेन्द्र देव कृषि ए्वं प्रौधोगिक विश्व विधालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र बरासिन सुलतानपुर के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि वायु प्रदूषण के कई कारण है, जहां पर घर में लकड़ियां एवं गोबर के उपले जो अक्सर खाना बनाने मे उपयोग किया जाता है, जलाकर वायु प्रदूषण भागीदारी करते हैं। ऐसे उद्योग हैं जो कोयला जलाने पर आधारित है, पर्यावरण को प्रदूषित करता है ।

परिवाहन प्रदूषण का कारण होता है। उस से निकला हुआ धुआ हमारे पर्यावरण को दूषित करता  है।कृषि कारणों से भी प्रदूषण बढ़ता हुआ देखा गया है। इसका प्रमुख कारण है फसलों के अवशेष का जलाना। कूड़े को जलाने से भी हानिकारक गैस निकलती है. प्राकृतिक आपदा के कारण भी वायु प्रदूषण हो जाता है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी से सहयोग कर सकते हैं  जैसे:- घरेलू स्तर पर भोजन को धुआ रहित चूल्हे पर बनाना चाहिए। इसके अलावा धुआ रहित इंधन का उपयोग करना चाहिए, जिससे  कम धुआ निकले जैसे कि एलपीजी गैस और गोबर गैस एक अच्छा विकल्प है। सौर ऊर्जा से भी खाना बनाने एवं अन्य घरेलू कार्य के लिए उपयोग किया जा सकता है।

कृषि अवशेषों को ना जलाएं-

फसल अवशेषों  को मल्चिंग एवं सूखे चारे के लिए उपयोग किया जा सकता है। इन फसल अवशेषों का मूल्यवर्धन करके भी पैसे कमाए जा सकते हैं। वाहनों का उपयोग कम से कम होना चाहिए। कोशिश करें कि यदि एक ही ओर आप के साथियो  को जाना है तो एक ही गाड़ी को पूल करें यानी एक ही गाड़ी पर कई लोग जाएं और। रास्ते में अपने-अपने स्थान पर उतर कर इस कार्य को कर सकते हैं। इसके अलावा जहां तक संभव हो जैसे बस और अन्य पब्लिक वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए। कूड़े को ना जलाएं। कुड़े को एकत्रित करके खाद बनाकर मिट्टी में प्रयोग करें। साथ ही साथ जहां तक संभव हो सौर ऊर्जा का उपयोग करें। वृक्षारोपण एक सही विकल्प है जिससे मिट्टी, आंधी को रोका जा सकता है।
वृक्ष पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में भी सहायक होते हैं

इन सभी उपायों को इस्तेमाल कर हम अपनी भागीदारी पृथ्वी के प्रति और अपने देश और समाज के प्रति बाखूबी निभा सकते हैं। यह प्रयास केवल विश्व पर्यावरण दिवस के दिन ही नहीं अपितु हमे सदैव व्यवहार मे रखना  चाहिए। सभी जनों को इन प्रयासों को जारी रखना चाहिए ताकि हमारा देश स्वच्छ हो हमारा विश्व स्वच्छ हो। इस  दिवस को  पेड़ लगाने की तैयारी का अंतिम रूप देना चाहिए। इस दिन 1-2 पौधे ही पर्यावरण दिवस के नाम पर लगाये। ज्यादा  पौधे दिवस के दिन ना लगाएं  क्योंकि ज्यादा तापमान होने से ,समय से पानी नही मिलने से पौधौ की सुखने की सम्भावना ज्यादा रहती है।

प्रो.मौर्य ने केन्द्र परिसर मे सहजन पौध का रोपड़ किया  तथा उन्होंने बताया कि समाजिक वानिकी  विभाग  के  सहयोग  से केंद्र प्रक्षेत्र पर  चार हेक्टयर मे पौध रोपड़ हेतु गढ्ढो की खुदाई कर दी गई है, इस माह में उर्वरक आदि डालकर भराई की जाएगी तथा वर्षा प्रारंभ होने पर विश्व विधालय द्वारा विकसित आंवला, बेल तथा अन्य संस्थानों से विकसित आम, अमरूद, लीची आदि की विभिन् प्रजातियां लगाई जाएंगी, जिससे भविष्य में उससे कलम तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि जन्म दिवस, शादी के अवसर पर, अन्य उत्सवो के अवसरो पर पौधरोपण का कार्य करना चाहिए।

विषय बस्तु विशेषज्ञ उधान  श्री गौरी शंकर वर्मा ने बताया कि वर्तमान में  केंद्र पर आम,अमरूद एवं आँवला के बीजू पौधे तैयार हैं, जिसमें विश्वविद्यालय से कलम लाकरमाह जुलाई मे बाधा जाएगा तथा सितम्बर से विक्रय प्रारंभ किया जाएगा। सहजन की पौध तैयार है जो जुलाई माह से विक्रय किया जाएगा, क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों पर ग्राम प्रधान के सहयोग से सहजन लगाने की सलाह दी। जिसकी फली  मिड डे मील में प्रयोग किया जा सकता है।



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