नन्ही सी जान
| Rainbow News Network - Jun 12 2019 1:58PM

नित चमन के फूलों को मसल कर
आंगन की बगिया ही उजड़ रही
मिलता क्या है ऐसे कुकर्मो से
नन्हीं-नन्ही बिटिया सिमट रही।

अभी चलना भी नही 
सीखा था उसने
बोलती भी अधूरी ही थी 
कैसे कैसे जुल्म किए तूने
सारी मानवता ही हिल रही

अक्ल के दुश्मन तुझे दया न आयी
नन्ही सी जान पर कितने सितम ढायी
रो गया धरती अम्बर, रोया सारा जहाँ
क्यूँ-क्यूँ तेरे चेहरे पर शिकन न आई।

क्यों ऐसे काले लोग खुला घूम रहे
छोटी छोटी जान को ही ढूँढ रहे
बदल डालो सजा देने के तरीके 
सलीके से ऐसे लोग नही सम्भलते।

जधन्यता की पराकष्ठा 
कब तक मासूम झेलेंगे
ढूँढकर ऐसे लोगो का
सामाजिक वाहिष्कार हो
फांसी से भी बढकर भी
सजा का अधिकार हो।

ऐसी सजा हो जिससे 
थर थर कांपे रूह
कोई नजर न उठा सके
जब भी देखे वह सजा का रूप।



Browse By Tags



Other News