अकबरपुर का सरकारी गेस्ट हाउस बना अराजकतत्वों का रेस्ट हाउस
| Rainbow News - Jun 18 2019 2:45PM

अम्बेडकरनगर जनपद गठन के 24वें वर्ष तक (29 सितम्बर 1995 से 11 जून 2019 के पूर्व तक) 30 जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त हो चुके हैं सभी ने अपने-अपने तरीके से और शासन के मंशानुरूप योजनाओं को मूर्त रूप देने का कार्य किया। परन्तु 31वें जिलाधिकारी के रूप में राकेश कुमार मिश्र ने 11 जून 2019 दिन मंगलवार को सायं पदभार ग्रहण करते ही अपनी कार्यशैली से व्यक्तित्व एवं ओहदे की हनक का एहसास कराया। नवागत जिलाधिकारी ने जहाँ जनपद स्तर के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिया वहीं पशु आश्रय केन्द्रों का तूफानी औचक निरीक्षण, बिना हेलमेट पेट्रोल दिए जाने पर पाबन्दी, अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरूआत और सड़क सुरक्षा सप्ताह आदि का शुभारम्भ किया।

एक सप्ताह के शुरूआती कार्यकाल में जिलाधिकारी श्री मिश्र ने पूरे सरकारी अमले को सक्रिय कर दिया। आम जन मानस में उनके इस कार्य शैली की चर्चा होने लगी है। लोगों की जुबान पर उनका नाम ठीक उसी तरह लिया जाने लगा है जैसे 18 वर्ष पूर्व 2001 में तत्कालीन जिलाधिकारी आर.पी. शुक्ल का। जनपद वासियों को विश्वास हो चला है कि जिले में विकास कार्यों में गति आएगी, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा और छोटी से बड़ी समस्याओं का समाधान जिलाधिकारी स्तर पर गम्भीरता से किया जाने लगेगा। ऐसा इसलिए भी कि जिलाधिकारी मिश्र द्वारा हर महीने के महत्वपूर्ण दिवसों पर शिरकत कर जन साधारण की समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान किया जा रहा है। इन दिवसों में सबसे महत्वपूर्ण मंगलवार और शनिवार होते हैं। मंगलवार को जिले के सभी तहसीलों पर और शनिवार को सभीं थानों पर दिवस विशेष का आयोजन कर जन समस्याओं की सुनवाई की जाती है। 

बहरहाल हम यहाँ मुख्यालय स्थित एक सरकारी भवन और उसमें जबरिया प्रवेश कर सुरा सुन्दरी का भोग करने व सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले तत्वों का जिक्र कर रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि ये सत्ता पक्षीय माननीयों के खासमखास, समर्थक व करीबी हैं। अब थोड़ा विस्तार से...................

अम्बेडकरनगर जनपद मुख्यालयी शहर अकबरपुर-टाण्डा रोड पर स्थित लोक निर्माण विभाग का पुराना डाक बंगला और उससे सटे आधुनिक डाकबंगला (सर्किट हाउस) में तथाकथित सत्तापक्षीय अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा देखा जाता है। दिन रात किसी भी समय इस जमावड़े को देखकर कहा जा सकता है कि यहाँ वी.आई.पी. लोग न रूककर अराजक तत्वों ने जमघट लगाया हुआ है और अपने क्रिया-कलापों से वहाँ अराजकता का माहौल कायम कर रखा है।

इस समय जबकि यहाँ का तापमान 45 डिग्री के आस-पास है तब ऐसे में ये तत्व सर्किट हाउस के उन सभी चार कमरों में आराम फरमाते देखे जा सकते हैं जिसमें ए.सी. लगा हुआ है। यहाँ के बारे में बताया गया है कि ये तत्व सर्किट हाउस के वातानुकूलित कक्षों में जबरिया प्रवेश कर मौज-मस्ती करते हैं। सर्किट हाउस की रखवाली करने वाले चौकीदारों पर अपना रौब गालिब कर मनचाही हरकतें करते हैं। किसी की क्या मजाल कि वह इनका विरोध कर सके। उलटे ये तत्व पी.डब्ल्यू.डी. के मुलाज़िमों से टहल बजवाते हैं। ये मुलाज़िम भयवश उन तत्वों की हर बात मानते हैं। गर्मी हो या अन्य मौसम अवांछनीय तत्वों का प्रवेश डाक बंगला सर्किट हाउस में हमेशा बना रहता है। ए.सी. का उपयोग दिन-रात होता है, बिजली चाहे जितनी खर्च हो.......इनकी जेब से थोड़े ही जा रहा है.....शायद इन लोगों की सोंच ऐसी ही हो। 

लोगों द्वारा चर्चा में सुना गया है कि मदिरापान कर बाहर से खाने-पीने व भोजनादि की चौचक व्यवस्था के साथ-साथ ये तत्व बाहर से युवतियों को लाकर मौज-मस्ती करते हैं। ये बेखौफ इस लिए रहते हैं कि इनके ऊपर सत्ता पक्ष और माननीयों का बरदहस्त होता है। इन तत्वों की ये हरकतें जहाँ असामाजिक हैं वहीं इनके द्वारा विद्युतचालित उपकरणों (ए.सी., हीटर, ब्लोअर, फैन, गीज़र आदि) का किया जाने वाला बेजा इस्तेमाल सरकारी राजस्व देयकों (विद्युत बिल) का ग्राफ बढ़ा रहा है, जिसकी अदायगी लोकनिर्माण विभाग को करनी पड़ती है। इन तत्वों के जमावड़े को देखकर यह नहीं प्रतीत होता कि यह महत्वपूर्ण सरकारी इमारत वी.आई.पी./माननीय अतिथियों के ठहराव के लिए निर्मित कर उपलब्ध कराया गया है। इसे गेस्ट हाउस न कहकर अराजक तत्वों का रेस्ट हाउस कहा जाए तो गलत नहीं होगा। 

इस बावत हमने सर्किट हाउस के चौकीदार कालिका प्रसाद तिवारी से मिलकर जानकारी चाही तो उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। जब पूछा गया कि क्या ऐसे तत्व यहाँ आते हैं तो उनका जवाब था कि माननीयों के समर्थक व शुभचिन्तक हैं, कैसे मना किया जा सकता है........? वो यहाँ आकर क्या करते हैं, क्या नहीं करते हैं इसके बारे में कृपा कर मुझसे कुछ न पूंछे......। और कोई समस्या है इस बावत चौकीदार का कहना था कि- आप मीडिया से हैं, अपने तरीके से देख और पता कर लीजिए.....कृपया मुझे इस पचड़े में मत डालिए। हम तो पी.डब्ल्यू.डी. के सबसे छोटे मुलाजिम हैं, हमारे बाल-बच्चों का ख्याल करिए..........बेहतर यह होगा कि जो कुछ भी आप देख रहे हैं और जानते हैं उसका प्रकाशन ही न करें। क्योंकि मीडिया में प्रकाशन होने से सारा दोष मेरे ऊपर ही आएगा, और मैं अलानाहक ही प्रताड़ित किया जाऊँगा। 

ये तो रही अकबरपुर-टाण्डा रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के सर्किट हाउस की समस्या.......। अब जबकि वर्तमान में पुराना डाक बंगला व उससे सटा सर्किट हाउस की पश्चिमी दीवार पर दशकों पूर्व से चला आ रहा अतिक्रमण जिले के हाकिम के फरमान से हटाया जाना शुरू हुआ है तब से डाक बंगला और सर्किट हाउस का ढका हुआ भवन दूर से ही दिखाई पड़ने लगा है। इसके पूर्व यह पता नही लग पाता था कि इन दोनों का वजूद क्या है..........? यदि हाकिम सर्किट हाउस के भीतर प्रवेश कर अनापेक्षित, अशोभनीय हरकत कर अराजकता का माहौल पैदा करने वाले अवांछनीय तत्वों पर भी अपनी दृष्टि डाल दें तो इस अतिथि गृह का स्तर मेनटेन हो जाएगा, साथ ही उक्त भवन की देखरेख हेतु तैनात लो.नि.वि. के मुलाज़िमों को भी खुली सांस लेने का अवसर मिलेगा। 



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