उत्तर प्रदेश में 27 जून तक पहुंचेगा मानसून 
| Rainbow News Network - Jun 21 2019 6:27PM

भुवनेश्वर। गर्मी से झुलस रहे ओडिशावालों के चेहरे आज खिल गए हैं क्योंकि आज लंबे इंतजार के बाद ओडिशा में मॉनसून ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवा ओड़िशा तट में प्रवेश कर गई है, भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक आगामी 12 घंटों में दक्षिण ओडिशा में भारी बारिश की आशंका है। विभाग ने कहा है कि आज गंजाम, गजपति, कंधमाल, बौद्ध, कलाहाण्डी आदि जिलों में भारी से भारी बारिश हो सकती है, इसलिए अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मॉनसून दस्तक देने के साथ पूरी तरह से सक्रिय हो गया है, जिसकी वजह से आज मॉनसून शाम या देर रात तक बंगाल में भी दस्तक दे सकता है, इसलिए मौसम विभाग ने कोलकाता में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि इसके बाद मॉनसून पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की ओर बढ़ेगा।

दिल्ली-एनसीआर में जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून के पहुंचने के आसार हैं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 जून तक मॉनसून पहुंचेगा। तो वहीं रांची समेत झारखंड के विभिन्न इलाकों में आज सुबह हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की बारिश हुई है जिससे लोगों को गर्मी और उमस से हल्की राहत मिली है, हालांकि ये प्री-मॉनसून बारिश है, बंगाल के बाद अगले 48 घंटे के दौरान मॉनसून झारखंड में दस्तक दे सकता है, मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिन तक राज्य के सभी इलाकों में बारिश संभव है।

तो वहीं रांची समेत झारखंड के विभिन्न इलाकों में आज सुबह हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की बारिश हुई है जिससे लोगों को गर्मी और उमस से हल्की राहत मिली है, हालांकि ये प्री-मॉनसून बारिश है, बंगाल के बाद अगले 48 घंटे के दौरान मॉनसून झारखंड में दस्तक दे सकता है, मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिन तक राज्य के सभी इलाकों में बारिश संभव है। आपको बता दें कि मॉनसून ने इस साल केरल में सात जून को प्रवेश किया था, जो कि पहले ही 7 दिन लेट था।

उसके बाद चक्रवात 'वायु' ने इसकी गति को प्रभावित कर दिया जिसके बाद इसकी चाल और भी धीमी हो गई। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 12 साल में यह पहली बार है जब मॉनसून देश में इतनी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जहां आमतौर पर इस समय तक देश के दो-तिहाई हिस्से तक मॉनसून पहुंच जाता है, वहीं इस बार यह सिर्फ 10-15 प्रतिशत हिस्से तक ही पहुंच पाया है, जिसकी वजह से मॉनसून की बारिश में 44 प्रतिशत कमी आई है।



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