अकबरपुर में फैला खसरा, चमकी बुखार फैलने की आशंका में लोग..???
| Rainbow News Network - Jun 22 2019 4:48PM

अम्बेडकरनगर। इस समय जबकि प्रचण्ड गर्मी पड़ रही है ऐसे में जिला मुख्यालयी शहर अकबरपुर व इससे जुड़े उपनगर शहजादपुर (अकबरपुर नगर पालिका क्षेत्र सीमा अन्तर्गत) के कई मलिन व घनी आबादी वाली बस्तियों में बच्चे और सयाने लोग खसरा (मीजिल्स) से पीड़ित होकर नीम-हकीम खतरा-ए-जान से इलाज करवाने को विवश हैं। लोगों ने सिर दर्द, बदन दर्द व अन्य लक्षणों की वजह से इसे बिहार में फैला जानलेवा लाइलाज चमकी बुखार का नाम देना शुरू कर दिया है, और लोग हर तरह से अनहोनी को लेकर चिन्ताग्रस्त होने लगे हैं। 

मिली जानकारी के अनुसार अकबरपुर शहर के मोहल्ला महानगर कॉलोनी (पश्चिमी) में स्थित एक कॉलोनी में रहने वाले कई लोग खसरा से ग्रस्त हैं। मो. कलाम खाँ के मकान में किरायेदार के रूप में रहने वाले कई परिवारों में बच्चे व सयाने छुतहा रोग खसरा से पीड़ित हैं। इन्हें तेज बुखार और इसके शरीर पर छोटे-छोटे दाने पड़ रहे हैं। पीड़ित परिवार के लोग अंधविश्वास के चलते इस रोग को छोटी माता का नाम दे रहे हैं और बगैर उपचार के ही प्रतीक्षा कर रहे हैं कि माता जी का प्रकोप जल्द समाप्त हो। कुछेक परिवार ऐसे हैं जो एलोपैथिक दवाएँ न लेकर होम्योपैथ और आयुर्वेदिक चिकित्सकों के परामर्श पर खसरा पीड़ितों को दवाएँ दे रहे हैं। अन्ध विश्वास और सटीक उपचार न होने की वजह से खसरा ठीक नहीं हो रहा है उल्टे इसका प्रकोप बढ़ने की खबरें मिल रही हैं। 

उक्त मोहल्ला निवासी मो. कलाम खान के किरायेदार मदन लाल विश्वकर्मा के बड़े पुत्र अमित विश्वकर्मा (राहुल उम्र 30 वर्ष) एक हफ्ते से खसरा जैसे छुतहा रोग से ग्रस्त है। बताया गया है कि राहुल का इलाज एक होम्योपैथ चिकित्सक द्वारा किया जा रहा है, परन्तु अभी तक उसको अपेक्षित राहत नहीं मिली है। इसी तरह इस परिवार के बगल वाले कमरे में रहने वाले एक अन्य परिवार का युवा पुत्र सूर्यम पाठक (23) पुत्र शिवनारायण पाठक खसरा (छोटी माता) की चपेट में आ चुका है। जो धीरे-धीरे ठीक होता बताया जा रहा है। 

इस बावत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अकबरपुर के छुतहा रोग मोबाइल प्रभारी डॉ. अशोक कुमार को सूचित किया गया परन्तु अन्यत्र व्यस्त होने की वजह से उन्होंने दो दिन उपरान्त बताया कि छुतहा मेडिकल स्टाफ मो. कलाम खाँ के यहाँ गया था परन्तु वहाँ कोई खसरा रोगी नहीं मिला, जबकि खसरा पीड़ित राहुल विश्वकर्मा की माता का सम्पर्क नम्बर व कॉलोनी का पूरा पता (लोकेशन) डॉ. अशोक को बताया गया था।

दुबारा फोन करने पर उन्होंने बताया कि उक्त क्षेत्र की ए.एन.एम. को वहाँ भेजा गया था उन्होंने बताया कि बच्चा ठीक हो गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि न तो वहाँ छुतहा रोग मेडिकल मोबाइल स्क्वॉड पहुँचा और न ही ए.एन.एम. पता लगाने व जाँच करने ही पहुँची। सूचना के तीसरे दिन डॉ. अशोक कुमार (मेडिकल आफिसर, सी.एच.सी. अकबरपुर) ने कहा कि यदि डॉ. हेमन्त कुमार (प्रभारी मेडिकल आफिसर, सी.एच.सी. अकबरपुर) जो पूरे जनपद के छुतहा रोग अधिकारी हैं के संज्ञान में खसरा फैलने की बात डाल दी जाए तब छुतहा रोग मेडिकल मोबाइल स्क्वॉड तत्परता से जाकर जाँचोपरान्त आवश्यक दवाएँ उपलब्ध करायेगा। 

विश्वसनीय लोगों की सूचना पर मेडिकल टीम अवश्य पहुँचेगी: डॉ. हेमन्त

डॉ. अशोक कुमार की बात सुनकर सी.एच.सी. प्रभारी डॉ. हेमन्त कुमार से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है मेडिकल स्टॉफ और ए.एन.एम. वहाँ गई थी दवा देकर आए हैं। जब यह बताया गया कि उन्हें जो सूचना दी गई है वह गलत है अभी तक वहाँ कोई मेडिकल स्टाफ नहीं पहुँचा है तब उन्होंने कहा कि ठीक है आपकी सूचना पर उक्त स्थान पर मेडिकल टीम भेज दी जाएगी। डॉ. हेमन्त ने कॉल बैक करके रोग पीड़ित परिवारों का लोकेशन मांगा। उम्मीद बढ़ी कि अब अकबरपुर/शहजादपुर और उन क्षेत्रों में जो सी.एच.सी. अकबरपुर सीमा में आते हैं में अब सूचना पाने पर डॉ. हेमन्त द्वारा मोबाइल मेडिकल टीम भेजकर पीड़ितों में दवा वितरण कराया जाएगा। 

यह तो रही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अकबपुर की सीमा क्षेत्र में आने वाले ऐसे मोहल्लों की बात जहाँ इस समय अज्ञात कथित छुतहा रोग खसरा (छोटी माता) का प्रकोप जारी है। यह रोग बच्चों में कम 25 से ऊपर के सयाने लोगों में अधिक देखा जा रहा है। लोग इसे अज्ञात बीमारी का भी नाम दे रहे हैं। रोग के लक्षणों की जानकारी न होने की वजह से लोगों में तरह-तरह की चर्चाएँ होना शुरू हैं। चूँकि अब तक बिहार मे चमकी बुखार का कहर चल रहा था और इस बुखार से पीड़ित अनेकों की मौतें हो गईं थी अब उसी आशंका से यहाँ के लोग भयाक्रान्त से हो गये हैं।  

सबको आशंका है कि कहीं यह बिहार वाली चमकी बुखार तो नहीं है। उधर सी.एच.सी. के दिग्गज जिम्मेदार डॉ. अशोक जैसे डाक्टरान इसे बहुत ही हल्का ले रहे हैं। प्राणलेवा रोगों के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने व छुतहा एवं अज्ञात बीमारियों की सूचना होने पर भी जब चिकित्सा दल अनदेखी कर रहा है तब ऐसे में यहाँ के लोगों का जीवन अवश्य ही संकट में कहा जा सकता है। 



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