बजबजा रहा है अकबरपुर, जनजीवन संकट में
| Rainbow News - Jul 6 2019 4:15PM

अम्बेडकरनगर। नगर पालिका अकबरपुर में मुख्य सड़क मार्ग से लेकर विभिन्न वार्डों की गलियों/मोहल्लों में फैली गन्दगी, लगे कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियों और सड़ान्ध से लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। नालियों के चोक होने से सारा गन्दा पानी सड़कों व गली/मोहल्लों में फैला रहता है जिससे उसमें मच्छर, मक्खियों व अन्य विषाणु/जीवाणुओं के पनपने से लोगों में तरह-तरह की संक्रामक बीमारियाँ फैलती हैं। ऐसा साल के हर महीने व मौसम में होता है। ऐसा नहीं है कि छुतहा बीमारियों के पाँव पसारने का कोई खास महीना या मौसम हो। अकबरपुर नगर पालिका क्षेत्र में ऐसी स्थिति साल के बारहों महीने बनी रहती है। 

गौरतलब है कि अकबरपुर पालिका प्रशासन द्वारा नगर को क्लीनसिटी बनाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जबकि पालिका क्षेत्र के सभी 25 वार्डों में साफ-सफाई व्यवस्था एक दम चौपट है। कहीं नालियाँ चोक होकर बजबजा रही हैं, तो कहीं कूड़े का ढेर लगा है जिसपर मक्खियाँ भिनभिना रही हैं ऐसे में समूचे वातावरण में सड़ान्ध फैला हुआ है। अकबरपुर नगर पालिका के सभी वार्डों की दशा लगभग ऐसी ही है। बदबूदार माहौल में लोग खुलकर सांस भी नहीं ले पा रहे हैं। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि बजबजाती नालियाँ और कूड़े का लगा ढेर उसपर भिनभिनाती मक्खियाँ और दुर्गन्धयुक्त वातावरण अकबरपुर नगर पालिका की पहचान बन गया है तो कतई गलत नहीं होगा। 

साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था न होने से रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का जीवन नारकीय बनकर रह गया है। यह स्थिति तब है जब बरसात के नाम पर यहाँ बस कुछेक बूंदे ही अभी तक पड़ी हैं। यदि यहाँ थोड़ी तेज बरसात हो जाए तो मोहल्लों की गलियों व निचले इलाकों में बने मकानों में घुटनों तक पानी जमा हो जाता है, क्योंकि बड़े नाले से लेकर छोटी-छोटी नालियाँ सभी गन्दगी से पटी पड़ी हैं। नालियाँ चोक होने से जल निकासी सुचारू रूप से नहीं हो पाती है फलस्वरूप सारा गन्दा पानी गलियों, सड़कों व घरों तक जमा हो जाता है। ऐसे में नगर वासियों की क्या दशा होती होगी, इसका अन्दाजा स्वयं लगाया जा सकता है। 

गन्दगी व सड़ान्ध भरे वातावरण में रहने को मजबूर लोगों में तरह-तरह की संक्रामक बीमारियाँ फैल रही हैं। अकबरपुर व इसके जुड़वा कस्बे शहजादपुर में व्याप्त गन्दगी से इस समय तमाम लोग गैस्ट्रो, डायरिया, हैजा, खसरा, चेचक, सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल फीवर आदि संक्रामक रोगों की चपेट में आ गये हैं। नालियों में जलजमाव से उसमें पनपने वाली मच्छर-मक्खियाँ संचारी रोगों को और बढ़ावा दे रही हैं। संक्रामक रोगों की चपेट में आने वालों से सरकारी व प्राइवेट अस्पताल भरे पड़े हैं। लेकिन शोचनीय बात तो यह है कि इस तरफ न तो पालिका प्रशासन का ध्यान जा रहा है और न ही किसी अन्य जिम्मेदार का। नगर जन अपनी समस्या किससे कहें, नहीं समझ पा रहे हैं। 

वार्ड नम्बर 11 जिसे उसरहवा मलिन बस्ती नम्बर 1 कहा जाता है की घनी आबादी में निवास कर रहे लोगों का जीवन बद से बद्तर हो गया है। ऐसा तब जब यहाँ जल निकासी का प्रबन्धन न होने से लोगों के घरों से निकलने वाला गन्दा पानी पूरी बस्ती में फैला रहता है, जिसकी वजह से संचारी रोगों को फैलाने वाले विषाणु, जीवाणु, कीटाणुओं की आबादी उत्तरोत्तर बढ़ती रहती है। साफ-सफाई का यह आलम है कि सफाई कर्मी गोलबन्द होकर अपने-अपने चहेतों के साथ चुनिन्दा स्थानों पर बैठे चुहलबाजी करते नजर आते हैं। प्रतिमाह अच्छी कमाई करने वाले ये सफाई कर्मी नालियों में नगर पालिका द्वारा प्रदत्त सफाई उपकरणों का इस्तेमाल कर उसकी सफाई करने में अपनी तौहीन समझते हैं। 

विकसित देशों की तरह ये सफाई कर्मी अपने-अपने घरों से निजी ऑटो वाहनों पर सवार होकर निकलते हैं और निश्चित स्थान पर वाहनों को पार्क कर नगर पालिका की पंजिका पर हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं। गलियों में गन्दगी हो, नालियाँ भठी हों, यत्र-तत्र-सर्वत्र जल-जमाव हो, हल्की बरसात में लोगों के घरों में पानी भर जाए इन सब समस्याओं से उनको कुछ लेना-देना नहीं रहता। नगर पालिका अकबरपुर में साफ-सफाई के लिए 307 सफाई कर्मी लगाए गए हैं। इनमें 32 सफाई कर्मी नपाप के स्थाई वेतनभोगी, 52 संविदा सफाई कर्मी और 223 सफाई कर्मी ठेके के माध्यम से तैनात किए गए हैं। सफाई कर्मियों की इतनी लम्बी फौज के बावजूद नगर के सभी 25 वार्डों में सफाई व्यवस्था का यह हाल है कि पुरानी अखबारी भाषा में इसे नगर न कहकर नरक कहा जाएगा। 

....तो बच जाएगी वार्ड नम्बर 11 उसरहवा मलिन बस्ती 

अकबरपुर के वार्ड नम्बर 11 उसरहवा मलिन बस्ती/कॉलोनी में स्थाई तौर पर बनी जल निकासी, सफाई और यत्र-तत्र-सर्वत्र फैली गन्दगी व चोक हुई नालियाँ, सड़ान्ध युक्त वातावरण, रोग फैलाते विषाणु, जीवाणु, कीटाणु की बढ़ती आबादी की समस्या के समाधान के हेतु हम यहाँ कुछ सुझाव दे रहे हैं। यदि नपाप अकबरपुर का प्रशासन उन पर अमल करे तो उसरहवा मलिन बस्ती नम्बर वन में उत्पन्न जानलेवा समस्या की स्थिति से यहाँ के वासिन्दों को निजात मिल सकती है। 

इस सुझाव पर अमल करने से न जल जमाव होगा, न कूडा-कचरा इधर-उधर फैलेगा, लोगों के घरों के गन्दे पानी की समुचित निकासी के साथ-साथ बरसात का पानी भी आसानी से गहरी नालियों से होता हुआ मुख्य नाले के जरिए तमसा में चला जाएगा। यदि ऐसा हुआ तब वार्ड नम्बर 11 उसरहवा के वासिन्दे अपनी इन समस्याओं को लेकर आवाजें भी बुलन्द नहीं करेंगे। 

मुख्य सुझाव- 

1- वार्ड नम्बर 11 उसरहवा मलिन बस्ती में मुख्य सड़क मार्ग से होकर गुजरने वाली चौड़ी गली (सड़क) के दोनों तरफ गहरी और चौड़ी नालियों का निर्माण कराया जाए। इस चौड़ी गली (सड़क) में एक ही संकरी नाली है जो कम चौड़ी और छिछली गहराई वाली है। यह मुख्य कारण है कि पूरी बस्ती में बारहो महीने जलजमाव की स्थिति बनी रहती है, जिससे सड़ान्ध व संचारी रोग फैलने का माहौल बना रहता है। 

2- अकबरपुर-टाण्डा मुख्य सड़क मार्ग से वार्ड नम्बर 11 उसरहवा मलिन बस्ती की मुख्य गली के अन्तिम छोर इल्तिफातगंज रोड स्थित प्रवीण बाल शिक्षा निकेतन के निकट सड़क के नीचे से गुजरने वाले भठे नाले की खुदाई व सफाई जे.सी.बी. से करवाई जाए। ऐसा करने से वार्ड नम्बर 11 का पूरा जल नाले के माध्यम से तमसा नदी में आसानी से चला जाएगा। 

3- मुख्य सड़क मार्ग (अकबरपुर-टाण्डा रोड) पर स्थित शिव मन्दिर से होकर पानी की निकासी के लिए मोड़ी गई नाली को वार्ड नम्बर 11 उसरहवा की छिछली नाली में मोड़ने के बजाए सीधा मुख्य सड़क मार्ग की नाली से जोड़ दिया जाए। 

4- उसरहवा कॉलोनी वार्ड नम्बर 11 की सभी गलियों की ऊँचाई (अपरेजिंग) मुख्य गली की सड़क के लेबल में कर दी जाए। 

5- समय-समय पर नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा वार्ड का निरीक्षण किया जाए। ऐसा करने से सफाई कर्मी मुस्तैदी से अपना काम करेंगे और समस्या से जूझ रहे नगर जनों को भी इस बात का एहसास होगा कि उनकी समस्याओं को देखने व सुनने वाला कोई तो है। 



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