दिल्ली लखनऊ तेजस एक्सप्रेस होगी देश की पहली प्राइवेट ट्रेन
| Rainbow News Network - Jul 9 2019 5:43PM

रेलवे यूनियनों के विरोध-प्रदर्शन की धमकी के बीच आखिरकार रेलवे ने ट्रेनों के संचालन के लिए प्राइवेट सेक्टर के साथ हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है। दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस प्राइवेट कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली पहली ट्रेन होगी। सोमवार को सूत्रों ने बताया, रेलवे ने संकेत दिए हैं कि रेलवे अपनी दो ट्रेनों के संचालन की कमान प्राइवेट सेक्टर के हाथों में सौंपने के 100 दिन के एजेंडा पर आगे बढ़ रहा है। 

हालांकि, रेलवे बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-लखनऊ पहला रूट है जिस पर चलने वाली ट्रेनों का संचालन प्राइवेट ऑपरेटर्स को सौंपा जा रहा है। अधिकारी ने कहा, 'इस बारे में एक महीने के अंदर फैसला ले लिया जाएगा। IRCTC अभी भी इसके मॉडल पर काम कर रही है।' बता दें कि दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस का ऐलान 2016 में हुआ था लेकिन हाल ही में जारी हुए नए टाइम टेबल में इसे शामिल किया गया था। 

बता दें कि रेलवे यूनियन ने ट्रेन संचालन को निजी हाथों में सौंपने का विरोध किया है। रेलवे बोर्ड एक दूसरे रूट की भी तैयारी कर रहा है और यह रूट भी 500 किलोमीटर की दूरी के दायरे में ही होगा। तेजस एक्सप्रेस इस रूट की बहु-प्रतीक्षित ट्रेनों में से एक है और फिलहाल यह उत्तर प्रदेश के आनंदनगर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में है। ट्रेन संचालन के लिए बोली की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे निजी कंपनियों को सौंप दिया जाएगा। आईआरएफसी ने बताया कि ट्रेनों की कस्टडी को इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) को ट्रांसफर किया जाएगा, जो इसके लीज चार्ज से लेकर सभी शुल्कों का भुगतान फाइनैंसिंग डिपार्टमेंट को करेगी। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'दो ट्रेनों के साथ यह प्रयोग शुरू किया जाएगा और हमें उम्मीद है कि अगले 100 दिनों के अंदर हम कम से कम 1 ट्रेन को निजी ऑपरेटर के हाथों में सौंपने में कामयाब होंगे। इन रूट्स को चुनने के दौरान ध्यान रखा गया कि रूट्स पर कम भीड़ हो और जरूरी टूरिस्ट स्पॉट कनेक्ट होते हों। जल्द ही दूसरी ट्रेन को भी चुन लिया जाएगा।' 

बता दें कि दिल्ली-लखनऊ रूट पर अभी कुल 53 ट्रेनें चलती हैं, लेकिन इनमें एक भी राजधानी नहीं है। इस रूट पर चलने वाली स्वर्ण शताब्दी में सबसे ज्यादा टिकट की मांग रहती है और यह 6.30 घंटे में अपना सफर पूरा करती है। शुरुआत में आईआरसीटीसी सिर्फ दो ट्रेनों का संचालन निजी कंपनियों को सौंपेगी। इसके लिए 10 जुलाई तक प्रस्ताव फाइनल करने और 4 जुलाई को हुई मेंबर, ट्रैफिक के साथ रेलवे के टूरिज्म और कैटरिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद इसे रेलवे बोर्ड को जमा कराने को कहा गया है। 

100 दिनों के प्लान में रेलवे के प्रस्ताव में ऑपरेटर्स को दो ट्रेनों का ऑफर दिया गया था। रेलवे ने यह भी कहा था कि अगले 100 दिनों में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) और रिक्वेस्ट फॉर कोट (RFQ) जारी करेगी। हालांकि, रेलवे के इस प्रस्ताव को रेलवे यूनियन की आलोचना झेलनी पड़ी है जिन्होंने इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन करने की धमकी दी है। 



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