कोई नहीं कर सकता रेलवे का निजीकरण, ऐसी कोई योजना नहीं : पीयूष गोयल
| Rainbow News - Jul 13 2019 12:08PM

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज साफ किया कि रेलवे का 'कोई निजीकरण कर ही नहीं सकता और इसके निजीकरण का कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने कहा कि ‘राजनीतिक लाभ के लिए नई ट्रेनों का सपना दिखाने’ के बजाय नरेन्द्र मोदी सरकार ने सुविधाएं और निवेश बढ़ाने के लिए पीपीपी आमंत्रित करने का इरादा किया है। लोकसभा में वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर बृहस्पतिवार को देर रात तक चली चर्चा का आज जवाब देते हुए रेल मंत्री ने कहा, ‘मैं बार-बार कह चुका हूं कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा।’

उन्होंने कहा कि लेकिन कोई सुविधा बढ़ाने की बात करे, प्रौद्योगिकी लाने की बात करे, कोई नया स्टेशन बनाने की बात करे, कोई हाई स्पीड, सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की बात करे, स्टेशन पर सुविधा बढ़ाने की बात करें तो इसके लिये निवेश आमंत्रित किया जाना चाहिए। पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे में सुविधा बढ़ाने, गांवों और देश के विभिन्न हिस्सों को रेल सम्पर्क से जोड़ने के लिये बड़े निवेश की जरूरत है। अच्छी सुविधा, सुरक्षा, हाई स्पीड आदि के लिये निजी सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) को प्रोत्साहित करने का सरकार ने निर्णय किया है। 

रेल मंत्रालय के अनुदान की मांग पर चर्चा के दौरान बृहस्पतिवार को कांग्रेस, तृणमूल, डीएमके सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि आम बजट में रेलवे में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी), निगमीकरण और विनिवेश पर जोर देने की आड़ में इसे निजीकरण के रास्ते पर ले जाया जा रहा है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को बड़े वादे करने की बजाय रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारने और सुविधा, सुरक्षा और सामाजिक जवाबदेही का निर्वहन सुनिश्चित करना चाहिए। 

इस पर गोयल ने कहा, ‘रेलवे बजट पहले जनता को गुमराह करने के लिए होते थे, राजनीतिक लाभ के लिए नई ट्रेनों के सपने दिखाए जाते थे।’ उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के दौरान रेल संबंधी घोषणाएं जनता को गुमराह करने और चुनाव जीतने के लिये की जाती थीं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेल बजट का आम बजट में विलय करने की पहल करके देशहित का काम किया है। अब जो काम किया जा सकता है, उसी की घोषणा होती है और काम होता है।

रेलवे के निजीकरण करने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे में बाहर से निवेश आमंत्रित करने के लिये ‘कारपोरेटाइजेशन’ की बात कही गई है. इसका भी फैसला पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान हुआ था, अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे की बेहतरी और सुविधाएं बढ़ाने के लिये अगले 10-12 साल में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का इरादा किया गया है। हम नई सोच और नई दिशा के साथ काम कर रहे हैं। क्षमता उन्नयन के लिये छह लाख करोड़ रुपये, माल ढुलाई क्षमता को बेहतर बनाने के लिये 4.5 लाख करोड़ रुपये, स्वर्ण चतुर्भुज क्षेत्र में गति बढ़ाने के लिये 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का इरादा किया गया है।



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