अभी डूबे रहिए पानी में, बरसात बाद देखा जाएगा: सुरेश कुमार मौर्य
| Rainbow News Network - Jul 16 2019 3:44PM

उसरहवा की समस्या पर ई.ओ. अकबरपुर ने कुछ यूँ कहा.....

मानसून क्या आया..........लोग सांसत में पड़ गये..........लोगों के दिन का चैन और रातों की नींद गायब हो गई। मारो ऐसे मानसून को......जब आशियाना ही नहीं रहेगा तब बरसात और मानसून को लेकर कैसा उत्साह, कैसी उमंग.....? जी हाँ.......तात्पर्य यह कि मानसून सक्रिय होने के बाद से लगातार हो रही बरसात लोगों के लिए मुसीबत बन गई है, क्योंकि इस बरसात में जल निकासी का समुचित प्रबन्ध न होने से लोगों के घरों में पानी जमा हो गया है, जिसके चलते लोग जहाँ अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं वहीं जल जमाव होने से कई मकानों के धराशाई होने की आशंका बनी हुई है। 

यहाँ हम जिक्र कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद मुख्यालयी शहर अकबरपुर नगर पालिका परिषद की। उक्त नपाप के लोग इस समय सक्रिय हुए मानसून को कोसते हुए बरसात न होने की दुआ मांग रहे हैं। सबसे ज्यादा नारकीय स्थिति का सामना कर रहे हैं वार्ड नम्बर 11, उसरहवा कॉलोनी वासी। क्योंकि बरसात में गली कूचों के साथ ही उनके घरों में पानी जमा हो जाने से लोग अपने घरों में कैद होकर रह गये हैं।

मानसूनी बरसात और जल निकासी का समुचित प्रबन्ध न होने से उक्त मोहल्ले में हल्की सी बरसात में भी गलियाँ, सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं ऐसे में सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि मानसूनी और लगातार होने वाली बरसात में स्थिति क्या होती होगी। बीते दिनों जब से मानसून ने दस्तक दी है और बरसात लगातार जारी है तब से इस मोहल्ले में रहने वालों का दिन का चैन और रातों की नींद छिन गई है। न जाने कब और किस समय बरसात होने लगे और घरों में भरा पानी और विकराल रूप ले ले..........इसी आशंका से लोग चौबीसों घण्टे घिरे रहते हैं। 

इन सबसे इतर नगर पालिका परिषद अकबरपुर के जिम्मेदारों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही है। उक्त मोहल्लावासी किस तरह का नारकीय जीवन जीने को विवश हैं इससे पालिका के जिम्मेदार ओहदेदारों को क्या लेना-देना.........। उन्हें मतलब है तो सिर्फ अपने कमीशन और आर्थिक लाभ से। नगर पालिका अकबरपुर के लोगों का कहना है कि जब से अधिशाषी अधिकारी की कुर्सी पर सुरेश कुमार मौर्या विराजमान हुए हैं तब से नगरवासी नगरीय सुविधाओं से वंचित होकर रह गये हैं। न गली कूचों व नालियों की साफ-सफाई व्यवस्था, न जल निकासी का समुचित प्रबन्ध............। 

इस नगर पालिका के 25 वार्डों में गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है। जगह-जगह जलजमाव, कूड़े का ढेर, बजबजाती नालियाँ लोगों की नियति बन गई है। कई मोहल्लों में जल-जमाव की स्थिति यह है कि सयाने किसी तरह पानी में घुसते हुए अपने कामों को जा रहे हैं जबकि बच्चे घरों से निकलकर स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं, ऐसे में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 

वार्ड नम्बर 11 उसरहवा कॉलोनी की जलभराव की समस्या के बावत अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद अकबरपुर सुरेश कुमार मौर्या से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद उक्त समस्या का स्थाई समाधान तलाशा जाएगा। अभी जबकि बरसात हो रही है ऐसे में कुछ भी नहीं किया जा सकता। बरसात का मौसम समाप्त होने तक उक्त मोहल्लावासियों को प्रतीक्षा करनी होगी।

इस ढपोरशंखी वादे को सुनने के बाद जब ई.ओ. से कहा गया कि वर्तमान में यदि इल्तिफातगंज रोड स्थित प्रवीण बाल शिक्षा निकेतन के निकट सड़क के नीचे से निकाले गये नाले की जेसीबी से सफाई करवा दी जाए तो जल-भराव की समस्या से जूझ रहे उक्त मोहल्ला वासियों को कुछ हद तक राहत मिल जाएगी। साथ ही मुख्य सड़क मार्ग बसस्टेशन-टाण्डा रोड पर स्थित श्री शिवमन्दिर के बगल से जल निकासी हेतु निकाली गई उसरहवा होकर जाने वाली नाली को मुख्य सड़क की नाली से जोड़ दिया जाए और इसको मोड़ पर ही बन्द कर दिया जाए तब भी जलभराव की स्थित से थोड़ी-बहुत निजात पाई जा सकती है।

इस सुझाव को ई.ओ. मौर्य ने सुनना गवारा नहीं समझा। यह प्रॉब्लम वार्ड नम्बर 11 उसरहवा कॉलोनी की है, लोग यहाँ के स्थाई निवासी हैं और विकट समस्या से जूझ रहे हैं। ई.ओ. सरकारी मुलाजिम हैं, आज यहाँ हैं कल अन्यत्र उनका तबादला हो जाएगा। इसलिए वे इस समस्या को गम्भीरता से न लेकर तरह-तरह की बातें करके लोगों टरका रहे हैं। उनकी यह स्थिति देखकर यही कहा जा सकता है कि जाके पाँव न फटी बिवाई सो का जाने पीर पराई..........। 

खैर! ई.ओ. सुरेश कुमार मौर्य की इस तरह की टरकाऊ, ढपोरशंखी और गैर जिम्मेदाराना बात सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने तो यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि बरसात का मौसम समाप्त होने तक उक्त मोहल्लावासी प्रतीक्षा करें.........लेकिन उन्हें शायद इस बात का अन्दाजा नहीं है कि बरसात समाप्त होने के पहले मोहल्ले की गलियों व लोगों के घरों में हुए जलभराव के चलते कई मकानों के धराशाई होनेे से जान-माल का कितना नुकसान हो सकता है.....? इस समस्या के बावत ऐसा 2017 (अकबरपुर में ज्वाइनिंग अगस्त 2017) से कहते चले आ रहे हैं और यह इस बार उनका तीसरा मानसूनी सत्र है।



Browse By Tags



Other News