अम्बेडकरनगर : पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने से वंचित है जिले के लाखों किसान
| Rainbow News Network - Jul 22 2019 4:09PM

योजना का लाभ न पाने वाले किसान लगा रहे हैं कृषि विभाग का चक्कर

नरेन्द्र मोदी सरकार की किसानों से जुड़ी सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम का अब तक देश के चार करोड़ से अधिक किसान लाभ उठा चुके हैं। उन्हें चार-चार हजार रुपये मिल चुके हैं। लेकिन 8.5 करोड़ किसानों को अब भी इस स्कीम का लाभ मिलने का इंतजार है। यह तो रही पूरे देश की बात। यहाँ हम उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले का जिक्र कर रहे है। इस जिले के 1 लाख 68 हजार किसानों को अभी भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का इंतजार बना हुआ है।

लोकसभा चुनाव के पहले लगभग सवा लाख किसान ही सौभाग्यशाली रहे, जिन्हें इस योजना का लाभ मिल पाया। चुनाव का दौर समाप्त होने तथा आचार संहिता हट जाने के बाद भी डेढ़ लाख किसान ऐसे हैं, जो लगातार योजना का लाभ पाने को लेकर सरकार व स्थानीय प्रशासन की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं। इनमें से कई किसान ऐसे हैं, जो अक्सर कृषि विभाग कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें लगता है कि कहीं ऐसा न हो कि पैरवी के अभाव में उनका नाम योजना का लाभ पाने वाले लोगों की सूची में फिर न छूट जाए। इसी आशंका में वे एड़ियां घिसने को विवश हैं।

लोकसभा चुनाव के पहले केन्द्र सरकार ने किसानों को पेंशन देने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। पूरे देश में प्रशासनिक मशीनरी को उन किसानों को सूचीबद्घ करने में लगा दिया गया, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम कृषि भूमि थी। बाद में इस सीमा में छूट की भी घोषणा हुई। उधर जिले में कुल 3 लाख 39 हजार 584 किसानों के सापेक्ष 2 लाख 95 हजार 422 किसानों का रजिस्ट्रेशन योजना के तहत कर लिया गया। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगती इससे पहले ही 1 लाख 27 हजार 142 किसानों को योजना का लाभ मिल गया। ऐसे किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इन किसानों में से लगभग एक लाख किसानों के खाते में 2-2 किस्त पहुंच गई। 

दोनों किस्तों को मिलाकर किसानों को कुल चार हजार रुपए का लाभ मिला। इसी बीच आदर्श आचार संहिता लग गई, जिससे शेष किसानों को तत्काल योजना के तहत धनराशि मिलने की उम्मीद टूट गई। यह बात अलग है कि आदर्श आचार संहिता समाप्त हुए लगभग डेढ़ माह का समय बीत गया, लेकिन किसानों को धनराशि का इंतजार बना हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ऐसे किसान तमाम उम्मीदें लिए प्रतिदिन कृषि विभाग कार्यालय पहुंचते हैं, जहां से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।



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