क्या यही 'पार्टी विथ डिफरेंस' है?
| Dr. Arpan Jain 'Avichal' - Aug 1 2019 4:10PM

उन्नाव से शुरू हुई एक कहानी जिसमें आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में जनता के प्रतिनिधि है। उन पर उन्नाव बलात्कार मामले में ४ जून २०१७ को १७ वर्षीय लड़की के कथित बलात्कार का आरोप है। इस मामले में अब तक दो आरोप पत्र दाखिल किये जा चुके हैं। पहला आरोप पत्र ११ जुलाई २०१८ को केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दाखिल किया गया और इसमें १७ वर्षीय लड़की के बलात्कार के आरोपी के रूप में उत्तर प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी पाया गया।

दूसरा आरोप पत्र १३ जुलाई २०१८ को दाखिल किया गया, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई को तीन पुलिसकर्मियों और पाँच अन्य लोगों के साथ उन्नाव मामले को कथित तौर पर तैयार करने का आरोप लगा। हाल ही के दिनों में पीड़िता के सड़क पर ट्रक द्वारा टक्कर मारी जिसमें पीड़िता ने कहा कि यह कुलदीप ने करवाया है। तब क्या योगी जी उसकी जाँच नहीं करवा सकते? हिमाचल के भाजपा नेता व नेत्री के वीडियों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद फिर पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे गए। क्या ये संस्कार शेष रह गये पार्टी के?

कुल्लू जिला के बंजार से ताल्लुख रखने वाली भाजपा नेत्री और भाजपा के युवा नेता का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि नेत्री भाजपा में महिला मोर्चा की पदाधिकारी है और युवक भाजपा युवा मोर्चा का पदाधिकारी है। वीडियो का दृश्य किसी सरकारी निवास के बाथरूम का है। जहां दोनों ने अश्लील वीडिया शूट किया है दृश्य को देखकर ऐसा लगा रहा है कि वीडियों दोनों की रजामंदी से बनाया गया है। लेकिन यह वीडियों वायरल कहां से हुआ है यह छानबीन करने का विषय है। वीडियों में नहाने से लेकर अवैध संबंध तक का दृश्य शूट किया गया है।

ऐसे ही मध्यप्रदेश के उज्जैन का मामला जहाँ भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री प्रदीप जोशी का बीते दिनों एक युवक के साथ कथित अश्लील चैट और वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने जोशी को पद से मुक्त तो कर दिया है, किन्तु क्या यह संस्कार भाजपा में भी? मामले कई है जिनमें 'पार्टी विथ डिफरेंस' का राग अलापने वाले राजनैतिक दल भाजपा के पदाधिकारियों में चारित्रिक दोष जनमानस के बीच पहुँच रहें है जबकि उसी राजनैतिक दल के आला नेता चारित्रिक पतन का ठीकरा विपक्षी दल कांग्रेस को कभी नेहरू-गाँधी के नाम पर तो कभी इंदिरा के नाम पर तो कभी शशि थरूर के बहाने फोड़ते रहते है।

आखिर पोगापंथी की भी पराकाष्ठा है यह कि चारित्रिक पतन का मार्ग भाजपा में भी इतनी आसानी से खुला हुआ मिलेगा, जो अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के चरित्र प्रमाणपत्र भी न प्राप्त कर पाएं यहाँ तक कि हजारों बौद्धिक शिविरों और सैकड़ों प्रशिक्षण वर्गों में भी चरित्र निर्माण की शिक्षा न दे पाए। एक तरफ पार्टी के मुख्य नायक और देश मे प्रधानमंत्री सम्पूर्ण देश को आश्वस्त करते है कि आप निश्चिंत हो जाइए, क्योंकि चौकीदार जाग रहा हूँ और दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी के नेता अपने बिस्तरों की सजावट करने में व्यस्त है बेचारी जनता अपनी बहु-बेटियों के लिए चिंतित है। आखिर यह दोहरा चरित्र क्यों? अब पार्टी ही वारांगना बनी घूम रही है तो कौन उसके लिए खरीददार नहीं ढूंढेगा? कर्नाटक में एक चरित्र उजागर हुआ तो दूसरे राज्यों में चारित्रिक दोषों के बोझ में पार्टी और पार्टी के सिद्धांतों के साथ पूर्वजों का मान-सम्मान व साख भी दाँव पर लग गई।

यहाँ दुशासन भी पार्टी के ही लोग है और द्रोपदी तो पार्टी का समृद्धशाली इतिहास व साख बनी हुई है। ऐसे हालात में ज़मीर के अस्तित्व की लड़ाई के लिए महाभारत का होना तय है। आज वे फिजा बिगाड़ने के लाख जतन कर ले, किन्तु फिर भी सफलता इसी में है कि सामंजस्य बना हुआ रहें और पार्टी को मूल्य आधारित बनाएं रखें। अन्यथा चारित्रिक शुद्धता के न होने से अच्छी-अच्छी इमारतों की बुनियाद हिल जाती है और इमारतें ढह जाती है।



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