नेताओं के अभद्रतापूर्ण व्यवहार....
| -Priyanka Maheshwari - Aug 5 2019 1:13PM

स्त्री पर अभद्र टिप्पणी और दुष्कर्म दोनों अलग बातें हैं लेकिन दोनों ही स्त्री की अस्मिता से जुड़े हुए हैं। महिला राजनेताओं पर अभद्र टिप्पणियां करने वाले नेता हर पार्टी के हैं। यह बात किसी एक व्यक्ति या दल विशेष के लिए नहीं बल्कि हर उस घटिया मानसिकता वाले लोगों के लिए है जो इस तरह के बयानों को अंजाम देते हैं। आज राजनीतिक दल जिस तरह से निचले स्तर पर जा रहे हैं और विवादित या चर्चित होने के लिए महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करके निचले स्तर पर जा रहे हैं इससे उनकी ओछी मानसिकता का प्रमाण मिलता है। ये सिर्फ शारीरिक शोषण ही नहीं बल्कि स्त्री को मानसिक रूप से कमजोर करने की कोशिश करते हैं। उन पर हावी होने की कोशिश करते हैं। सियासी दांवपेच अपने पौरुष के बल पर खेलिए ना कि हल्के पैतरेबाजी से।

आजम खान, नरेश अग्रवाल, शरद यादव जैसे नेता जो महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करते हैं इससे उनका मानसिक स्तर मालूम पड़ता है। उनकी सोच कितनी हल्की है ये जाहिर होता है या शायद अपने सामने वाले को परास्त करने का उनके पास यही एकमात्र तरीका है। यह जो आजकल उन्नाव गैंगरेप चर्चा में है विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की दबंगई दिखाई देती है। पीड़िता का परिवार किन तकलीफों से गुजर रहा है यह जगजाहिर है हालांकि विधायक को अपनी दल से निष्कासित किया जा चुका है और जांच चल रही है। ये अपराध करके बड़ी शान से सीना तान कर चलते हैं और कानून को अपने पैर की जूती समझते हैं। कुलदीप सेंगर का निकाला जाना या आजम खान का माफी मांगने से इस तरह के अपराध बंद हो जाएंगे? वैसे यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है।

थोड़ी जानकारी हासिल करने के बाद मालूम हुआ कि 2012 में संसद में असम हिंसा पर चर्चा हो रही थी और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे सदन में बोल रहे थे उनके बयान पर अरुण जेटली और जया बच्चन ने टोका तो शिंदे ने जया बच्चन को कह दिया कि "बैठ जाइए यहां गंभीर मसले पर चर्चा हो रही है किसी फिल्मी मुद्दे पर नहीं"। इस बात पर जया बच्चन बहुत नाराज हुई और महिला सांसदों ने आपत्ति जताई। हालांकि बाद में शिंदे ने माफी मांगी। शरद यादव यूं तो बहुत वरिष्ठ देता है लेकिन अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। शरद यादव ने वसुंधरा राजे पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। "वसुंधरा को आराम दो, बहुत थक गई हैं, बहुत मोटी हो गई है, पहले पतली थी, मध्य प्रदेश की बेटी है"। वसुंधरा राजे ने इस बात पर नाराजगी जताई थी।

अक्सर महिलाएं अपने पहनावे, अपनी शारीरिक बनावट, रंग रूप या व्यवहार को लेकर अभद्र टिप्पणियों का शिकार होती रहती है। शरद यादव की और भी कई अभद्र टिप्पणियां है महिलाओं को लेकर। और तो और हमारे प्रधानमंत्री भी इससे अछूते नहीं रहे। 2012 में जब मोदी चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे तो शशि थरूर की पत्नी सुनंदा थरूर को के बारे में उन्होंने कहा था "वाह क्या गर्लफ्रेंड है? आपने कभी 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड देखी है?" बाद में शशि थरूर ने इस टिप्पणी का करारा जवाब दिया था। अभी हाल ही में 2018 में रेणुका चौधरी की हंसी पर भी उन्होंने टिप्पणी की थी जो काफी चर्चा में रही। 2012 में ही गैंगरेप के बाद दिल्ली की महिलाओं ने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन पर राजनेता आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बाज नहीं आए। पश्चिम बंगाल के कांग्रेस सांसद अभिजीत मुखर्जी ने कहा "दिल्ली में 23 वर्षीय मुखर्जी के साथ हुए दुष्कर्म के विरोध में हिस्सा ले रही छात्राएं सजी-धजी महिलाएं हैं, उन्हें असलियत मालूम नहीं है, हाथ में मोमबत्ती लेकर सड़कों पर आना फैशन बन गया है। ये सजी महिलाएं पहले डिस्कोथेक जाती हैं और फिर इस गैंगरेप के खिलाफ विरोध के लिए इंडिया गेट पहुंच गयी।" हालांकि इस बयान के बाद उन्होंने माफी मांगी। सीपीआईएम नेता अतिसुर रहमान का बयान ममता मुखर्जी की बात पर "हम ममता दी से पूछना चाहते हैं कि उन्हें कितना मुआवजा चाहिए? बलात्कार के लिए कितना पैसा लेंगी?" यह एक घटिया मानसिकता का प्रमाण है।

जया बच्चन, जया प्रदा, स्मृति ईरानी, प्रियंका वाड्रा, मायावती जैसी बड़ी नेता महिलाएं भी इससे अछूती नहीं है। प्रियंका वाड्रा अपने कपड़ों और शारीरिक बनावट के लिए, जया बच्चन को नाचने वाली, स्मृति ईरानी को पैसों के लिए ठुमके लगाने वाली और अब ये राजनीति सिखाएंगी जैसी टिप्पणियां सुनने को मिली। महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के बयानों के किस्से बहुतेरे हैं लेकिन क्या यह सही है? और अभी तक इस पर कठोर कानून क्यों नहीं? क्यों यह हल्की डांट फटकार के बाद बच निकलते हैं?

शारीरिक बनावट, कपड़ों को लेकर टिप्पणियां या दुष्कर्म जैसे अपराध को मामूली बताना और यह कहना कि लड़कों से गलती हो जाती है, ऐसी मानसिकता की वजह से इन बातों को बढ़ावा नहीं मिल रहा है? क्यों इन अभद्र टिप्पणियों को हल्का और सामान्य मान लिया जाता है? जब हमारे नेतागण ऐसे हैं तब हम अपने देश में अपने युवाओं के सामने किस तरह का संस्कार रख रहे हैं? और कैसे अपेक्षा करें कि वह संस्कारी बने? और माफी मांगने से नेताओं की मानसिकता तो नहीं बदल जाती? इस विषय पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और दोषी व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए।



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