370 के फैसले से पाकिस्तान में हाहाकार
| Rainbow News Network - Aug 5 2019 3:08PM

मोदी सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 खत्म करने का बड़ा फैसला लिया। राज्यसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पेश किया। राष्‍ट्रपति के हस्‍ताक्षर के बाद अब यह कानून राज्‍य से हट गया है और जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य को मिला विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म हो चुका है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को विधानसभा वाले केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा मिल गया है, वहीं लद्दाख भी जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग होकर बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। भारत सरकार के इस फैसले का सीधा असर पाकिस्तान में देखने को मिला है।

पाकिस्‍तान के शेयर बाजार में साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सोमवार को पाकिस्तान शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स केएसई-100 करीब 600 अंक लुढ़क कर 31,100 के स्‍तर पर आ गया। पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें करीब 1.75 फीसदी से अधिक की गिरावट है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का शेयर बाजार पिछले दो साल में सबसे खराब दौर से गुजर रहा है।

पाकिस्तान के शेयर बाजार में गिरावट का ये दौर कोई पहली बार नहीं आया है। इससे पहले जब भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद एयरस्ट्राइक किया था तब भी पाकिस्तान के शेयर बाजार में बेचैनी देखने को मिली थी। उस समय पाकिस्तान के शेयर बाजार ने लगातार तीन कारोबारी दिनों में करीब 2000 अंकों से ज्यादा की बढ़त गंवा दी थी। अब एक बार फिर से जिस तरह भारत सरकार ने कश्मीर को लेकर अहम फैसला लिया, इससे पाकिस्तान के शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370(1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का संकल्प पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटाने में एक सेकंड की भी देर नहीं करनी चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, "संविधान में आर्टिकल 370 अस्थाई था, इसका मतलब ही यह था कि इसे किसी न किसी दिन हटाया जाना था लेकिन अभी तक किसी में राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। लोग वोट बैंक की राजनीति करते थे लेकिन हमें वोट बैंक की परवाह नहीं है। मैं इस मामले में सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं। विपक्ष के नेता, पूरे विपक्ष और कश्मीर मुद्दे पर सत्ता पक्ष के सदस्यों की ओर से सभी चर्चाओं के लिए तैयार हूं।" 



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