खाद्य सुरक्षा महकमे के लिए चुनौती बने ऐसे रेस्तराँ...
| Rainbow News Network - Aug 6 2019 4:21PM

अम्बेडकरनगर में देसी थाली गायब और अब इसके स्थान पर फास्टफूड, स्पाइसी फूड, चाइनीज फूड, साउथ इण्डियन फूड ने अपना सिक्का जमाना शुरू कर दिया है। लोग आधुनिकता के चलते ऐसे रेस्तराओं में जाना अपना स्टेटस सिम्बल मानते हैं और मेनू देखकर विदेशी और अंग्रेजी नाम वाले डिसेज का आर्डर करते हैं। उन्हें सिर्फ जायके से मतलब होता है, इन डिसेज के उपभोग से स्वास्थ्य पर कितना कुप्रभाव पड़ता है इनकी समझ से परे होता है। 

बताना आवश्यक है कि ऐसे लक-दक आधुनिक रेस्तराओं में बनने वाले खाद्य पदार्थों में उपयोग की जाने वाली सामग्रियाँ मानक के विपरीत, गुणवत्ता विहीन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायन युक्त होती है। हालांकि जिले का खाद्य सुरक्षा महकमा काफी सक्रिय है। नित्य जन स्वास्थ्य के दृष्टिगत जनपद में भ्रमणशील रहकर इसके ओहदेदार चेकिंग अभियान चलाते रहते हैं। इनके द्वारा खाद्य पदार्थ निर्माताओं/विक्रेताओं को जागरूक भी किया जाता है, परन्तु व्यवसायीगण अधिक लाभ के चक्कर में पड़कर जन स्वास्थ्य को ताक पर रखकर अखाद्य सामग्रियों का उपयोग कर रहे हैं।

बताया जाता है कि मांसाहारी रेस्तराओं/जलपान गृहों में सड़े-गले व दूषित मांस का उपयोग किया जाता है। कबाब जो विशेष प्रकार के बोनलेस मांस से बनाया जाता है के निर्माण में यहाँ किस जानवर के मांस इस्तेमाल किया जा रहा है बता पाना मुश्किल है। चर्चा है कि इस तरह के मांसाहार डिस में सस्ते दरों पर मिलने वाले जानवरों के मांस का इस्तेमाल किया जा रहा है। बहरहाल कुछ भी हो...................

इस समय एक फैशन सा चला है कि जो लड़के बाहर बड़े शहरों में होटलों पर बैरा व बर्तन मांजने का काम करने के साथ-साथ डिसेज निर्माण (किचेन) घर में कारीगरों का सहयोग कर 2 से लेकर 5 वर्ष तक नौकरी कर चुके हैं अब वे ही लोग अपने मुल्क को वापस होकर आधुनिक स्टाइल में रेस्तराँ/जलपान गृह खोलकर पाश्चात्य सभ्यता में लिप्त वर्तमान पीढ़ी को तरह-तरह के विदेशी व अंग्रेजी नामों का डिसेज परोस रहे हैं। ये अल्पज्ञ हैं जिन्हें खाद्य सुरक्षा से सम्बन्धित नियम व कानून की भी जानकारी नहीं है।

अम्बेडकरनगर के मुख्यालयी शहर अकबरपुर/शहजादपुर में इस तरह के रेस्टोरेन्ट, जलपान गृहों की तादात काफी बढ़ी हुई है। आश्चर्य होता है कि अधिकांश रेस्टोरेन्ट संचालकों द्वारा खाद्य सुरक्षा महकमे से लाइसेन्स भी नहीं प्राप्त किया गया है। दिल्ली, मुम्बई, लखनऊ, कोलकाता जैसे बड़े शहरों की तर्ज पर इस जिले में रेस्टोरेन्ट, स्नैक बार व ढाबे खोलकर विदेशी नामों की डिसेज महंगे दामों पर बेंची जा रही है।

स्पाइसी फूड कार्नर व चाइनीज स्पाइसी फूड, फेवरिट टेस्ट आदि अनेक आधुनिक नामों से रेस्तराँ का संचालन बेरोक-टोक किया जा रहा है। इन रेस्तराओं/जलपान गृहों में छात्र-छात्राएँ, नौकरी पेशा लोग व नई पीढ़ी के युवक/युवतियाँ जाकर विभिन्न नामों से मिलने वाले फास्ट फूड तथा व्यंजनों का चटखारे के साथ जायका लेते हैं। यही नहीं इन डिसेज का उपभोग करने वाले ग्राहक अच्छी खासी कीमत भी अदा करते हैं। 

इस समय नवाबी कबाब, चिकन रोल, एग रोल, कबाब पराठा, वेज/नॉनवेज बिरयानी, पनीर चिल्ली, वेज/नॉनवेज मंचूरियन, पनीर चिल्ली, मशरूम, चिकेन लालीपॉप, हक्का नूडल्स, चिल्ली चिकेन, मैंचो सूप, स्प्रिंग रोल्स, फ्राइड राइस, पिज्जा, बर्गर, इडली, डोसा, सांभर आदि फास्ट फूड/विदेशी डिसेज सजे-धजे रेस्तराओं में महंगे दामों पर आसानी से उपलब्ध है। आवश्यकता है कि जिले के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के जिम्मेदार इन रेस्तराओं/जलपान गृहों (वेज/नॉनवेज) पर अपनी पैनी नजर रखें। 



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