सप्लाई इंस्पेक्टर्स की वजह से चर्चा में जिले का पूर्ति महकमा, अकबरपुर के माशा-अल्लाह
| Rainbow News - Aug 13 2019 4:52PM

अम्बेडकरनगर। कहने को तो अब सारे कार्य ऑनलाइन होने की वजह से पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है फिर भी सरकारी अहलकारों के मनमाने एवं स्वयं स्वार्थ पूर्ति रवैय्ये के चलते आम आदमी को अब और भी परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। लूट-खसोट और भ्रष्टाचार की पंजिका में अब तक दर्ज हो चुके महकमों में खाद्य, रसद का पूर्ति महकमा अपना एक प्रमुख स्थान रखता है। हालाँकि लगभग सभी महकमों से इंस्पेक्टर राज का समापन हो चुका है परन्तु इस महकमें में अभी भी सप्लाई इंस्पेक्टर जैसे पद का जलवा बरकरार है। सप्लाई इंस्पेक्टर पदनाम वाले ओहदेदारों का क्या कहना.........? जब तक किसी कागज पर इनका हस्ताक्षर न हो तब तक सम्बन्धित कार्य हो ही नहीं सकता, और जब किसी को आसानी से काम कराना है तब इंस्पेक्टर साहेब को खुश रखना होगा। 

खाद्य रसद का पूर्ति महकमा अनादिकाल से महत्वपूर्ण रहा है। इसमें इंस्पेक्टर सबसे महत्वपूर्ण ओहदा होता है। इस कुर्सी पर आबाद व्यक्ति उपभोक्ता, कोटेदार व विभागीय उच्चाधिकारियों के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। सप्लाई इंस्पेक्टर पद पर आसीन व्यक्ति जिला, राज्य व देश का सर्वाधिक धनी व वैभवशाली होता है। एक नहीं हजारों उदाहरण हैं। हम यहाँ एक झलक के रूप में उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर स्थित पूर्ति महकमा का जिक्र कर रहे हैं, जिसमें वर्षों से जमे अंगद का पाँव बने सप्लाई इंस्पेक्टर्स सुख-सुविधा भोगी बने लूट-खसोट को अंजाम दे रहे हैं। स्वजातीय माननीयों की शोहबत से ये लोग विभागीय कार्रवाई से भी बचे हुए हैं। ऊपर से धनबल की वजह से पैसा फेंककर प्रभावशालियों का मुँह बन्द किए हुए हैं।

अम्बेडकरनगर जिले की सभी पाँच तहसीलों में तैनात सप्लाई इंस्पेक्टर्स इस समय चर्चा का विषय बने हुए हैं। इनके द्वारा आम गरीब व पात्र उपभोक्ताओं का जमकर शोषण किया जा रहा है। इनकी चर्चा इस लिए कुछ ज्यादा हो रही है क्योंकि जब से विभागीय कार्य ऑनलाइन और खाद्यान्न वितरण पी.ओ.एस. के द्वारा किया जाने लगा है तब से इनके रवैय्ये से उचित दर विक्रेता त्रस्त हो गया है। राशन व केरोसिन ऑयल वितरण के प्रति यदि कोटेदार से कुछ कहा जाए तो वह सीधा उत्तर देता है कि क्या करें........यदि पूर्ति निरीक्षक को खुश नहीं करेंगे तो कोटा निरस्त हो सकता है। 

अकबरपुर तहसील में वर्षो से सप्लाई इंस्पेक्टर पद पर तैनात एक मुलाजिम विभाग का सर्वाधिक कमाऊ पूत के नाम से जाना जाता है। उसके साथ प्लस प्वाइंट यह है कि उसके स्वजातीयों की यहाँ बहुलता है, और कई प्रभावशाली लोग जनप्रतिनिधित्व कर माननीय भी बन चुके हैं। यही कारण है कि अकबरपुर के पूर्ति निरीक्षक का एक अपना अलग ही दबदबा है। जिला कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में बैठे या न बैठें यह इनकी मर्जी पर निर्भर करता है। बताते हैं कि जो भी कार्ड धारक लाभार्थी इनसे मिलने इनके कार्यालय में पहुँचता है उसे इनके द्वारा मिसट्रीट किया जाता है, यह तब जब उक्त से कुछ मिलने की उम्मीद नहीं होती है। यदि काम करवाना है तो खबरदार! होशियार! मोबाइल पर कॉल मत करो, अड्डे पर मिलो।  

गरजमन्द लोग इनके आवास या पूर्व से ही निर्धारित स्थानों पर आकर शुद्ध व्यवसायिक रूप से वार्ता कर अपना काम करवाते हैं। एक तरह से अकबरपुर पूर्ति निरीक्षक अपना एक समानान्तर साम्राज्य स्थापित किए हैं। ए.आर.ओ., डी.एस.ओ. और ऊपर के अधिकारियों से बेखौफ इंस्पेक्टर अकबरपुर पूर्ति महकमें के सर्वाधिक चर्चित सरकारी मुलाजिम बने हुए हैं। इन पूर्ति निरीक्षकों की कार्यशैली की वजह से पूर्ति अधिकारी व अन्य जिम्मेदारों के दामन पर धब्बे लग रहे हैं। पूरा महकमा जनचर्चा के साथ सुर्खियों में आ गया है। जानकारों के अनुसार ये पूर्ति निरीक्षक अपने रवैय्ये से यह स्पष्ट कर रहे हैं कि- आपन भला, भला जग माहीं...........। दूसरी तरफ अधिकारियों के बावत इनकी सोच कुछ इस तरह है जैसे- हम तो डूबेंगे सनम, तुझको भी ले डूबेंगे। 

रेनबोन्यूज मीडिया ग्रुप के पास अकबरपुर समेत भीटी, जलालपुर, आलापुर, टाण्डा आदि सप्लाई इंस्पेक्टरों के बावत जानकारी मिलती रहती है और मिल रही है। जिले के पूर्ति कार्यालय में व्याप्त इंस्पेक्टर राज से त्रस्त आम लाभार्थी और कोटेदारों की परेशानियों के बावत हम जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर विभाग, प्रशासन एवं शासन के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। 



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