"माननीयों" के दिल की बात, जो मुंह पर आए
| -Nirmal Rani - Aug 14 2019 6:17PM

                        भारतीय राजनीति की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में अयोग्य, अपराधी, साम्प्रदायिक, जातिवादी, हिंसक, विभाजनकारी तथा अनपढ़ क़िस्म के निर्वाचित जनप्रतिनिधि जब और जहाँ चाहते हैं, अपनी इसी सोच व मानसिकता के अनुरूप अपना मुंह खोलते व सामाजिक वातावरण को विषाक्त करते रहते हैं। चुनाव के दौरान तो इनकी बदज़ुबानियाँ और बदकलामी पूरे चरम पर रहती ही है। परन्तु अफ़सोस की बात तो यह है कि चूँकि इनके दिमाग़ में ही ज़हर व गंदिगी भरी रहती है लिहाज़ा चुनाव के दिनों के अलावा भी यह गंदिगी इनके "मुखार बिन्द" से टपकती ही रहती है। ख़ास तौर पर देश की महिलाओं और बेटियों के लिए इनके जैसे विचार अक्सर सुनने को मिलते हैं उन्हें सुनकर इनके जनप्रतिनिधि चुने जाने पर आश्चर्य होता है। जहाँ तक दिखावा करने व योजनाएं बनाने का प्रश्न है तो उन्हें देखकर तो ऐसा  लगेगा गोया महिलाओं का इनसे बड़ा शुभचिंतक तो कोई हो ही नहीं सकता। ऐसे पाखंडी लोग आपको "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" योजना के अगुवाकार के रूप में दिखाई देंगे। कन्याओं के जन्म का अनुपात बढ़ने पर अपनी पीठ स्वयं थपथपाते दिखाई देंगे,कन्या पूजन करते नज़र आएँगे,देवियों की पूजा व जगराते करते दिखाई देंगे।महिलाओं के हितों के लिए इस क़द्र कथित संघर्ष करते दिखाई देंगे कि तीन तलाक़ जैसे विषय में धर्म विशेष के प्रबल विरोध के बावजूद,पूरी दख़ल अंदाज़ी करेंगे। परन्तु जब यह अपनी ज़ुबान खोलेंगे तो अपनी हक़ीक़त छुपाने से भी नहीं छुपा पाते। 

                               इन दिनों कश्मीर एक कठिन चुनौती के दौर से गुज़र रहा है। राज्य के घाटी के बड़े हिस्से में अनिश्चितता का वातावरण बना हुआ है। ग़ैर कश्मीरी,देशी व विदेशी पर्यटक जहाँ कश्मीर छोड़ कर अपने अपने घरों व राज्यों को जा रहे हैं वहीँ भारत में रहने वाले कश्मीरी युवक युवतियां व कामगार लोग कश्मीर में अपने अपने परिवार व घरों में वापस पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। घाटी के बड़े इलाक़े में हिंसा पर नियंत्रण रखने के दृष्टगत कर्फ़्यू लगा हुआ है और भारी संख्या में सैन्य बल तैनात किये गए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करने व राज्य का विभाजन करने के बाद भारत सरकार की कोशिश है कि कश्मीर घाटी के लोगों को विश्वास में लिया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी उद्देश्य से अपने विशेष संबोधन में कश्मीरी लोगों को विकास तथा रोज़गार के अवसर मुहैय्या करने का विश्वास दिलाया है।परन्तु इसी के सामानांतर सत्तारूढ़ दल के ही "अति उत्साही" से प्रतीत होने वाले कई ज़िम्मेदार नेता प्रधानमंत्री की कोशिशों पर पानी फेरने की कोशिश में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं बल्कि उनकी बेहूदा व अनर्गल बयानबाज़ी से घाटी के लोगों में भय व संदेह की स्थिति पैदा हो रही है। ज़रा सोचिए कि जहाँ कश्मीरी लोग लगातार कर्फ़्यू व भारी सैन्य बालों की तैनाती के माहौल में परेशानी के माहौल में जीने को मजबूर हैं। वहीँ कुछ बेहूदा क़िस्म के नेताओं की नज़र-ए-बद "कश्मीर की गोरी लड़कियों" पर जा टिकी है। जनसभाओं में यह नेता कहते फिर रहे हैं कि अब कश्मीर की गोरी व सूंदर लड़कियों से शादी करना आसान होगा। इनके बयानों से ऐसा ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कश्मीर से धारा 370 निष्प्रभावी क्या हुई है कि गोया इनको गोरी ख़ूबसूरत कश्मीरी लड़कियों पर अपना अधिकार जताने का लाइसेंस मिल गया हो। 

                                   उत्तर प्रदेश के एक भाजपा विधायक  विक्रम सैनी ने मुज़फ़्फ़रनगर में एक कार्यक्रम के दौरान कश्मीर में धारा 370 निष्प्रभावी होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘मोदीजी ने हम सभी के सपनों को साकार किया है। बीजेपी के जो भी कुंवारे नेता हैं, वे अब कश्मीर जाकर शादी कर सकते हैं, हमें इसमें कोई ऐतराज़ नहीं है। इतना ही नहीं बीजेपी के कार्यकर्ताओं को तो ख़ुश होना चाहिए कि अब वे अब गोरी कश्मीरी लड़कियों से शादी कर सकते हैं।’ ग़ौर तलब है कि यह वही "माननीय"हैं जिन्होंने जनवरी में एक कार्यक्रम में  यह कहा था कि जिन्हें भारत में डर लगता है, उन्हें बम से उड़ा देना चाहिए। इसी के साथ सैनी ने यह भी कहा था कि ऐसे लोगों को देश छोड़कर चले जाना चाहिए। क्या इनके विचार व इनकी सलाह किसी माननीय या जनप्रतिनिधि की वाणी प्रतीत होती है?क्या ऐसे बयान कश्मीर में लोगों में अविश्वास को और अधिकबढ़ाने का काम नहीं करेंगे ?इसी प्रकार हरियाणा के मुख्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान कार्यक्रम में बोलते हुए कह दिया कि  "हमारे मंत्री ओपी धनकर कहा करते थे कि उन्हें बिहार से बेटी लानी होगी. लेकिन आजकल लोग ये भी कहने लगे हैं कि कश्मीर का भी रास्ता साफ़ हो गया है और अब हम कश्मीर से भी लड़कियां लाएंगे." हालाँकि यह कहते समय खट्टर हंसे भी और यह भी कहा कि "मजाक़ की बातें अलग हैं लेकिन अगर समाज में रेशियो ठीक बैठेगा तो संतुलन ठीक होगा."खट्टर के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी सहित कई नेता व प्रमुख लोग ऐसे बयानों के विरुद्ध खुलकर सामने आ गए। राहुल गांधी ने लिखा , ''हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने कश्मीरी महिलाओं के बारे में जो बात कही है वह बहुत ही बुरा है. साथ ही यह दिखाता है कि आरएसएस की सालों तक चलने वाली ट्रेनिंग एक कमज़ोर और असुरक्षित शख़्स के दिमाग़ के साथ क्या कर सकती है. महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं जिनपर पुरुष अपना अधिकार समझें"। ऐसी ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानबाज़ियों ने कश्मीर ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के लोगों को भी आलोचना करने का मौक़ा दे दिया है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने कहा कि "अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने के बाद जितने भी ताक़तवर भारतीय लोग कश्मीरी लड़कियों से जबरन शादी करने की योजना बना रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए."

                                   दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कश्मीर की लड़कियों को लेकर दिए गए बयान की निंदा की है. स्वाति मालीवाल ने कहा कि खट्टर को अपने बयान पर शर्म आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वे सड़क छाप रोमियो की भाषा बोल रहे हैं. स्वाति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर के लोगों को विश्वास दिलाने में लगे हैं कि पूरा देश साथ है, लेकिन एक नालायक़ मुख्यमंत्री अभद्र बातें बोलकर हिंसा भड़का रहा है. इनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'किस तरीक़े की महिला विरोधी सोच है इनकी, इससे कशेमीरी लड़कियों की ही नहीं बल्कि आम महिलाओं की भी भावनाएं आहत होती हैं'। इस से पूर्व भी गत  वर्ष खट्टर ने महिलाओं को लेकर एक बेहद विवादित बयान देते हुए कहा था कि -'ज्यादातर महिलाएं अपने पुरुष दोस्त से बदला लेने के लिए यौन शोषण के मुक़दमे दर्ज कराती हैं। उनके अनुसार 80 से लेकर 90 प्रतिशत तक ऐसे मामले होते हैं, जिनमें महिला-पुरुष कई दिनों तक साथ रहते हैं। और जब दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है, तो महिलाएं लड़के पर केस कर देती हैं।निश्चित रूप से किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की हैसियत से खट्टर का ऐसा बयान आपत्तिजनक है। उन्होंने कश्मीर की लड़कियों से संबंधित जिस बात को मज़ाक़ कहकर कह डाला उसी बात को यदि वे निंदा के लहजे से या शर्मनाक बात कहकर पेश करते तो उनका मान और बढ़ सकता था। इसी प्रकार भाजपा के राज्यसभा सांसद विजय गोयल ने अपने आवास पर लगी एक तस्वीर पोस्ट की जिस पर मुस्कुराती हुई कश्मीरी लड़की के चित्र के साथ लिखा था - “धारा 370 का जाना तेरा मुस्कराना।”उनके निवास पर ऐसा पोस्टर लगना ही उनकी मानसिकता को दर्शाता है न कि उन्होंने स्वयं इस चित्र को ट्वीट भी कर दिया। 

                                   जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं की इस तरह की बेहूदा बयानबाज़ी से ही प्रोत्साहित होकर सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने कश्मीरी मुस्लिम महिलाओं को संबोधित अश्लील पोस्ट डालीं और गंदे व भद्दे चुटकुले बना कर पोस्ट किये जो बेहद निंदनीय है। इस प्रकार की हरकतें करने वाले न केवल घटिया मानसिकता के लोग हैं बल्कि ऐसी बातों से कश्मीरी लोगों में अविश्वास और भय भी पैदा कर रहे हैं जिसका लाभ देश के दुश्मनों को मिल रहा है। आश्चर्य है कि ऐसी तुच्छ मानसिकता के लोग न केवल राष्ट्रवादी बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवादी होने का परचम भी बुलंद किये रहते हैं। ?बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने तो बीजेपी एमएलए विक्रम सैनी को लेकर तो इन शब्दों में ट्वीट किया -उन्होंने लिखा- ''रेसिस्ट, सेक्सिस्ट, सेक्स के भूखे डाइनोसॉर अभी लुप्त नहीं हुए हैं बल्कि और फल-फूल रहे हैं। ऐसी सोच व बयानबाज़ियां युवाओं पर क्या असरडालेंगी ?कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां के बाशिंदे हमारे सम्मानित नागरिक हैं। जो लोग कश्मीरियों और कश्मीरियत के साथ साथ इंसानियत की क़द्र नहीं कर सकते उन्हीं लोगों के दिलों में पलने वाली नफ़रत इस तरह की बदकलामियों के रूप में मुंह से बहार निकलती है।



Browse By Tags



Other News