बलिदानों की धरती
| -Priyanka Maheshwari - Aug 14 2019 6:25PM

धरती है हमारी बलिदानों की

शौर्य रहा गूंज उनका

उरी.. पुलवामा जैसे आतंकी हमलों से

रक्षा करते जन जन की

खाते गोली अपने सीने पर

और छाती होती उनकी छप्पन इंच की

 

रोली अक्षत और राखी से सजी

राह देख रही बहन की थाली

दो आंखें और राह देखती

चाहे मां की गोद हो... या..

राह ताकती आंखें

 

हो अकड़ाती हुई ठंड

जहां शरीर भी पड़ जाये सुन्न

काट देने पड़ते कभी कभी शरीर के अंग

हो कैसी भी गरमी

चाहे झुलस जाये शरीर

हो कैसा भी मौसम

साथ निभाते हरदम

 

क्योंकि... हमने ले रखा है प्रण

करनी है देश की रक्षा

है मातृभूमि हमारी

न आने देंगे आंच कभी हम

कर देने पड़े चाहे

अपने प्राणों का बलिदान

 

नित नये कीर्तिमान स्थापित होते

करता देश अभिमान

चलो प्रगति की राह चलें

चलो मनाएं आजादी महोत्सव



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