गन्दगी से बजबजाता गाँव चहोड़ा शाहपुर, फैल रही है सड़ान्ध 
| Rainbow News Network - Aug 29 2019 3:18PM

सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना को गाँव में तैनात सफाई कर्मचारी ही धता बता रहे हैं। अच्छी खासी मासिक पगार पाने वाले ये कर्मचारी गाँवों में कम ही दिखाई पड़ते हैं। इन्होंने अपने जगह पर थोड़े से पैसे ही खर्च कर दूसरे श्रमिकों को नियुक्त कर रखा है, जो सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति ही कर रहे हैं। हम यहाँ नमूने के तौर पर एक गाँव के सफाई हालात पर नजर डाल रहे हैं। जिस तरह बटलोई का एक चावल बता देता है की पूरा भात पका है या नहीं ठीक उसी तरह जिला अम्बेडकरनगर के पत्रकार अमित मांझी द्वारा प्रस्तुत की गई आलापुर तहसील और रामनगर ब्लाक अन्तर्गत ग्राम सभा चहोड़ा शाहपुर की सफाई व्यवस्था यह बताने के लिए काफी कि जिले के अन्य गाँवों की सफाई व्यवस्था कैसी होगी.......। 

यहाँ प्रस्तुत है पत्रकार अमित मांझी की एक रिपोर्टः- 

अम्बेडकरनगर जिले की तहसील आलापुर व ब्लाक रामनगर अन्तर्गत ग्रामसभा चहोड़ा शाहपुर में बनी नालियों में साफ-सफाई के अभाव में रूका गन्दा पानी बीमारियों को दावत दे रहा है। यहाँ तैनात सफाई कर्मियों का अता-पता ही नहीं रहता, जबकि इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा बराबर की जाती है। बीते तीन माह से ऊपर की अवधि हो गई अभी तक इस गाँव में सफाई कर्मियों का दर्शन नहीं हुआ। परिणाम यह है कि पूरा गाँव सफाई के अभाव में बजबजा रहा है और सड़ान्ध से आवृत्त हो गया है। यहाँ बताना जरूरी है कि यह गाँव आबादी के हिसाब से काफी घना है। कोई भी बाहरी व्यक्ति इसमें प्रवेश के समय ही इसकी हालत को अच्छी तरह देख सकता है।

चहोड़ा शाहपुर ग्राम सभा का मांझी टोला और पण्डा टोला काफी घनी आबादी वाला क्षेत्र है। जहाँ पानी की निकासी के लिए निर्मित नाली भठ गई है। सफाई न होने से घरों से निकलने वाला गन्दा पानी नालियों में जमा रहता है और वातावरण को दुर्गन्धयुक्त बना रहा है। नाली पर रखी पटिया की वजह से ओवरफ्लो होकर गन्दा पानी इधर-उधर फैला रहता है। गाँव वालों का कहना है कि कुछ दिन पहले कोई एक व्यक्ति आया था जो अपने को सफाई कर्मी कह रहा था जब उससे गन्दगी और चोक नालियों के बावत शिकायत की गई तब उसने कहा कि सफाई करा देंगे। अर्सा तीन महीने बीत गए अभी तक गाँव की सफाई दशा जस की तस है। हालत बद से बदतर होती जा रही है।

साफ-सफाई व्यवस्था के लिए तैनात सफाई कर्मी इस गाँव में नजर ही नहीं आते। आश्चर्य यह है कि चहोड़ा शाहपुर के निवासियों को यह भी नहीं पता है कि उनके गाँव में कौन और कितने सफाई कर्मियों की नियुक्ति है। हाँ कभी-कभार दिहाड़ी मजदूरी लगाकर साफ-सफाई की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। यह कौन करता इसकी जानकारी गाँव वालों को नहीं है। बहरहाल गाँव के लोग बस इतना चाहते हैं कि उनके गाँव में सफाई कर्मियों की नियुक्ति हो और यदि ऐसा है तो वह लोग नियमित रूप से गाँव आकर साफ-सफाई करें, जिससे गन्दगी और बीमारी फैलने से बचा जा सका। 



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