दिनों दिन बढ़ती हुई समस्या..... जनसंख्या
| -Priyanka Maheshwari - Sep 12 2019 12:43PM

बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या कोई आज से नहीं है और इस मसले पर आवाज भी बुलंद हो रही है एक अरसे से लेकिन क्या वजह है कि जनसंख्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है? "हम दो हमारे दो", "छोटा परिवार सुखी परिवार" का नारा कोई आज का नारा है ऐसा भी नहीं है और एक अरसे से यह नारा सुनते भी आ रहे हैं फिर भी जिस तरह से आबादी का स्वरूप बढ़ता जा रहा है वो बहुत चिंतनीय है। सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की होती है सीमित संसाधन संसाधनों में इतने रोजगार लाए कहां से? बढ़ती आबादी के कारण जंगलों को काट कर रहने योग्य घर बनाए जा रहे हैं।

हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके अपने लिए विनाश को न्योता दे रहे हैं। तीसरी बात बढ़ती हुई महंगाई अब व्यक्ति अपने बढ़ते हुए परिवार की जरूरतें पूरी करने में खुद को असमर्थ पा रहा है। लालन पालन से लेकर शिक्षा, शादी ब्याह सभी में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में खाने-पीने और रोजगार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इस समस्या ने अपना असर दिखाना शुरू भी कर दिया है। देश में गरीबी और बेरोजगारी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

जिस तरह एक देश एक कानून की बात की जाती है उसी तर्ज पर बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए "वन कपल लन चाइल्ड" जैसे पालिसी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही पिछड़े और अशिक्षित लोगों में जागरूकता भी पैदा करनी चाहिए। उन्हें छोटे परिवार का महत्व समझाना चाहिए। आज आंकड़ों के हिसाब से हमारी आबादी 135 करोड़ ना होकर 150 करोड़ से ऊपर है। आने वाले समय में हम जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकते हैं। आबादी नियंत्रण के मामले में केरल सरकार द्वारा बनाया गया कानून "कानून वूमेन कोड बिल - 2011" का अनुकरण कर सकते हैं। इस कानून के अनुसार देश की किसी भी नागरिक, धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर परिवार नियोजन से बचने की सुविधा नहीं है। नियम कानून तो बने ही हुए हैं बावजूद इसके जनसंख्या नियंत्रण की समस्या एक दूसरा पहलू भी है धर्म और समाज के ठेकेदार जो अपने स्वार्थ के चलते योजना को फलीभूत नहीं होने देते।

लोग भी धार्मिक अंधविश्वास और कुरीतियों से बाहर नहीं आना चाहते हैं। इस मामले में  एक जानकारी का जिक्र करना चाहूंगी। असम के डॉक्टर इलियास अली परिवार नियोजन की योजना पर जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। डॉक्टर अली गांव - गांव जाकर मुसलमानों को समझा रहे है कि इस्लाम एक अनूठा धर्म है और जिसमें आबादी पर नियंत्रण पाने के तौर तरीके की जानकारी दी गई है। जिसे "अजाल" कहा जाता है और इसे कई मुस्लिम देश अपना भी रहे हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के डा. इलियास चिकित्सा महाविद्यालय गुवाहाटी में प्राध्यापक है। उनके विचारों से प्रभावित होकर सरकार ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में परिवार नियोजन के मसले पर जागरूकता लाने का काम सौंपा है लेकिन इस काम के लिए और भी लोगों को पहल करनी चाहिए।

आजकल कोई भी मुद्दा हो उस पर सियासत न हो ये मुमकिन नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण के मसले पर भी सियासत गरमा जाती है। मसलन हिंदुओं की आबादी घट रही है और मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। धर्म परिवर्तन जैसी बातें देखने सुनने में आ ही जाती है। दरअसल संकीर्णताओं के दायरे से ऊपर उठकर व्यापक दिशा में सोचने की जरूरत है। धर्म - जाति से हटकर जरूरत है कि सभी के लिए एक ही कानून  बनाया जाये। इसका फायदा त्वरित नहीं दिखाई देगा लेकिन आने वाली पीढ़ियां इसका लाभ उठाएंगी। देश को आगे बढ़ाने के लिए और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है।



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