भियांव शरीफ की ऐतिहासिक दरगाह पर एक नज़र
| Rainbow News Network - Sep 18 2019 3:17PM

अम्बेडकरनगर। महान सूफी संत हज़रत सैय्यद मीर मसऊद हमदानी आज से लगभग 700 वर्ष पूर्व 13 वीं शताब्दी मे ईरान से चल कर विभिन्न देशों का दौरा करते हुए मुल्तान से बंगाल आये और काफी दिनों तक मीर मसऊद हमदानी वहाँ पर रह कर लोगों को मानवता ईमानदारी ईश्वर से सच्चा प्रेम करना बताने के साथ साथ सत्य के मार्ग पर चल कर अपने जीवन को पूर्ण रूप से अमन शांति के नाम कर दिया। बंगाल में कुछ ही दिनों में मीर मसऊद हमदानी के काफी लोग चाहने वाले हो गये और उन्होंने लोगो की कठिनाई और जादू सहर से छुटकारा दिलाया। फिर बंगाल से चल कर प्रयाग के रास्ते होते हुए पुराना कस्बा भियांव पहुंचे। और यहाँ पर काफी समय तक मानव सेवा करते रहे और ईश्वर के प्रेम मे विलीन रहे और सर्वसमाज व सर्वधर्म के लोगों की सेवा किया।

उनके इस कार्य से प्रभावित होकर बहुत लोग उनके शिष्य हो गये। और कुछ ही समय बाद 13 वीं शताब्दी में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। मीर मसऊद हमदानी की मज़ार भियांव शरीफ में ही बनी फिर काफी समय बाद जब इब्राहिम लोधी को इनके महानता के बारे मे पता चला तो उसने 1520 ई० के लगभग मे पुरे दरगाह के भवन का निर्माण कराया और भारत की सभी प्राचीन दरगाहों से बड़ा गुम्बद भियांव दरगाह का बना। यहाँ पूरा निर्माण उस समय बेल, चूना, शहद और पत्थर पीस कर हुआ। जो आज भी जग ज़ाहिर है।

दरगाह भियांव शरीफ इंतजामिया कमेटी के सदस्य शेख यासिर हयात ने बताया कि हज़रत सैय्यद मीर मसऊद हमदानी रह०के यहाँ देश के कोने कोने से चल कर लोग यहाँ आते हैं और अपनी मुरादें पूरी करने हेतु मन्नत मांगते हैं। यहाँ पर हर वर्ष एक अगहन का मेला लगता है जिसमें अधिकांश हमारे हिन्दू भाई उपस्थित होकर अपनी मन्नत मुराद माँगते हैं और दूसरा मेला मोहर्रम की 23,24,25 तारीख को लगता है जो कि अबकी बार 23,24,25 को विशाल उर्स का आयोजन होगा जिसकी सभी तैयारियां पूरी करली गयी हैं। शेख यासिर हयात के अनुसार उर्स मे बिहार बंगाल मध्यप्रदेश के अलावा भी देश के विभिन्न स्थानों से जायरीन (श्रद्धांलु) आते हैं। यहाँ पर दरगाह समिति के लोग पूरी व्यवस्था की देख रेख करते हैं जिसमे गाँव के लोगों का मुख्य योगदान होता है। 

सैय्यद मंजूम आकिब, नियाज़ तौहीद, शेख यासिर हयात, मीर अबु शहमा, मुस्तकी़म अहमद, मो० अदील, मो०सोहेल आदि लोगो पूरी जिम्मेदारी से उर्स का आयोजन कराते है जोकि सकुशल निपटता है जिसमे प्रशासन की भी तरफ से सहयोग मिलता है जैसे पुलिस फोर्स, पानी का टैंकर, मेडिकल कैम्प आदि जोकि 50000 के लगभग भीड़ के लिए प्रयाप्त नहीं होता है। तीन दिन फ्री शुद्ध शाकाहारी खाने (लंगर) की भी व्यवस्था की जाती है।



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