गृह ज्योति अभियानम्, प्रवासियों की अभिनव पहल 
| Rainbow News Network - Sep 19 2019 12:19PM

चार धाम विकास, पलायन एवं रोजगार की मुहिम 

राज्य के विकास में प्रवासी उत्तराखंडी अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं। लर्न, अर्न व रिर्टन की परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए प्रवासियों ने गृह ज्योति अभियानम् नाम से एक योजना का रोड मैप तैयार किया है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो प्रवासी न केवल राज्य के विकास में हाथ बटाएंगे, बिल्क सदूर गांवों के शिक्षित युवक युवतियों को रोजगार भी मुहैया कराऐंगे। गृह ज्योति अभियानम् में देश के अलग अलग राज्यों के प्रवासियों को जोडने की योजना है। 

गौरतलब है कि उत्तराखंड मे पलायन व रोजगार एक बडी समस्या के रूप में उभरी है। उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद पिछले दो दशक में सरकारें जन आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है। आलम यह है कि राज्य सरकार को पलायन के अध्ययन के लिए एक आयोग ही बनाना पडा है। कुछ ऐसी ही स्थिति रोजगार की भी है। शिक्षित युवाओं की तादात में लगातार इजाफा हो रहा है। रोजगार के साधन सिकुड रहे हैं और बेरोजगारी बढ रही है। ऐसे हालात में युवा रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों व बडे शहरों में जाने को मजबूर है। 

राज्य के सदूर अंचलों में विकास थम गया है। यहां के ग्रामीणों को उत्तर प्रदेश से अलग होने का अभी तक अहसास नहीं हो पाया है। सरकार की योजनाएं पूरी होने से पहले ही दम तोड रही हैं। सरकारी प्रयासों से इतर प्रवासी अपने गांव व इसके आसपास के इलाकों में विकास करना चाहते हैं। गृह ज्योति अभियानम् योजना का मुख्य उददेश्य राज्य के विकास में प्रवासियों की भूमिका तय करना है। इसके साथ ही राज्य के विकास, पलायन व रोजगार जैसे अहम बिन्दुओं पर काम करना है। 

देहरादून में होगा दो दिनी कानक्लेव 

गृह ज्योति अभियानम् को धरातल पर उतारने के लिए प्रवासी उत्तराखंडी नवम्बर माह में दो दिन का कानक्लेव देहरादून में आयोजित करेंगे। इसमें दिल्ली, मुबंई, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व चंडीगढ के प्रवासी उत्तराखंडी शिरकत करेंगे। कानक्लेव में राज्य के विकास पर परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा चार धाम पर भी चर्चा होगी। 

कार्यक्रम के संयोजक हरियाणा मॉडल स्कूल, पंचकूला के चैयरमेन सुभाष शर्मा देशववाल ने बताया कि गृह ज्योति अभियानम्, एक दीर्धावधि योजना है। इसके तहत हम राज्य के विकास में प्रवासी उत्तराखंडियों की भूमिका तय करेंगे। पहले चरण में राज्य के बाहर विभिन्न प्रांतों में रह रहे प्रवासियों को जोडेंगे। हर काम के लिए सरकार पर निर्भर रहने के वजाय खुद पहल करेंगे। शर्मा ने बताया कि  योजना के प्रथम चरण में राज्य के सदूर गांवों के सौ शिक्षित युवक व युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराएगें। आइए जानते हैं, कौन कौन प्रवासी गृह ज्योति अभियानम् में अपना योगदान दे रहा है। 

सुभाष शर्मा देशववाल, चैयरमेन हरियाणा मॉडल स्कूल

सुभाष शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल घिंडवाडा में हुई। आगे की शिक्षा रघुनाथ इंटर कालेज देवप्रयाग से उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद हरियाणा सरकार में बतौर शिक्षक 20 वर्ष तक सेवाएं दी। 

देशववाल के जीवन में नया मोढ तब आया, जब उन्होंने हरियाणा मॉडल स्कूल की स्थापना पंचकूला में की। काम आसान नहीं था, सीमित संसाधन और हर कदम पर चुनौतियां, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और देखते ही देखते तीन अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोल दिए। इन स्कूलों का सुमार राज्य के प्रमुख शिक्षा केन्द्रांे में होता है। यहां लौकिक शिक्षा के साथ-साथ अलौकिक संस्कारों से विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाया जाता है। शिक्षा विद्व सुभाष शर्मा अपनी आय का आधा हिस्सा धमार्थ कार्यों  में खर्च करते हैं। उन्होंने पौडी गढवाल के श्री डांडा नागराजा धर्म क्षेत्र में घिंडवाडा एवं पाली में अंग्रेजी माध्यम के दो प्राइमरी स्कूलों की स्थापना की। 

घिंडवाडा से दोंदल तक लगभग 7 कि.मी. की सड़क का निर्माण अपने निजी खर्च से एवं कुछ वहां के ग्रामीणों के श्रमदान से करवाया, जो जन-शक्ति मार्ग के नाम पहचाना जाता है। अब उत्तराखंड सरकार ने भी उस सड़क का चौडीकरण करवा दिया है। इसी तरह डांडानागराजा, पिपलाकोटी गांव का संपर्क मार्ग भी उन्होंने  निजी खर्च से बनवाई। शर्मा के अथक प्रयासों से चंडीगढ़ के कैंबवाला गांव में एक शुद्ध देशी गायों की गौशाला संचालित हो रही है, जिसमें इस समय लगभग 400 शुद्ध देशी गौवंश है।

बीएन शर्मा, पूर्व केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त, भारत सरकार

बीएन शर्मा का जन्म पौडी गढवाल के केनाथ तल्ला गांव में हुआ। शुरूआती शिक्षा गांव में ही हुई। इससे आगे की शिक्षा के लिए दिल्ली चले गए। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि स्वर्ण पदक के साथ हासिल की। मुंबई विवि से विधि में स्नातक की उपाधि के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गए। 36 साल तक भारत सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए अपर केन्द्रीय भविष्य निधि के मुख्य आयुक्त पद से सेवानिवृत हुए।

सेवाकाल के दौरान शर्मा ने 1100 लोगों का निशुल्क आईएसओ आपरेशन करवाया। इसके अलावा उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में 50 से अधिक स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए। धार्मिक कार्यो में रूचि रही। अपने गांव में विशाल नागराजा मंदिर की स्थापना की। उत्तराखंड के शिक्षित युवाओं को कई मल्टीनेशनल कंपनियों में रोजगार दिलाने में मदद की। अब अपने पैतृक राज्य में गृह ज्योति अभियानम् के माध्यम से राज्य के विकास में योगदान देने की तमन्ना है। बीएन शर्मा देशभर के प्रवासी उत्तराखंडियों को इस योजना से जोडने के मुख्य सूत्रधार हैं।

अरविंद बलूनी 

छोटी उम्र में घर छोडकर जाने के निर्णय ने जिदंगी बदल दी। महज 1200 सौ से कारोबार शुरू करने वाले ऋषिकेश निवासी अरविंद बलूनी आज चार सौ करोड के कारोबरी बन गए हैं। केवल खुद की आमदानी नहीं बढाई बल्कि उत्तराखंड के हजारों शिक्षित, प्रशिक्षित व कम पढे युवाओं को रोजगार दिलाया। अब वे उत्तराखंड राज्य के विकास में सहयोग करने के साथ ही बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रावासियों की मुहिम का हिस्सा बन गए हैं।

रोजगार की तलास में अरविंद चंडीगढ आए। यहां उन्होंने कुछ दिन एक दवाई कंपनी में हैल्पर का काम किया। मगर उनका मन यहा ंनही लगा। इसी बीच चंडीगढ में जाव कंसटेंसी कंपनियां अपना दायरा बढा रही थी। यहीं से उन्होंने अपनी कंसटेंसी कंपनी खोलने की योजना बनाई। उनके सामने सबसे बडी समस्या धन की कमी थी। केवल 1200 रूपये में कारोबार की शुरूआत की। इस दौरान कई उतार चढाव आए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। धीरू भाई अंवानी को अपना आर्दश मानने वाले अरविंद की टीडीएस गु्रप आफ कंपनी के चैयरमेन हैं। इसमें सैकडों लोग रोजगार कर रहे हैं। इसमें अधिकांश उत्तराखंड के हैं। 

राकेश बलूनी   

पंजाब के प्रमुख उद्योगपति राकेश बलूनी का जन्म कीर्तिनगर ब्लाक के थापला गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गंाव में ही हुई। इसके बाद एमबीए की उपाधि हासिल करने के बाद वे चंडीगढ चले गए। यहां कुछ समय तक कई मल्टीनेशलन कंपनियों में काम किया। वर्ष 2003 में खुद का व्यवसाय शुरू किया। सीमित संसाधनों से काम की शुरूआत की। आज राकेश का सुमार पंजाब राज्य के प्रमुख कारोबारियों में किया जाता है। चडीगढ में के.एल.जी. नाम से थ्री स्टार होटल का संचालन करने के साथ ही कई अन्य कंपनियां भी हैं। इनके संस्थानों में सैकडों पहाडी युवा कार्यरत है। उत्तराखंड के विकास में राकेश सहयोग करना चाहते हैं। गृह ज्योति अभियानम् का हिस्सा बन शिक्षित युवक व युवतियों को रोजगार देना उनकी प्राथमिकमा है। 

आन्नद नौगाईं

गृह ज्योति अभियानम् के एक अहम किरदार आन्नद नौगाई हैं। 1996 में नौगाई दंपति ने सरकारी सेवा छोडकर समाज के लिए कुछ करने की योजना बनाई। शुरूआती दौर में उनका यह निर्णय किसी के गले नहीं उतरा। अचानक नौकरी छोडने के बाद कुछ समय आर्थिक संकट रहा, लेकिन धुन के पक्के आन्नद ने जल्दी ही नौगाईं बिजनेस लाईन नाम से व्यवसाय शुरू किया। शुरूआती दौर काफी उतार चढाव से भरा रहा। कुछ समय बाद स्थितियंा अनुकूल होने लगी। इसके बाद आन्नद ने शुभ लग्न नाम से वैवाहिक विवणिका का प्रकाशन शुरू किया।

इसके साथ ही उत्तराखंड मानव सेवा समिति की चंडीगढ शाखा का गठन कर सामाजिक गतिविधियां बढाई। अब तक वे 2500 से अधिक लोगों को वैवाहिक बंधन मे ंबांध चुके हैं। जड से जुडने के लिए सबसे पहले आन्नद ने खंण्डर हो चुके अपने पुस्तैनी घर का पुर्ननिर्माण किया। इसके बाद अन्य प्रवासी भी प्रेरित हुए। उनकी पहल से गांव में रौनक लौट आई है। उनके प्रयासों से गुजुलगढी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए वित्तीय स्वीकृति मिली।  

शांति पंत बहुगुणा 

बचपन से ही हटकर काम करने वाली शांति पंत बहुगुणा, गढवाल संभा पंचकुला की पहली प्रधान बनीं। अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए।1996 में एक गढवाली युवक की कैंथल में निर्मम हत्या के बाद उसको न्याय दिलाने के लिए पुलिस व प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला और युवक के परिजनों को न्याय दिलाया। यहीं से शांति ने सामाजिक कार्यों को गति दी। आपके कार्यो को देखते हुए जिला कष्ट निवारण समिति का सदस्य बनाया गया। उत्तराखंड की प्रवासी महिलाओं का उत्तराख्ंाड महिला शक्ति संगठन स्थापित किया है। इसमें तीन सौ से अधिक महिलाएं है। शांति बहुगुणा राज्य के विकास में सहयोग के लिए तैयार हैं। 

जशोदा आन्नद कोश्यारी

जशोदा कोश्यारी पिथौरागढ के मेहरगढी गांव की निवासी हैं। आपकी शिक्षा चंडीगढ में हुई। विवाह के बाद जर्मन चली गई। देश वापस आने के बाद पिछले कुछ समय से चंडीगढ व आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक कार्य कर रही हैं। जशोदा ने राष्टीªय सेविका मिशन में काम करते हुए चंडीगढ की मलिन बस्तियों के बच्चों को पढाया तथा महिलाओं को जागरूक किया। वर्तमान में विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों से जुड कर अपना योगदान दे रही हैं। अपने पारिवारिक दायित्वों से मुक्त होने के बाद जशोदा पिथौरागढ के दूरस्थ इलाकों में छात्रावास बनाना चाहती हैं। इसके अलावा वो लघु औद्योगिक ईकाइ स्थापित कर युवाओं को रोजगार देने की योजना पर काम कर रही हैं।  
 



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