नादिर शाह ने कहा था- जब तक ये तलवार न उठे, कत्ल-ए-आम न रूके...
| Rainbow News Network - Sep 25 2019 2:20PM

नादिर शाह अफ़्शार (या नादिर क़ुली बेग़) (१६८८ - १७४७) फ़ारस का शाह था (१७३६-१७४७) और उसने सदियों के बाद क्षेत्र में ईरानी प्रभुता स्थापित की थी। उसने अपना जीवन दासता से आरंभ किया था और फ़ारस का शाह ही नहीं बना बल्कि उसने उस समय ईरानी साम्राज्य के सबल शत्रु उस्मानी साम्राज्य और रूसी साम्राज्य को ईरानी क्षेत्रों से बाहर निकाला।

उसने अफ़्शरी वंश की स्थापना की थी और उसका उदय उस समय हुआ जब ईरान में पश्चिम से उस्मानी साम्राज्य (ऑटोमन) का आक्रमण हो रहा था और पूरब से अफ़गानों ने सफ़ावी राजधानी इस्फ़हान पर अधिकार कर लिया था। उत्तर से रूस भी फ़ारस में साम्राज्य विस्तार की योजना बना रहा था। इस परिस्थिति में भी उसने अपनी सेना संगठित की और अपने सैन्य अभियानों की वज़ह से उसे फ़ारस का नेपोलियन या एशिया का अन्तिम महान सेनानायक जैसी उपाधियों से सम्मानित किया जाता है।

वो भारत विजय के अभियान पर भी निकला था। दिल्ली की सत्ता पर आसीन मुग़ल बादशाह मुहम्मद शाह आलम को हराने के बाद उसने वहाँ से अपार सम्पत्ति अर्जित की जिसमें कोहिनूर हीरा भी शामिल था। इसके बाद वो अपार शक्तिशाली बन गया और उसका स्वास्थ्य भी बिगड़ता गया। अपने जीवन के उत्तरार्ध में वो बहुत अत्याचारी बन गया था। सन् १७४७ में उसकी हत्या के बाद उसका साम्राज्य जल्द ही तितर-बितर हो गया।

जब नादिर शाह ने दिल्ली पर कब्ज़ा किया था तो जामा मस्जिद के ऊपर चढ़कर एक तलवार छत पर गाड़ दी थी और अपने जिहादियों को हुक्म दिया कि जब तक ये तलवार ना उठे, क़त्ल-ए-आम ना रुके और रुका भी नहीं। अहमद शाह अब्दाली जब लाहौर से निकला तो ये हुक्म दिया की वापिस आऊं तो शहर के चारो तरफ छकड़ों में नरमुंड का सैलाब हो और ये हुआ भी। बाबर ने, गोरी ने, गजनी ने भी यही किया हमारे पुरखो का कत्लेआम कर 30 हजार मंदिर तोड़ डाले।

आज हमारे देश मे बाबर को अपना बाप बताने वालों की भीड़ लगी है। इनको सिर्फ लुटेरा बताकर इतिहास ख़त्म कर देने वाले वामी औरंगजेब को माननीय बताने लगते है तो हैरानी क्या?  ये तो इनके नायक है दिल्ली में एक लाख लोगो को काटने वाला तैमूर हो या राजपूतो के खून का प्यासा अकबर या अल्लाद्दीन खिलजी ये सब आज इनके महा नायक है तारिक-बिन-जियाद से लेकर ओसामा जीन्ना तक सब आज माननीय है किसको फर्क पड़ता है के गुरु गोविंद सिंह के लालों के साथ क्या किया गया, गुरु तेग बहादुर जी के साथ क्या हुआ या संभाजी के साथ क्या हुआ? आप तो अपने बच्चों को सिखाते रहिए कि अकबर महान था।

मगर कभी खुद यह मत सोचना फिर उस राणा प्रताप को क्या कहे जो जीवन भर जंगलो में भटकते हुए घास की रोटी खा कर भी अकबर से लड़ते रहे। सहिष्णुता सिखाता है ना तुम्हारा हिन्दुत्व  तो अपने कातिलो को अपना पीर स्वीकार करते रहिए उनकी कब्रो पर सर पटकते रहिए और तब तक उन्हें अपना भगवान मानते रहिए जब तक खुद समाप्त ना हो जाओ! आज तुम्हारे पास मान्धाता का वो भूभाग नही रहा जहां कभी सूर्य अस्त नही होता था। गांधारी का गांधार नहीं रहा, लव कुश का लाहौर नहीं रहा। सिंध, ननकाना साहिब, हिंगलाज आज नही है ढाकेश्वरी भी नहीं हैं लेकिन आप को क्या फर्क पड़ता है? यदि तालिबान ने बुद्ध की मूर्तियों को तोप से उड़ा दिया, पाक तो पाक जब काश्मीर में हजारों मन्दिर तोड़ दिए तो क्या हुआ? आपको क्या?

हां, कभी सोच सकते हो तो सोचना कि आज कश्मीर, बंगाल, केरल ओर नार्थ ईस्ट के क्या हाल है ? कल यू.पी. और कर्नाटक की बारी आयेगी.. किसे फुर्सत है.. आप तो बस 2 के चार के जुगाड़ में दिन रात लगे रहिए, पैसा ही सर्वस्व है आपको.. भारत माँ नहीं .. और मोदीजी को कोसते रहिए। बाकी जाने दो, कौन सोचे, इतना समय कहां है आप के व्यस्थ जीवन मे, इसके लिए मोदी है न। आप तो बस अपना टी.वी ऑन करिये और गरमागरम डिबेट देखिए ..

अयोध्या में जन्म भूमि पर क्या बनना चाहिए अस्पताल या बाबरी स्मारक फिर दूसरा चेनल लगाइए उस पर भी डिबेट चल रही है यह देश राम का नही बाबर का था। अंग्रेजो ने हमे सभ्यता सिखलाई. उनके कुतर्को से प्रभावित हो कर आप भी सीरियस हो कर अपनी मुंडी ऊपर नीचे हिलाइए, या तीसरे चेनल पर भगवा आतंक वाद ही देख लीजिए, नहीं तो अगले चैनल पर अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्सा अल्ल्ला इंसा अल्ला ही सुन लीजिए। या फिर टीपू सुल्तान सीरियल ही देख लीजिए, नहीं तो जोधाबाई सीरियल। या फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की लटकती तस्वीर ही देख लीजिए ....

अरे हाँ अपने मूवी चेनल पर तैमूर की अम्मी की नई फिल्म भी तो आ रही है! मस्त होकर देखिए खूब मजा लेते रहिए, चादर तान कर सोते रहिए आप की नींद में खलल न पड़े इसके लिए हमारे सैनिक, अर्द्ध सैनिक बल के जवान हैं न अपना बलिदान देने के लिए .... आप तो चैन से सोते रहिए और अपने ख़ुद के सुनहरे भविष्य के सपने देखते रहिए। थोड़ी शर्म करो......अपनी आनेवाली पीढ़ी को क्या जवाब दोगे। इसलिए आप सभी लोग मिलकर आपसी सौहार्द बनाते हुए भ्रष्टाचार व आतंकवाद को खत्म करने वास्ते सहयोग कीजिये।



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