एक ऐसा गांव, जहां सैकड़ों लड़के हैं कुंवारे, नहीं मिल रही दुल्हन
| Agency - Sep 26 2019 4:09PM

जब लड़कियों की शादी नहीं होती तो उनके घर वालों के साथ-साथ उनके रिश्तेदारों को भी ताना मारा जाता है। लोग तरह-तरह की बातें करने लगते हैं। लेकिन आज हम एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां बड़ी तादाद में लड़के कुंवारे हैं और कोई इस गांव के लड़के के साथ अपनी बेटी का रिश्ता करना नहीं चाहता है। ऐसा नहीं है कि इस गांव के लोग गरीब हैं या फिर यहां के लड़कों में कोई ऐब है। यहां संपन्न परिवार के लड़कों के साथ-साथ सरकारी नौकरी करने वाले लड़के भी कुंवारे हैं। 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से महज 60 से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वाड़ीगांव,सारावली और वैती पाड़ा जैसे कई गांव है जो चारों तरफ से नदियों के घिरे है। इन गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़कों पर पुल नहीं बना है। लोगों को गांव आने जाने के लिए हर बार अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ता है। लिहाजा आसपास के गांव के लोग अपनी बच्चियों का रिश्ता इन गांव के लड़कों के साथ नहीं करना चाहते। यहां बड़ी तादाद में 25 से 40 साल तक के लड़के कुंवारे हैं। उनके माता-पिता परेशान हैं। लेकिन उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। ग्रामीणों में सरकार और सिस्टम के खिलाफ आक्रोश है। इन लोगों का मानना है कि अगर गांव तक आने-जाने के लिए सड़कें होती और ब्रिज होता तो इनके भी हाथ अब तक पीले हो चुके होते।

हर महीने 30 हजार रुपये से ज्यादा कमाने वाले कल्पेश पाटिल कुंवारे हैं तो रेलवे में काम करने वाले 30 साल के नितेश पाटिल की भी शादी नहीं हो रही है। आसपास के गांव के लोगों का कहना है कि इन गांव में आने-जाने के लिए सड़कें नहीं है, खतरनाक ब्रिज से होकर गांव तक आना पड़ता है। ऐसे में हर वक्त किसी न किसी हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में कोई पिता अपनी बच्ची की इन गांवों में शादी नहीं करना चाहते हैं। पास के रेलवे स्टेशन जाने के लिए यहां के लोगों को चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है ऊपर से उन्हें रेलवे के जर्जर हो चुके खतरनाक ब्रिज को क्रास करना होता है।

कोई भी अपनी बेटी को इन गांवों में नहीं देना चाहता। विरोध दर्ज करने के लिए यहां के कुंवारे लड़कों ने अनोखा रास्ता अपनाया है। यहां लोग कुंवारा ब्वाय नाम के टीशर्ट बनवाकर पहन रहे हैं। इस गांव में 150 से ज्यादा लड़के कुंवारे हैं।  गांव के 60 साल के बुजुर्ग अशोक पाटिल का कहना है की देश को आजाद हुए इतने दिन हो गए लेकिन यहां अबतक सड़के नहीं बनी। वहीं गांव के सरपंच प्रफुल भोईर का कहना है कि यहां से लड़कियां जरूर दूसरों के घर में ब्याही जाती है लेकिन कोई अपनी बेटी नहीं देता। सरकार को कई बार खत लिखा। अपनी बतायी लेकिन कोई उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।



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