नशा उन्मूलन, बच्चों के अधिकार और घरेलू हिंसा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
| - RN. Network - Sep 27 2019 5:42PM

       अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार दिनांक 27.09.2019 को जिला कारागार, अयोध्या में नशा उन्मूलन विषय पर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में बच्चों के अधिकार विषय पर, तथा महिला शरणालय, अयोध्या में घरेलू हिंसा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

         इन शिविरों में श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, अपर जिला जज, त्वरित, द्वितीय, अम्बेडकरनगर, अशोक कुमार, प्रभारी सचिव/सिविल जज(सी0डि0) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, सुश्री प्रीती भूषण, सिविल जज जू0डि0, टाण्डा, अम्बेडकरनगर, बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार अयोध्या, विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर, जिला कारागार, अयोध्या, हरीश्याम गुप्ता, केयरटेकर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या, श्रीमती भारती शुक्ला, प्रभारी अधीक्षिका, महिला शरणालय, अयोध्या, प्रदीप एवं ओमप्रकाश सहित कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे।

        शिविर को सम्बोधित करते हुये अशोक कुमार, प्रभारी सचिव/सिविल जज (सी0डि0) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने बताया कि जिन लोगों का हृदय कमजोर होता है या जिनका निश्चय सुदृढ़ नहीं होता है जो संघर्ष के आगे घुटने टेक देते हैं और अपनी कमजोरी को छुपाने के लिये नशे का सहारा लेते हैं। नशा करने वाला व्यक्ति यह बहाना करता है कि नशा करने से कोई चिन्ता या दुख नहीं रहता। शुरू में तो व्यक्ति शौक के तौर पर नशा करता है लेकिन फिर वह नशे का आदी होने लगता है और अपनी बरबादी की ओर जाने लगता है। नशा केवल व्यक्ति को शारीरिक नुकसान ही नहीं पहुॅचाता बल्कि उसके अन्दर ऐसी गलत प्रवृत्तियां पनपने लगती है कि वह समाज में अपना सम्मान खोने लगता है तथा समाज से दूर होने लगता है। 

              नशा एक अन्तर्राष्ट्रीय विकराल समस्या बन चुकी है इसके दुष्प्रभाव से युवा व बुजुर्ग ही क्या छोटे बच्चे भी नहीं बच पा रहे हैं। नशा मनुष्य को न सिर्फ पतन की ओर ले जा रहा है बल्कि आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त कर रहा है। इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नशा करने से कैंसर जैसे असाध्य रोग हो रहे हैं। मुख के कैंसर का मुख्य जड़ चूने में मिलाकर खाने वाली तम्बाकू है। उन्होंने बताया कि नशा तो कोई भी हो स्वास्थ्य के लिये सब प्राणघातक है। विशेष कर सिगरेट और तम्बाकू कैंसर के जड़ हैं। उन्होंने बताया कि तम्बाकू से मरने वालों की संख्या लांखों में पहुॅच गयी है। इस समय नशा करने से हर साल लगभग 10 लाख लोग असयम ही मौत के मुॅह में समा जाते हैं। हमें अपने इच्छा शक्ति एवं डाक्टर के परामर्श से नशे को छोड़ना है। उन्होंने बताया कि नशा नाश का जड़ है। 
        कार्यक्रम को संबोधित करते हुये बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, अयोध्या ने ने फेफड़े के कैंसर के बारें में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि फेफड़े के कैंसर का जड़ सिगरेट ही है। बुरी आदतें आसानी से नहीं छूटती हैं किन्तु हमें आज से संकल्प लेना होगा कि तम्बाकू से निर्मित उत्पाद का सेवन कदापि नहीं करेगें इसी में हमारी और हमारे परिवार की भलाई है। सार्वजनिक स्थल जैसे अस्पताल, रेलवे स्अेशन, बस अड्डा आदि पर धुम्रपान निषेध है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे स्थलों पर धुम्रपान करते हुये पाया जायेगा तो 200 अर्थदण्ड का भागीदार होगा।

        उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में बच्चों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया तथा बच्चों के अधिकार के सम्बन्ध में प्रभारी सचिव महोदय द्वारा किशोरों को विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त महिला शरणालय अयोध्या में घरेलू ंिहंसा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन  किया गया। संवासिनियों को प्रभारी सचिव महोदय द्वारा उपरोक्त विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई।



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