दोष किसका..
| -Priyanka Maheshwari - Oct 1 2019 1:18PM

हंसी मजाक तक तो बात ठीक है लेकिन सोनाक्षी सिन्हा का ट्रोल होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है... सेलिब्रिटी है... मीडिया पर हैं इसलिए लोगों के सामने आ गई लेकिन ये सच बात है कि आज हमारे बच्चे कितना रामायण महाभारत गीता यह सब पढ़ते हैं? और कितनी जानकारी है उन्हें? बच्चों की छोड़िए हममें से ऐसे कितने लोग हैं जो रामायण पढ़ते हैं या चौपाइयां जानते हैं? या उनका अर्थ जानते हैं? और चलिए मान भी लिया कि हम पढ़ते हैं.. हमें जानकारी है तो हम अपने बच्चों को कितना प्रेरित करते हैं कि वो रामायण, गीता पढ़ें।

अब तो वो वक्त रहा नहीं जब बच्चों को दादी नानी रात में अपने पास में लेकर भगवान की कहानियां सुनाती थीं। तब बच्चों को बहुत सी जानकारियां कहानियों से ही मिल जाती थी बिना पढ़े। मुझे याद है मेरी ताई जी जो बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी लेकिन रामायण पढ़ती थी और बाद में हिंदी में उसका मतलब भी हमें समझाती थी। यह बचपन की बात है बाद में हम धीरे-धीरे व्यस्त होते गए... इतना वक्त नहीं रहा कि ये सब पढ़ें। बच्चे सीरियल और किताबों के जरिए जो जानकारी हासिल कर ले वह बहुत है और आजकल टीवी पर भी धार्मिक सीरियलों में पूरा सच नहीं दिखाते हैं।

दूसरी बात जब हम रामायण उठाकर नहीं पढ़ते तो हम अपने बच्चों से कैसे अपेक्षा करें कि वह पढ़ें? आजकल कॉमिक्स, आनलाइन गेम्स इन सब में बच्चा इतना उलझा रहता है कि किताबों की ओर ध्यान नहीं जाता है।  किसी को ट्रोल करने के बजाय इसकी शुरुआत लोगों को अपने घर से करनी चाहिए। अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। कितने बच्चे हैं जो हनुमान चालीसा जानते होंगे? कितने बच्चे हैं जो गायत्री मंत्र पढ़ते होंगे?

आज जो बच्चे ठीक से हिन्दी नहीं पढ़ पाते हैं उनसे हम अपने धार्मिक ग्रंथों की जानकारी की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं? हम अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को दोष देते हैं लेकिन हम अपने बच्चों को आज की जरूरत के अनुसार पढ़ाते भी वहीं है और अंग्रेजी शिक्षा पद्धति में वही पढ़ाया जाएगा जो उनके सिलेबस में होगा। मोरल साइंस के नाम पर क्रिश्चियन के साधु संतों का महिमामंडन रहता है राम, कबीर, कृष्णा इनका  कहीं कोई जिक्र नहीं होता है। इसीलिए कहा कि शुरुआत हमें अपने घर से करनी चाहिए।



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