बापू और शास्त्री के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता : के.एन. सिंह
| Rainbow News Network - Oct 2 2019 3:50PM

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में मनाई गई गाँधी व शास्त्री जयन्ती

अम्बेडकरनगर। आज है 2 अक्टूबर का दिन, आज का दिन है बड़ा महान। आज के दिन दो फूल खिले, जिनसे महका हिन्दुस्तान। एक का नारा अमन, एक का जय-जवान, जय-किसान।। सभी सरकारी, गैर सरकारी, राजनैतिक संगठनों व स्कूल/कॉलेजों के प्रांगण में पारम्परिक ढंग से 2 अक्टूबर मनाया गया जिसमें प्रातः ध्वजारोहण, राष्ट्रगान उपरान्त बापू और शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। जानकारों ने विचार गोष्ठी करके अपने-अपने विचार व्यक्त कर बापू और शास्त्री के व्यक्तित्व, कृतित्व पर प्रकाश डाला।

इसी क्रम में जिले के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय प्रांगण में विभाग के मुखिया ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह द्वारा (विभाग के कार्यालयी व फील्ड स्टाफ के साथ) ध्वजा रोहण उपरान्त पुष्पांजलि अर्पित कर देश ही नहीं विश्व स्तरीय महान विभूतियों बापू व शास्त्री को याद किया गया। के.एन. सिंह ने कहा कि अहिंसा और सत्याग्रह को अपना मूल मंत्र मानकर बापू ने देश में आजादी की अलख जगाई थी। 

उन्होंने कहा कि बापू ने स्वाधीनता की लड़ाई में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। स्वतंत्रता संग्राम की बलिबेदी पर अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की वजह से हमारा देश आजाद है। उन्होंने ही अंहिसा और सत्याग्रह के माध्यम से देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराया। हमें ऐसे महापुरूष के आदर्श व सिद्धान्तों पर चलते हुए उनके सद्विचारों को अपनाने की आवश्यकता है। हम उन्हें अपना आदर्श मानकर उनके पदचिन्हों पर चलकर देश के सभी धर्मो के लोगों, पीड़ितों, गरीबों, असहायों की मदद पूरी ईमानदारी से करें।

गाँधी जी के तीन बन्दरों की बात करते हुए के.एन. सिंह ने कहा कि बापू के ये तीन बन्दर आज भी प्रासंगिक हैं। हमें बुरा न देखना चाहिए, न सुनना चाहिए और न ही बोलना चाहिए। यही नहीं बापू स्वच्छता के प्रति काफी सचेष्ट थे हमें भी उतना ही जागरूक होने की आवश्यकता है। यदि ऐसा हो जाए तो पूरा राष्ट्र उज्जवल और निर्मल हो जाएगा। विश्व में भारत अपना एक अलग महत्व रखेगा। अपने विचारों के क्रम में ए.आर.टी.ओ. सिंह ने कहा कि देश का लाल जो लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जाना जाता है हमें उसके जैसा बनने की भी जरूरत है।

शालीनता, सादगी, सादा जीवन उच्च विचार जैसे सिद्धान्तों पर चलकर ही हम समाज, देश का विकास कर पाएँगे। जय-जवान, जय-किसान का नारा शास्त्री जी ने उस समय दिया था जब देश की सीमा पर पड़ोसी मुल्क की कुदृष्टि थी और देश में खाद्यान्न का अभाव.....। इस परिस्थिति में तत्समय बहैसियत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों और देश वासियों के पोषण के लिए विष्णु स्वरूप अन्नदाता किसान की जय का नारा बुलन्द किया था। ये दोनों यानि जवान और किसान दोनों की जय हो............इसे कत्तई नज़न्दाज किया जाना चाहिए। 



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