समाजसेवियों ने नामचीन हस्तियों के साथ गांधी जी की जयंती मनाई
| Rainbow News Network - Oct 3 2019 11:59AM
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150 वीं जयंती मनाई गई 
  • गांधी का समस्त दर्शन भारतीय संस्कृति पर आधारित है

बिहार शरीफ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के 150 वीं जयंती के मौके पर सद्भावना मंच (भारत) के तत्वावधान में नालंदा कॉलेज बिहारशरीफ के ऑडिटोरियम में “वर्तमान समय में महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता एवं सद्भावना का महत्व” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता नालंदा कॉलेज के प्राचार्य शिक्षाविद् डॉ० शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता तथा संचालन नालंदा के गांधी गांधीवादी विचारक दीपक कुमार ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नालंदा कॉलेज के प्राचार्य शिक्षाविद् शैलेन्द्र कुमार, साहित्यकार डॉ० लक्ष्मीकांत सिंह, साहित्यानुरागी राकेश बिहारी शर्मा, साहित्यकार बेनाम गिलानी, मगही कवि उमेश प्रसाद उमेश इत्यादिक जयंती समारोह में मौजूद लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की तस्वीर पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

अध्यक्षीय सम्बोधन में नालंदा कॉलेज के प्राचार्य शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है और इसके लिए आप सबको ढेरों बधाई। राष्ट्रपिता के जन्म दिवस के मौके पर ये जानना जरूरी होगा कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन को मानव समाज और देश को समर्पित कर अहिंसा की ताकत का मूल्य समझाया आखिर उसकी सोच, दर्शन और सिद्धान्त क्या थे। उन्होंने कहा कि गांधीवादी दर्शन जीवन के विभिन्न पहलुओं के लिए शक्ति एवं प्रेरणा का निरंतर बहने वाला एक ऐसा श्रोत है, जो शताब्दियों तक प्रकाश स्तंभ के रूप में बना रहेगा। वर्तमान समय में गांधीवाद की प्रासंगिकता और बढ़ गयी है। आज भी भारत में सांप्रदायिक तनाव के शमन के प्रभावी उपाय के रूप में सर्वधर्म प्रार्थना सभा एवं प्रभात फेरी जैसे गांधीवादी तकनीक का प्रयोग सामान्य है। गांधीजी का यह कथन आज भी समयोचित है कि ‘इस संसार में हमारी जरूरत के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है, परंतु हमारे लालच के लिए नहीं’।

समाजसेवी साहित्यानुरागी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं और पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की 115 वीं जयंती पर उनकी स्मृति को नमन करता हूँ। वे भारत के एक महान सपूत थे, जिन्होंने हमारे देश की पूरी लगन और समर्पण के साथ सेवा की। उनकी सादगी, सत्यनिष्ठा और साहसिक नेतृत्व आज भी पूरे देश के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के किसी भी देश में शांति मार्च का निकलना हो अथवा अत्याचार व हिंसा का विरोध किया जाना हो, या हिंसा का जवाब अहिंसा से दिया जाना हो, ऐसे सभी अवसरों पर पूरी दुनिया को गांधीजी की याद आज भी आती है और हमेशा आती रहेगी। अत: यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि गांधीजी, उनके विचार, उनके दर्शन तथा उनके सिद्धांत कल भी प्रासंगिक थे और आज भी है।

नामचीन इतिहासकार प्रोफेसर डॉ० लक्ष्मीकांत सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि महात्मा गांधी के पास अहिंसा, सत्याग्रह और स्वराज नाम के तीन हथियार थे। सत्याग्रह और अहिंसा के उनके सिद्धांतों ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों को अपने अधिकारों और अपनी मुक्ति के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन अहिंसा के आधार पर लड़ा गया। वर्तमान समय में गांधी के आदर्शों और उनके दिखाये रास्ते पर चलने की जरूरत एक बार फिर शिद्दत से महसूस की जा रही है। मेरा मानना है कि महात्मा गांधी को समझना आसान भी है और मुश्किल भी। दरअसल, गांधी की बातें बेहद सरल और सहज लगती हैं, लेकिन उनका अनुसरण करना बेहद कठिन होता है। संचालन करते हुए समाजसेवी दीपक कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तमान संदर्भों में जब गांधीजी के सिद्धांतों की प्रासंगिकता की बात होती है तो आज चाहे भारत का फैशनेबल युवा हो या किताबी ज्ञान के महारथी आईटी प्रोफेशनल या ग्रामीण बेरोजगार युवा हों, सभी के गांधीजी प्रिय पात्र हैं। ये सभी गांधीजी को अपने से जोड़े बगैर नहीं रह सकते हैं।

महात्मा गांधी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक एवं अनुकरणीय हैं जितने अपने वक्त में थे। गांधीजी ने हमेशा से युवाओं को वंचित समूहों के उत्थान के लिए प्रेरित किया है। वो व्यक्तिगत घृणा के हमेशा विरोधी रहे हैं। उनका कथन था- 'शैतान से प्यार करते हुए शैतानी से घृणा करनी होगी।' उन्होंने हमेशा युवाओं को आत्मप्रशंसा से बचने को कहा है। उनका कथन है कि जनता की विचारहीन प्रशंसा हमें अहंकार की बीमारी से ग्रसित कर देती है। समाजसेवी चन्द्र उदय कुमार मुन्ना ने कहा कि गांधी कोई दार्शनिक नहीं थे, वो एक सच्चे विचारक एवं सन्त थे, उनका सम्पुर्ण जीवन कर्ममय था, व्यक्तिगत साधना में उनका विश्वास था। उनके जीवन का लक्ष्य मात्र अंग्रेजियत से छुटकारा दिलाना नहीं था, भारत सहित सारे विश्व को सत्य और अहिंसा के आदर्शों पर मानवता का निर्माण करना था। गांधी जी ने पहली बार सत्य, अहिंसा और शत्रु के प्रति प्रेम के आध्यात्मिक और नैतिक सिद्धान्तों का राजनीति के क्षेत्र में इतने विशाल पैमाने पर प्रयोग किया और सफलता भी प्राप्त की।

बेनाम गिलानी ने कहा कि गांधी के मूल्य भारतीय भूमि और संस्कृति की देन हैं। गांधी ने इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया और सोई हुई भारत की जनता को जगाने का प्रयास किया। इसमें वह सफल भी रहे। गांधी का समस्त दर्शन भारतीय संस्कृति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि गांधी स्वयं एक दर्शन हैं। गांधी के अहिंसावादी विचार आज भी प्रासंगिक हैं। समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय बहिस्कृत हितकारी संगठन के अध्यक्ष सुजीत कुमार ने कहा कि आज हमें गांधी विचार को जानना जरूरी होगा, क्योंकि विचार दर्शन से प्रवाह हुआ करता है और गांधी दर्शन के मूल में आपको सत्य, अहिंसा, सादगी अस्तेय, अपरिग्रह, श्रम और नैतिकता मिलेगी- जहां से स्थानीय स्वशासन, स्वावलम्बन, स्वदेशी विकेन्द्रीकरण, शोषणमुक्त व्यवस्था और सहयोग, सहभाव एवं समानता पर आधारित जागृति ढांचे का अभ्युदय होगा।

अब समय आ गया है कि हम अपनी इस पुरानीं सोंच को छोड़ें और इसके लिए आज हमें गांधी जयंती से अच्छा मौका नहीं मिलेगा क्योकि जितनी समाजिकता और नैतिकबोध का सजीव और निर्मल चित्रण हमें उनकी छवि से मिलेगा उतना किसी अन्य से नहीं। मगही साहित्यकार उमेश प्रसाद उमेश ने कहा कि अहिंसावादी महात्मा गांधी ने राजनीति, समाज, अर्थ एवं धर्म के क्षेत्र में आदर्श स्थापित किये व उसी के अनुरूप लक्ष्य प्राप्ति के लिए स्वयं को समर्पित ही नहीं किया बल्कि देश की जनता को भी प्रेरित किया व आशानुरूप परिणाम भी प्राप्त किये। उनकी जीवन दृष्टि भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। आज गांधी हमारे बीच नहीं हैं। किन्तु एक प्रेरणा और प्रकाश के रूप में लगभग उन सभी मुद्दों पर उनका मार्गदर्शन निरन्तर हमारे साथ है। 

समाजसेवी आशुतोष कुमार मानव ने कहा कि महात्मा गाँधी जी ने देश की आजादी के लिए सत्याग्रह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की भी बुनियाद रखी थी। गाँधी जी ने कहा था- विकास के उद्देश्य से प्राकृतिक संसाधनों दोहन पर्यावरणीय संकट लाएगा । कालांतर में इस पर सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन वर्तमान समय में गाँधी जी के इस सपने को साकार करने के लिए बिहार सरकार अपने और जन भागीदारी से भी लगातार प्रयास कर रही है। इसके के तहत सरकार की ओर से जल जीवन और हरियाली का अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव के पुराने पोखर, जल स्त्रोत की खोज हो रही है। उन्हें जीवंत करने के लिए सरकार कोशिश में लगी है। सड़क के किनारे एवं सरकारी भूमि पर पौधारोपण महात्मा गाँधी के इसी परिकल्पना को साकार कर रहा है।

सम्मानित अतिथि प्रख्यात वॉलीवुड गायिका रेखा झा ने गांधी जी के लोकप्रिय भजन 'वैष्णव जन के तेने कहिये जो पीर पराई जाने रे' गाकर सुनाई।जिसे सुनकर पूरा सभाकक्ष गदगद हो गया। साथ में इस दौरान संगीत सम्राट अशोक सिंह और प्रख्यात लोकगायक रामसागर राम ने अपनी मंडली के साथ महात्मा गांधी के कई भजनों को सुनाकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में सर्वधर्म  प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नालंदा के श्रम अधीक्षक पूनम कुमारी, समाजसेवी अमित कुमार, मिशन हरियाली नूरसराय के धनञ्जय कुमार, रवि कुमार,पुतुल सिंह, संगीतकार प्रो. डॉ. अशोक कुमार,पंकज कुमार, प्रो.धनञ्जय कुमार,रवि कुमार दीनदयाल सिंह, मनोज राय, पंकज कुमार, हिमांशु कुमार, प्रमोद कुमार, विवेक कुमार सुधीर पाण्डेय, संगीतकार बरखा रानी, गजलकार नवनीत कृष्ण, कवि महेंद्र कुमार विकल, अमन कुमार, कुणाल कुमार, कवयित्री मुस्कान चांदनी डॉ. रेखा सिन्हा, समाजसेवी रणजीत कुमार, सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। नालंदा जिले के लोगों  को जो अपने क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य कर किये हैं और कर रहे हैं उन लोगों को सम्मानित किया गया।

बिहार शरीफ से संजय कुमार की रिपोर्ट-



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