अम्बेडकरनगर में दूध की किल्लत बढ़ा रही है नमस्ते इण्डिया डेयरी
| Rainbow News Network - Oct 4 2019 1:11PM

मीडिया को स्थानीय प्रबन्धक रिंकू गौतम शर्मा ने कुछ भी बताने से किया गुरेज

जिले से कम दामों में खरीदकर कानपुर बड़े प्लांट में भेजा जाता है दूध

अम्बेडकरनगर जिले में वैसे तो कई दर्जन मिल्क डेयरी संस्थान खुले हैं जो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों के दुधारू पशु पालकों से गाय और भैंस का दूध संग्रह करवाकर खरीद लेते हैं। इनमें प्रमुख हैं पराग जो सहकारिता पर आधारित है, दूसरी इस समय सर्वाधिक चर्चित डेयरी नमस्ते इण्डिया बीते पाँच वर्षों से जिले में स्थापित होकर ग्राम पंचायत स्तर पर दुग्ध संग्रह केन्द्र संचालित कर दुधारू पशु पालकों से उनके यहाँ के पशुओं के दूध की खरीद सस्ते दामों में कर जिले से बाहर भेजकर मनमाने दाम पर बेंच रही है।

नमस्ते इण्डिया के बारे में बताया गया है कि प्रतिदिन जिले से हजारों लीटर दूध संग्रह करवाकर यह कानपुर में स्थापित बड़े प्लान्ट को भेज रही है। जहाँ दूध को चिल और कथित रूप से (पाश्च्युराइज कर) पायरोजन फ्री करके अपना ब्राण्ड लेबिल लगाकर दूर-दराज इलाकों में महंगे दामों पर बेंच रही है। नमस्ते इण्डिया द्वारा भैंस का दूध 28 से लेकर 90 रूपए और गाय का दूध 17 से लेकर 60 रूपए प्रति लीटर की दर से खरीदने का दावा किया जाता है, परन्तु वास्तविकता क्या है इसे भुक्तभोगी पशुधन पालक ही बता सकते हैं।

इस बावत स्थानीय नमस्ते इण्डिया प्लांट प्रबन्धक रिंकू गौतम शर्मा से दूरभाषीय सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से गुरेज किया और कहा कि मीडिया के लोग फैसलगंज कानपुर स्थित नमस्ते इण्डिया के मुख्यालय बात करें। यहाँ हम लोग नमस्ते इण्डिया के नियमानुसार काम कर रहे हैं। उच्चाधिकारियों द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देशों का पालन कर क्षेत्र से दुग्ध संग्रह करवा रहे हैं। बेहतर होगा कि मीडिया के लोग मुझसे बात न करके सीधा कानपुर बात करें।

पराग डेयरी की निष्क्रियता और कर्मियों की उदासीनता की वजह से निजी क्षेत्रों के लोग बाहर से आकर जिले का दूध सस्ते दर पर खरीदकर उन्हें मुँह मांगे दामों पर बेंच रहे हैं। यदि यह क्रम ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब निजी क्षेत्रों में स्थापित डेयरी संस्थानों द्वारा जिले के आम लोगों को दूध की बूंद-बूंद के लिए तरसाया जाएगा और बेइंतहा दाम बढ़ाकर ग्राहकों/उपभोक्ताओं का दोहरा शोषण किया जाएगा। जिले में पाँव पसार रहीं निजी क्षेत्रों की डेयरियाँ और उनकी दुग्ध खरीद-फरोख्त नीतियाँ जनपद वासियों के लिए खतरे की घण्टी साबित होने लगी हैं।

प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को चाहिए कि इन सभी दुग्ध डेयरियों की नियमित मॉनीटरिंग करायें जिससे उचित कीमत पर उपभोक्ताओं को दूध व दूध से निर्मित अन्य उत्पाद मिल सके। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमे को भी इन उद्योगों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। जन स्वास्थ्य के दृष्टिगत दुग्ध डेयरियों पर की जाने वाली रासायनिक मिलावट पर भी नियंत्रण लगना चाहिए। 



Browse By Tags



Other News