ऐसे में कोई भी बन सकता है रोमियो
| Posted by- Editor - May 30 2017 3:04PM

उत्तर प्रदेश के सी.एम. योगी लाख कानून बनाएँ जब हम उस पर स्वयं अमल नहीं करेंगे तो वह बेमानी ही होगा। उदाहरण के तौर पर एन्टी रोमियो स्क्वाड के गठन को ही ले लीजिए। हम यहाँ एक चित्र प्रकाशित कर रहे हैं जिसे देखकर कौन ऐसा पुरूष (किसी भी आयु वर्ग का) जिसकी आँखों में जरा भी रोशनी हो वह अपने चक्षुओं पर नियंत्रण लगा पाएगा।

इसे फैशन कहा जाए या उनके माँ-बाप की हैसियत का प्रदर्शन? कौन कहता है कि भारतीय संस्कृति विलुप्त नहीं हुई है। हमारा मानना है कि अब वह दिन दूर नहीं जब माँ-बाप द्वारा दी गई छूट के परिणाम स्वरूप नई नस्ल आदम युग में जीने लगेगी। गाँव, कस्बा, बाजार व शहर कहीं भी ऐसी आधुनिकाओं को देखा जा सकता है। अब जब ये युवतियाँ स्वयं ही देह प्रदर्शन कर रही हों तो जाहिर सी बात है कि युवक और अन्य उम्र के लोग अपने पर नियंत्रण नहीं रख पाएँगे। ऐसे में उनकी गतिविधि से उन्हें रोमियो जैसे नाम से नवाजा जाएगा।

अपना तो यह मानना है कि पहले हम स्वयं के परिवार और वर्तमान नस्ल पर कड़ी निगरानी रखें, उन्हें अपव्ययी बनाने से खुद को रोकें। इतनी स्वतंत्रता न दें कि उनकी हैसियत नंगी होकर सड़कों पर घूमे। ए.आर.एस. यानि एन्टी रोमियो स्क्वॉड का क्या? उसे तो एक काम मिल गया है वह किसी को भी रोमियो बना कर अन्दर हवालात करके अपना टारगेट पूरा करेगी।  

 



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