भगतसिंह छात्र मोर्चा ने बीएचयू में अमित शाह के कार्यक्रम का किया विरोध
| Rainbow News Network - Oct 17 2019 3:01PM

वाराणसी। भगतसिंह छात्र मोर्चा, अमित शाह के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में कराए जा रहे कार्यक्रम का विरोध करता है तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से इस कार्यक्रम की अनुमति को रद्द करने की मांग करता है। ज्ञात हो कि आज समूचे देश में जो विभाजनकारी और फासीवादी माहौल बनाया गया है और निरंतर प्रायोजित रूप से जो बुद्धिजीविओं, छात्रों , आदिवासिओं, अल्पसंख्यकों व दलितों का सरकार द्वारा दमन किया जा रहा है, हमारा यह स्पष्ट मानना है कि इसमे गृह मंत्री होने के नाते अमित शाह की संलिप्तता है।

साथियो, बीते 2 महीने से भी अधिक समय से कश्मीर को लॉकडाउन करके रखा गया है। कश्मीरियों के मानवाधिकारों का कत्लेआम मचा कर उन्हें बंदूक की नली पर जीने को मजबूर कर दिया है जिसने कश्मीर को एक उपनिवेश के रूप में बदल दिया गया है। एनआरसी के नाम पर जिस तरह 20 लाख लोगों को डिटेंशन कैम्प में जीने को धकेल दिया गया है जिसने एक समूची पीढ़ी को अस्तित्व विहीन करके मानवता को शर्मसार कर दिया।

साथी नजीब को भी 3 साल पहले दिन दहाड़े देश की राजधानी दिल्ली स्थित एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी से सत्तापोषित गुंडों द्वारा गायब कर दिया गया और 3 साल बाद भी उसकी माँ आज अपने बेटे के मिलने की खबर के आस में सड़कों पर संघर्ष कर रही हैं। इन तमाम घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर कार्यवायी करने की बजाय अमित शाह सड़क के गुंडे कि भाषा का प्रयोग करते हुए धमकाते है। ये bhu जैसे संस्थान पे भी सवाल खड़ा करता है कि वो एक अकादमिक कार्यक्रम में इस तरह के व्यक्ति को मुख्य अतिथि के रूप में व्याख्यान देने के लिए बुलाता है जो सड़क के गुंडों की भाषा में देश के बुद्धिजीवियों और तरक्कीपसंद लोगों को धमकाते है।

Bhu में लगातार भारत अध्ययन केन्द्र और वैदिक विज्ञान केन्द्र जैसे संस्थान के नाम पर लगातार इस तरह के कार्यक्रम कराये जाते है और विश्वविद्यालय के अन्य मदों के पैसे को इन सेमिनारों में खर्च करके विज्ञान और इतिहास को तोड़ा मरोड़ा जाता है। ये यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर की मेधा पर भी सवाल है की गुप्तकालीन इतिहास पर क्या उनसे बेहतर ऐसे शख्स को इतिहास की जानकारी है जिसे गुजरात दंगों में उसकी संलिप्तता के कारण गुजरात से बाहर कर दिया गया था। अतः भगत सिंह छात्र मोर्चा bhu प्रशासन से इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग करता है। विरोध में प्रमुख रूप से रंजन चंदेल, विश्वनाथ, आशुतोष, उत्कर्ष  व आदि लोग शामिल रहे।



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