प्रकृति के रक्षा के लिए हर गांव एक बगीचा अभियान चलाने की जरूरत
| Rainbow News Network - Oct 23 2019 11:58AM

मौसम और तापमान मे अनायास बदलाव आते ही हम लोग पेड़-पौधों एवं प्रकृति के  बारे में सोचने लगते है पर जैसे ही स्थिति सामान्य हो जाती है हम फिर सब कुछ भूल कर  कंक्रीट की जंगल कूड़ा करकट के पार्क एवं धुआं युक्त वातावरण के निर्माण में जोर-शोर से लग जाते हैं.विकास के नाम पर  प्रकृति की अनुपम उपहार  पेड़ पौधे  जंगल  नदियां  पहाड़  पठार मरुस्थल समुद्र मिट्टी इत्यादि का अनियंत्रित तरीके से दोहन दिन-रात किया जा रहा है अपने लाभ के लिए प्रकृति के हाथ-पांव को नेस्तनाबूद किया जा रहा है. प्रकृति को नियंत्रित करने वाली शाखाओं को कमजोर किया जा रहा है इसके लिए विभिन्न प्रकार के बहाने बनाए जाते हैं. प्रकृति के रक्षकों आदिवासियों को उनके  प्राकृतिक निवास गृहों से वंचित किया जा रहा है  जिनके कारण ही आज  जल जंगल जमीन  पर्वत पठार  बचे हुए हैं .

यही नहीं  जमीन के अंदर दबे हुए महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों के संरक्षक भी आदिवासी और मूल निवासी ही हैं.लेकिन उनको विविध तरीकों से परेशान कर वहां से खदेड़ने का षड्यंत्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर किया जा रहा है. जो पेड़ पौधे  विविध तरीकों से मानव को  अपनी सेवा  देने को तत्पर रहते हैं उन्हें अनियंत्रित तरीके से  काटा जा रहा है. जिस वृक्ष की थोड़ी सी छांव मिलने पर  राहत अनुभव करते हैं.जिनके फलों के स्वाद चटखारे लेकर चखते हैं जिनके फूलों से  अपने घर  कार्यालय और  गले की शोभा बढ़ाते हैं, जिनके जड़ी  बूटी से असाध्य बीमारियों का इलाज होता है, जिनकी  लकड़ियों से  मृत्यु उपरांत  अंतिम क्रियाकलाप संपन्न किया जाता है, उसे ही हम आज  समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं. वृक्षों से हमें अनेकों प्रकार से राहत मिलता है लेकिन उस राहत  से हम लोग सीख नहीं ले पा रहे.हम अपने स्वार्थ में वसुंधरा को बिल्कुल वृक्ष विहीन करने पर तुले हुए हैं.आज हमारे स्वार्थ का ही नतीजा है पृथ्वी का तापमान दिनों दिन बढ़ते जा रहा है.

समुद्र का जलस्तर बढ़ने लगा है,समुद्र में पाए जाने वाले कोरल रीफ मरने लगे हैं. असमय बारिश ओलावृष्टि तूफान कहीं सुखाड़ कहीं बाढ़ की स्थिति आम हो गया है.आज मानव का स्वभाव हो गया है धरती और पर्यावरण से केवल लेना उसके बदले हम पर्यावरण व धरती को कुछ दे नहीं रहे हैं. पिछले कई दशकों से  वृक्षारोपण अभियान  सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों द्वारा  लगातार कई नामों से चलाया जा रहा है  पर उसका अपेक्षित परिणाम अभी तक प्राप्त नहीं हुआ. जिसका मुख्य कारण  आम लोगों द्वारा असहयोग किया जाना है. ग्राम पंचायतों के द्वारा प्रत्येक पंचायत में लाखों वृक्ष लगाए गए उसको घेराबंदी किया गया कई महीने तक पानी और खाद डाला गया लेकिन फिर भी वृक्षों की तादाद सैकड़ों भी नहीं है.अगर हर गांव में एक बगीचा अभियान चलाया जाए तो मुझे जहां तक उम्मीद है आम वृक्षारोपण अभियान से ज्यादा सफल होगा.

वृक्षारोपण अभियान के असफलता कारण :- स्थाई देखरेख करने वालों की कमी पशु चारण की समस्या ग्रामीणों द्वारा अपेक्षित मात्रा में सहयोग नहीं किया जाना तथा वृक्षारोपण के लिए सही समय और सही जगह का चुनाव नहीं किया जाना आदि कारण है. जिसके कारण ग्रीन इंडिया का सपना कार्य रूप में परिणत नहीं हो पा रहा है.
अगर वृक्षारोपण अभियान को मनरेगा जैसी जन कल्याणकारी योजना के साथ जोड़ दिया जाए तो बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है.साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके भी उपलब्ध होंगे.जब ग्राम वासियों को शुरुआती दौर से ही प्रत्यक्ष लाभ मिलना शुरू हो जाएगा तो वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगेंगे.

वृक्षारोपण से लाभ:- वृक्षारोपण से अनेक तरह के लाभ है अगर इसे प्राकृतिक नजरिए से देखा जाए तो वृक्षारोपण के बाद अगर धरती पर हरित आवरण 33% से अधिक हो जाएगा तो जो आजकल मौसम में बदलाव देखे जा रहे हैं उसमें स्थायित्व आ जाएगा.आज जो हम बे मौसम बारिश आंधी तूफान ओलावृष्टि ठंड गर्मी महसूस कर रहे हैं और उसको झेल रहे हैं उसका सबसे बड़ा कारण धरती को वृक्षों से रहित हो जाना है.वैसे यत्र तत्र वृक्ष लगे जरूर है लेकिन जो एक आवरण बनना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है.जंगलों के कटने के कारण बादलों का आकर्षण उस मात्रा में नहीं हो पा रहा है जिस मात्रा में होना चाहिए.जंगल यानी कहे तो पेड़-पौधे बादलों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं उन्हें मजबूर कर देते हैं बारिश करने के लिए.वृक्ष आवरण आंधी तूफान को भी संयमित करने में अपने तरीके से भूमिका निभाते रहे हैं.आंधी तूफान के रास्ते में दीवार बनकर खड़े हो जाते हैं जिससे कि उनकी रफ्तार में कमी आती है और उनकी मनमानी नहीं चल पाती है.अगर पेड़ पौधे से आर्थिक लाभ की बात करें तो इस से अनेक प्रकार के फल फूल जड़ी बूटी इमारती लकड़ी इंधन आदि प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही मधुमक्खी पालन रेशम के कीट पालन आदि करके बाग बगीचों से अतिरिक्त आय भी उत्पन्न किया जा सकता है. मवेशियों के लिए चारा प्राप्त करने का स्रोत भी वृक्ष बन सकते हैं.

वृक्ष के महत्व :- ग्लोबल वार्मिंग के दौर में मनुष्य को एक बार फिर से वृक्ष के महत्व को समझना होगा तभी जाकर इस ब्रह्मांड को धरती को सुरक्षित रखा जा सकता है जैसे कि बिना हाथ-पांव के मनुष्य का कोई महत्त्व नहीं है उसी तरह से पेड़ पौधे धरती के हाथ-पांव हैं और मानव ने उसे ही क्षति पहुंचा दिया जिसका खामियाजा हम आज भुगत रहे हैं प्राचीन काल में ऋषि मुनि जंगलों में रहते थे और उससे अपने पुत्र के समान देखभाल करते थे लेकिन आज हम केवल अपने तुच्छ लाभ के लिए दिन रात वृक्षों हानी पहुंचाने में लगे हुए हैं. लेकिन हमको कितना हानि हो रहा है पर्यावरण को कितना हानि हो रहा है यह प्रत्यक्ष चीज हम लोग समझने को तैयार नहीं जो कि बहुत दुखद है. आज हम सबको संकल्प लेने की जरूरत है एक व्यक्ति पांच वृक्ष अभियान चला कर हम लोग वसुंधरा को हरा भरा बनाएं.



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