नशा उन्मूलन विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| Rainbow News Network - Nov 8 2019 4:59PM

अम्बेडकरनगर। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के आदेशानुसार एवं अशोक कुमार, सचिव, सिविल जज, (सी0डि0), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, के निर्देशानुसार दिनांक 08.11.2019 को 04ः00 बजे से संयुक्त जिला चिकित्सालय, अम्बेडकरनगर में नशा उन्मूलन विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर को सम्बोधित करते हुये अजय कुमार मिश्र, सिविल जज (जू0डि0) त्वरित, जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर ने बताया कि जिन लोगों का हृदय कमजोर होता है या जिनका निश्चय सुदृढ़ नहीं होता है जो संघर्ष के आगे घुटने टेक देते हैं और अपनी कमजोरी को छुपाने के लिये नशे का सहारा लेते हैं। नशा करने वाला व्यक्ति यह बहाना करता है कि नशा करने से कोई चिन्ता या दुख नहीं रहता। शुरू में तो व्यक्ति शौक के तौर पर नशा करता है लेकिन फिर वह नशे का आदी होने लगता है और अपनी बरबादी की ओर जाने लगता है। नशा केवल व्यक्ति को शारीरिक नुकसान ही नहीं पहुॅचाता बल्कि उसके अन्दर ऐसी गलत प्रवृत्तियां पनपने लगती है कि वह समाज में अपना सम्मान खोने लगता है  तथा समाज से दूर होने लगता है। नशा एक अन्तर्राष्ट्रीय विकराल समस्या बन चुकी है इसके दुष्प्रभाव से युवा व बुजुर्ग ही क्या छोटे बच्चे भी नहीं बच पा रहे हैं। 

नशा मनुष्य को न सिर्फ पतन की ओर ले जा रहा है बल्कि आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त कर रहा है। इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नशा करने से कैंसर जैसे असाध्य रोग हो रहे हैं। मुख के कैंसर का मुख्य जड़ चूने में मिलाकर खाने वाली तम्बाकू है। उन्होंने बताया कि नशा तो कोई भी हो स्वास्थ्य के लिये सब प्राणघातक है। विशेष कर सिगरेट और तम्बाकू कैंसर के जड़ हैं। अल्प समय में काल कलवित हो जाने से बच्चे बेसहारा हो जाते हैं उनकी समुचित पढ़ाई-लिखाई नहीं हो पाती है और वह ठोकर खाने पर मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि तम्बाकू से मरने वालों की संख्या लांखों में पहुॅच गयी है।

इस समय नशा करने से हर साल लगभग 10 लाख लोग असयम ही मौत के मुॅह में समा जाते हैं। हमें अपने इच्छा शक्ति एवं डाक्टर के परामर्श से नशे को छोड़ना है। उन्होंने बताया कि नशा नाश का जड़ है। शिविर को सम्बोधित करते हुये डा0 एस0पी0 गौतम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, संयुक्त जिला चिकित्सालय, अम्बेडकरनगर, ने बताया कि कैंसर से जनित रोगों में रेडियोधर्मी या अन्य विधि से जो सेकाई की जाती है वह बहुत ही कष्टदायक होती है और यदि कैंसर का असर अन्तिम अवस्था पर पहुॅच चुका है तो मरीज के बचने की सम्भावना न के बराबर रहती है। यह चिकित्सा प्रक्रिया अत्यंत मंहगी होने के कारण सभी उसका लाभ नहीं ले सकते। हमें प्रण करना होगा कि आज से नशा नहीं करेगें। 

शिविर का संचालन करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रामचन्द्र वर्मा ने फेफड़े के कैंसर के बारें में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला और उन्होंने बताया कि फेफड़े के कैंसर का जड़ सिगरेट ही है। बुरी आदतें आसानी से नहीं छूटती हैं किन्तु हमें आज से संकल्प लेना होगा कि तम्बाकू से निर्मित उत्पाद का सेवन कदापि नहीं करेगें इसी में हमारी और हमारे परिवार की भलाई है। सार्वजनिक स्थल जैसे अस्पताल, रेलवे स्अेशन, बस अड्डा आदि पर धुम्रपान निषेध है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे स्थलों पर धुम्रपान करते हुये पाया जायेगा तो 200 अर्थदण्ड का भागीदार होगा। इस शिविर में डॉ0 हर्षित गुप्ता हास्पिटल मैनेजर, आर0सी0 श्रीवास्तव, ओम प्रकाश, मुकेश यादव, सौरभ सिंह, प्रदीप एवं विकास सिंह भारती व अन्य अस्पताल के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे। 



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