अमृतभोग बना अकबरपुर की पहचान
| Rainbow News Network - Nov 9 2019 3:39PM

स्थान व लोग हर काल में अपनी खासियत को लेकर एक दूसरे के पूरक रहे हैं। कोई-कोई स्थान किसी व्यक्ति विशेष अथवा अन्य महत्वपूर्ण कारणों से प्रसिद्धि की बुलन्दी पर होता है। बहुत से ऐसे स्थान हैं जो धार्मिक दृष्टि से मन्दिरों, पूजालयों के नाम से जाने जाते हैं तो कुछ पौराणिक नदियों, ऐतिहासिक इमारतों, शहीदों और कुछ महापुरूषों तथा राजनेताओं के नाम की वजह से अपनी पहचान बनाये हुए हैं।

उदाहरण के तौर पर ताजमहल को यदि लिया जाये तो इस विश्व स्तरीय भव्य व आकर्षक इमारत ने आगरा का नाम मकबूल किया है। ठीक उसी तरह जैसे गेटवे ऑफ इण्डिया व होटल ताज ने मुम्बई को शोहरत दिलाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लाल किला, जामा मस्जिद, कुतुबमीनार, इण्डिया गेट आदि की वजह से दिल्ली मशहूर है, तो रूमी दरवाजा, छोटा व बड़ा इमामबाड़ा, भूल-भुलैया, चिड़िया घर की वजह से नवाबों का शहर लखनऊ प्रसिद्ध है। लम्बे चौड़े और अन्य उदाहरण न देकर अब हम असल मुद्दे पर आते हैं। 

खान-पान, रेस्तराँ-होटलों एवं मिष्ठान की दुकानों/प्रतिष्ठानों की वजह से कई स्थानों का नाम लोगों की जुबान पर रहता है। मसलन- रेवड़ी, गजक चौधरी स्वीट हाउस, राम आसरे मिष्ठान भण्डार लखनऊ, सुल्तानपुर में आगरा स्वीट, गया प्रसाद आगरा वाले की मिठाई की दुकान, जौनपुर में बेनी राम इमरती वाले, फैजाबाद में कालका मिष्ठान भण्डार ठीक इसी तरह पिछले डेढ़ दशक से अम्बेडकरनगर के अकबरपुर का नाम बस स्टेशन स्थित भव्य एवं आकर्षक मिठाई की दुकान अमृतभोग स्वीट्स की वजह से लोगों की जुबान पर है। अब तो बस स्टेशन क्षेत्र में स्थित वार्ड, मोहल्लों व गलियों में रहने वाले नागरिकों ने भी अपने डाक पते में अमृतभोग स्वीट्स का जिक्र करना शुरू कर दिया है। इसके पीछे, इसके अगल-बगल, दायें-बायें, निकट, गली में आदि लिखकर अपनी डाक सामग्रियाँ तो मंगवाते ही हैं साथ ही यहाँ के लोग दूर-दराज से आने वाले हित-मित्रों, आगन्तुकों व रिश्तेदारों को भी अमृतभोग स्वीट्स पहुँचने की बात कहते हैं। इस तरह लोग आसानी से लम्बी यात्रा कर गन्तब्य को पहुँच रहे हैं।

आखिर अमृतभोग में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से इसका नाम क्षेत्र व जिले में ही नहीं बल्कि प्रदेश यहाँ तक की बाह्य प्रदेशों में भी होने लगा है। यदि इसकी शोहरत में इसी तरह इजाफा होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इसे विश्व के पटल पर देखा जाएगा। जी हाँ.........अकबरपुर बस स्टेशन के निकट अमृतभोग नाम से डेढ़ दशक पूर्व एक अनुभवी व वरिष्ठ व्यवसाई श्रीचन्द चन्दानी ने यहाँ आकर मिठाई की दुकान की स्थापन कर उसका संचालन शुरू किया। धीरे-धीरे उनके द्वारा रोपा गया अमृतभोग नामक बिरवा ने विकास करते-करते अब वट वृक्ष का रूप अख्तियार कर लिया है। छोटा पौधा के वटवृक्ष सदृश्य बनने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। उसी तरह 15 साल पहले के अमृतभोग को वर्तमान अमृतभोग बनने के पीछे कई वजहें रहीं हैं। जैसे- दुकान प्रतिष्ठान का आकर्षण, निर्मित मिठाइयों की गुणवत्ता अव्वल दर्जे की, मिठाइयाँ खाद्य, स्वास्थ्य वर्धक, रूचिकर एवं ताजी। 

कुशल एवं उत्कृष्ट व्यावसायिक प्रबन्धन। वाजिब कीमत, ग्राहकों के साथ विनम्रतापूर्ण व्यवहार, साफ-सफाई (स्वच्छता पर विशेष ध्यान) आदि ऐसी कई और भी खूबियों की वजह से अमृतभोग अमृतभोग हो गया। बताना आवश्यक है कि अमृतभोग के शुरूआती दिनों में बुजुर्ग स्वामी प्रतिष्ठान का प्रबन्धन देखते थे, परन्तु उनकी वृद्धावस्था की वजह से अब युवा रवि चन्दानी ने अमृतभोग स्वीट्स का प्रबन्धन संभाल लिया है। बता दें कि रवि चन्दानी अमृतभोग स्वीट्स के संस्थापक/संचालक श्रीचन्द चन्दानी के एक मात्र पुत्र हैं। 

अमृतभोग प्रतिष्ठान का विस्तारीकरण हो चुका है। पुरानी दुकान में ताजी एवं स्वादिष्ठ मिठाइयों का विक्रय किया जाता है तो इसी से सटी नई दुकान में चाट, टिक्की, छोला-भटूरा, समोसा, इमरती आदि खाद्य सामग्रियों की बिक्री हर आम-खास के लिए की जाती है। अमृतभोग का यह रेस्तराँ सुबह से लेकर देर शाम तक जलपान करने वालों के लिए खुला रहता है। लब्बो-लुआब यह कि अमृतभोग एक ऐसा प्रतिष्ठान बन गया है जहाँ से कोई भी ग्राहक निराश वापस नहीं लौटता है। वह नाश्ता-पानी के साथ ही स्वादिष्ट, स्वास्थ्य वर्धक मिठाइयों का सेवन कर उसे पैक करवाकर घर भी ले जाते है। मांगलिक अवसरों और त्योहारों पर अमृतभोग द्वारा निर्मित व बिक्री की जाने वाली मिठाइयों, जलपान, खाद्य सामग्रियों की मांग बढ़ जाती है।

अमृतभोग को जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अम्बेडकरनगर द्वारा उत्कृष्ट निर्माण एवं स्वच्छता हेतु प्रशंसित भी किया जा चुका है। यहाँ तक कि खाद्य पदार्थों के क्रय करने के बावत बात करने पर इस विभाग के जिम्मेदार ओहदेदार अमृतभोग की ही अनुशंसा करते हैं। 



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