काश! हम भी रमेश चन्द्र त्रिपाठी की तरह होते....
| Posted by- Editor - Nov 13 2019 5:17PM

शासन और प्रशासन स्तर पर फौजी, सेनानी, सम्भ्रान्त जनों के निधन पर शोक संवेदना व श्रद्धांजलि अर्पित करने की परम्परा संवैधानिक और पुरानी है। ऐसे मौके बहुत कम ही देखने को मिले हैं या मिलते हैं जब किसी आम नागरिक की मृत्यु उपरान्त प्रशासनिक व पुलिस अमला औपचारिक रूप से शोक संवेदना व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित करे। बीते दिनों अम्बेडकरनगर जिले के प्रशासनिक व पुलिस अमले ने बुजुर्ग रमेश चन्द्र त्रिपाठी के निधन उपरान्त उनके आवास जाकर परिजनों को सान्त्वना देने के साथ शोक संवेदना व श्रद्धांजलि अर्पित किया। 84 वर्षीय दिवंगत त्रिपाठी एक सेवा निवृत्त वायुसेना कर्मी थे, उनकी अभिरूचि समाजसेवा व साहित्य सृजन में थी। परन्तु उनके निधन उपरान्त जिले में यह बात सुखियों में आई कि वह अयोध्या प्रकरण में पक्षकार थे। उनके निधन पर हम शोक संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रबुद्धजनों की जिज्ञासा शान्त करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस से मिली जानकारी को प्रकाशित कर रहे हैं।

अम्बेडकरनगर जिले के भीटी तहसील व थाना क्षेत्र के गाँव भगवान पट्टी निवासी 84 वर्षीय बुजुर्ग रमेश चन्द्र त्रिपाठी का निधन 11/12 नवम्बर 2019 की रात्रि उनके निज आवास पर हो गया। उनके निधन पर जिले का प्रशासन और पुलिस महकमा ने भगवान पट्टी पहुँचकर शोक संवेदना व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस आशय की खबर जिला सूचना कार्यालय (सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, अम्बेडकरनगर) द्वारा समस्त मीडिया संस्थानों को प्रमुखता से प्रकाशन हेतु प्रेषित की गई। उक्त प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का जिक्र किया गया है कि दिवंगत रमेश चन्द्र त्रिपाठी अयोध्या विवाद में मन्दिर की तरफ से पक्षकार थे। उनके निधन के उपरान्त जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने निर्देश पर ए.डी.एम. अमरनाथ राय, एस.डी.एम. भीटी देवी दयाल वर्मा प्रशासन की तरफ से शोक व्यक्त करने स्व. त्रिपाठी के घर पहुँचे। 

सूचना कार्यालय द्वारा प्रेषित प्रेस विज्ञप्ति में लिखा गया है कि- पंचतत्व में विलीन हो गये श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार रमेश चन्द्र त्रिपाठी। श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार रहे 84 वर्षीय रमेश चन्द्र त्रिपाठी का सोमवार रात्रि निधन हो गया। इससे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शोकाकुल परिवार को सान्त्वना देने क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों का तांता लगा रहा। मंगलवार को भीटी पुलिस टीम गाँव पहुँची और श्रद्धांजलि अर्पित की। बाद में अयोध्या के सरयूतट पर उनका अन्तिम संस्कार कर दिया गया।

करीब 84 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके भीटी के भगवान पट्टी निवासी रमेश चन्द्र त्रिपाठी पुत्र परशुराम त्रिपाठी ने वायु सेना से रिटायर होने के बाद समाजसेवा व भारतीय संस्कृति को संजोने का काम शुरू किया था। वह श्रीराम जन्मभूमि मामले में पक्षकार भी रहे। अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद वह काफी खुश थे। उनकी रूचि लेखन कार्यों में भी रही।

उनके द्वारा रचित आस्था केन्द्र वैष्णवी देवी, विन्ध्याचल धाम, हनुमान नाटकम आदि धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उन्होंने ‘वह भले एक सपना था’ छन्द काव्य भी लिखा जो प्रकाशित हुआ। क्षेत्र की समस्याओं व दुःखी, पीड़ितों की मदद के लिए रमेश चन्द्र त्रिपाठी को लोगों द्वारा हमेशा याद किया जाएगा। प्रखर वक्ता के रूप में भी उनकी विशेष पहचान थी। मंगलवार (12/11/2019) सुबह भीटी थाना प्रभारी मनीष सिंह (निरीक्षक) पुलिस टीम के साथ गाँव पहुँचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया। उनके निधन पर रत्नाकर त्रिपाठी, वेंकटरमन त्रिपाठी, विभाकर त्रिपाठी, अरविन्द त्रिपाठी, विद्याधर त्रिपाठी, हरिहर त्रिपाठी आदि ने शोक व्यक्त किया है। 

स्व. रमेश चन्द्र त्रिपाठी के निधन उपरान्त सक्रिय प्रशासन व पुलिस द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने के कारणों की जानकारी जब ली गई तो पता चला कि............जिला सूचना कार्यालय के किसी भी ओहदेदार को यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि त्रिपाठी जी के निधन उपरान्त उन्हें जिला प्रशासन व पुलिस महकमा इतना महत्व क्यों दे रहा है? अपर जिलाधिकारी अमरनाथ राय ने कहा कि वह यानि दिवंगत रमेश चन्द्र त्रिपाठी एक संभ्रान्त नागरिक थे इस लिए प्रशासनिक अमला उन्हें श्रद्धांजलि देने गया था। उप जिलाधिकारी देवी दयाल वर्मा से जब इस बावत जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि कहा कि स्व. त्रिपाठी लम्बे समय से साहित्य व सामजिक कार्यों से जुड़े थे। ए.डी.एम. वित्त एवं राजस्व अमरनाथ राय शोक संवदेना व्यक्त करने व श्रद्धांजलि देने आये थे, मैं भी साथ था, दिवंगत त्रिपाठी जी का बायोडाटा लेना था। इसी तरह एस.एच.ओ. थाना भीटी मनीष सिंह ने कहा कि स्व. त्रिपाठी श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार थे इसलिए उन्हें पुलिस की तरफ से श्रद्धांजलि दी गई। 

कुल मिलाकर रमेश चन्द्र त्रिपाठी को उनके निधन उपरान्त जो प्रशासनिक सम्मान मिला वह अभी तक कम ही लोगों को मिला होगा। कारण तो स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें  यह सम्मान एक पक्षकार (श्रीराम जन्मभूमि) के रूप में दिया गया या फिर समाजसेवी, साहित्कार अथवा वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी के रूप में.........? अम्बेडकरनगर जिले का प्रबुद्ध वर्गीय तबका रमेश चन्द्र त्रिपाठी के निधन पर शोक संवेदना व श्रद्धांजलि तो अर्पित कर ही रहा है परन्तु यह भी सोच रहा है कि दिवंगत त्रिपाठी को जिला प्रशासन व पुलिस महकमा महत्व व सम्मान क्यों दे रहा है? लोग सोचेन को विवश हैं कि काश वह भी रमेश चन्द्र त्रिपाठी की तरह होते.........जिससे मरणोपरान्त उन्हें भी प्रशासनिक स्तर पर सम्मान मिलता।  



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