इलाहाबादी अमरूद का फल खतरे में
| Rainbow News Network - Nov 14 2019 4:38PM

सुप्रसिद्ध इलाहाबादी अमरूदों का स्वाद 'फ्रूट फ्लाई' नामक कीटों ने बिगाड़कर रख दिया है। इससे यहां न सिर्फ अमरूदों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है, बल्कि फल का स्वाद भी खराब हुआ है। पेड़ पर लटके फल के अंदर ही कीटों के अंडे मिल रहे हैं। जैसे-जैसे फल बड़ा होता है, अंडों में कीट पनपने लगते हैं। बाद में अमरूद का रंग पीला हो जाता है और स्वाद भी खारा होने लगता है। यही हालत जिले में कई स्थानों पर देखने को मिले हैं।

लगातार शिकायतें मिलने की वजह से बागानों के मालिक अपने उत्पादन को लेकर चिंतित हैं। यदि अमरूदों की बिक्री नहीं हो पाती है तो करोड़ों का नुकसान हो सकता है। धनूपुर के बगान मालिक अहमद हसन एवं कौड़िहार प्रथम के राजबहादुर ने बताया कि इस बार अमरूदों के बागानों पर बहुत बड़ा संकट आया है। फ्रूट फ्लाई नामक कीट पेड़ों पर ही अमरूद के अंदर पैदा होने लगा है। अमरूद पकने पर खराब निकल रहे हैं। बाहर से देखने पर अमरूद ताजा दिखते हैं, मगर अंदर कीट निकलते हैं।

कौड़िहार कंजिया के देवेंद्र सिंह के मुताबिक, इस साल सितंबर-अक्तूबर की बारिश की नमी से फलों में कीट आए। अब दिन में धूप और रात में ओस-कोहरा से भी फल ठीक से विकसित नहीं हो रहे। प्रदूषण भी इस साल बढ़ा है। बाग-बगीचे वालों को समझ नहीं आ रहा कि ये संकट कैसे आया और कैसे खत्म होगा। फल एवं उद्यान विभाग मानता है कि 5 साल से यह रोग अमरूद का स्वाद बिगाड़ रहा है। बेशक अमरूद का इलाहाबाद में काफी उत्पादन होता है, मगर फल खराब होने की दिक्कतों के चलते बिक्री पर बहुत असर पड़ा है।

जिस साल अमरूद का उत्पादन अच्छा होता है और फल में कीड़े नहीं लगते, उस साल वह देशभर के बाजारों में नजर आता है। इस बार उतना अमरूद नहीं दिख रहा। यूपी में अमरूद कौशांबी और इलाहाबाद में ज्यादा मिलते हैं। जबकि, राजस्थान में ये सवाईमाधोपुर और कोटा में ज्यादा होते हैं। हरियाणा में अमरूद की अच्छी पैदावार गन्नौर के इलाकों में होती है। गन्नौर में बाय गांव के पास पिछले 30 सालों से अमरूदों के बागों से लाखों की कमाई हो रही है। उस किसान ने धान-गेहूं की खेती छोड़ रखी है।



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