नए वर्ष में संकल्प ले लो संकल्प
| -Ram vilas jangid - Dec 27 2019 3:20PM

नववर्ष सामने आ रहा है और मुझे संकल्प लेने के लिए उकसा रहा है। हालात ये हैं कि इधर मैं कोई संकल्प लेने के लिए सोचता हूँ उधर कोई न कोई कुत्ता भौंकने लगता है। चारों ओर बिल्लियां म्याऊं-म्याऊं का गीत सुनाने लगती है। जिस किसी भी ताक में हाथ मारता हूँ उसी में कोई न कोई संकल्प कीड़े जैसा बिलबिलाता दिखाई पड़ता है। कई वर्षों तक संकल्प लेने के बाद भी आज फिर से संकल्प लेने का मन कर रहा है। मैं यह सोच रहा हूं कि कल सुबह प्रातः 5:00 बजे उठूंगा। ... न न न 4:00 बजे ... नहीं यार संकल्प तो 3:00 बजे उठने का ही लेने में ज्यादा मजा रहेगा। नियम भी यही है। उठकर सबसे पहले हाथ पैरों का व्यायाम करूंगा।

हाथ पैरों को आगे-पीछे कर लूंगा। ऊपर-नीचे करूंगा। दाएं-बाएं करूंगा। इससे मैं तत्काल ही महान योगा शास्त्री हो जाऊंगा। जैसे हर वर्ष के मेरे संकल्प दो-तीन घंटे में टूट गए उसी तरीके से यह संकल्प भी दो-तीन घंटे में ही टूटने की पूरी उम्मीद है। वे संकल्प ही क्या काम के जो कभी टूटे नहीं। इस नववर्ष एक और संकल्प लूंगा कि मैं अपने घर को साफ रखूंगा और कचरा नियमानुसार पड़ौसी की तरफ ही फेंकूंगा। समस्त प्रकार के कचरे बने ही इसलिए होते हैं कि उन्हें पड़ौसियों की ओर फेंका जा सके। सदियों से घर परिवार से लेकर देश दुनिया तक में समस्त प्रकार के कचरे अपने-अपने पड़ौसियों की ओर फेंकने का नियम है।

चाहता हूं कि इस बार मैं सत्य बोल ही दूं। सच बोलने का संकल्प ले ही लूं। गांधी जी की आत्मा को भी इससे भारी तसल्ली होगी। पर कमबख्त एक मुश्किल है। जैसे ही मैं सत्य बोलने का संकल्प मन में लेता हूं वैसे ही पास में बैठी बीवी जोर-जोर से हंसने लगती है। वह कहती है कि यह संकल्प तो 1 मिनट भी नहीं चलेगा। पत्नी का आदेश है कि कम से कम कोई संकल्प इतना तो लो कि वह 1 घंटे तो चले। हे मेरे पाठक देव!

अब आप ही बताएं कि मैं सत्य बोलने वाला संकल्प फिलहाल एक तरफ रख दूं क्या? शायद यही ज्यादा अच्छा रहेगा क्योंकि सत्य बोलने की मुझमें न तो हिम्मत है और न ही इतनी सुविधा! अगर सप्ताह में एक बार 1 घंटे सत्य बोलने का संकल्प ले लूं तो ज्यादा अच्छा रहेगा। इसलिए हे दुनिया वालो! अब मैं सप्ताह में एक बार बुधवार शाम को 5:00 से 6:00 बजे तक सत्य बोलने का एक कार्यक्रम रखूंगा। अगर किसी को मेरी झूठली बातों में विश्वास करना हो तो मुझे उक्त समय के अलावा कॉल करें ताकि मैं झूठ चपाक से चेप सकूं। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि 1 घंटे भी सच बोलना बड़ा मुश्किल और घाटे का सौदा है। इसलिए संकल्प लेता हूं कि नए साल से में सप्ताह में एक बार 1 मिनट सच बोलूंगा।

यह संकल्प मैं बिना किसी भय, बिना दबाव व निर्भय होकर पूरे होश व जोश के साथ ले रहा हूं। इसमें किसी को कोई आपत्ति हो तो सच्ची मुझे सूचित करें। लगता है नववर्ष जब भी आता है तब कोई न कोई संकल्प लेने का रिवाज बनता है। सदा सत्य बोलो, ईमानदार बनो, नीतिवान रहो, समतावादी समाज का निर्माण करो, मेहनती बनो जैसे कई संकल्प अपनी कई-कई पुण्य तिथियां मना रहे हैं। एक-एक संकल्प नव वर्ष की नाक में दम कर देते हैं। वर्ष बेचारा एक और नाक में दम करने वाले संकल्प अनेक! -रामविलास जांगिड़



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