बुद्धि विक्रय केंद्र
| - RN. Network - Jan 8 2020 4:51PM

किसी मेले में एक स्टाल लगा था जिस पर लिखा था, बुद्धि विक्रय केंद्र"!
लोगो की भीड उस स्टाल पर लगी थी!
मै भी पहुंचा तो देखा कि उस स्टाल पर
अलग अलग शीशे के जार में कुछ रखा
हुआ था !

एक जार पर लिखा था-
क्षत्रिय की बुद्धि-500 रुपये किलो

दूसरे जार पर लिखा था -
ब्राह्मण की बुद्धि-1000 रुपये किलो

तीसरे जार पर लिखा था-
जैन की बुद्धि-2000 रुपये किलो

चौथे जार पर लिखा था-
यादव की बुद्धि- 50000 रुपये किलो

और पांचवे जार पर लिखा था-
दलित की बुद्धि-100000 रुपया किलो।

मैं हैरान कि इस दुष्ट ने क्षत्रिय की
बुद्धि की इतनी कम कीमत क्यों लगाई?

गुस्सा भी आया कि इसकी इतनी मजाल,
अभी मजा चखाता हूँ।

गुस्से से लाल मै भीड को चीरते हुआ
दुकानदार के पास पहुंचा और
उससे पूछा कि तेरी हिम्मत कैसे हुयी जो
क्षत्रिय की बुद्धि इतनी सस्ती बेचने की ?

उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कराया,
हुजूर बाजार के नियमानुसार...

जो चीज ज्यादा उत्पादित होती है,
उसका रेट गिर जाता है !

आपलोगो की इसी बहुतायत बुद्धि
के कारण ही तो आपलोग दीनहीन पड़े हैं !

कोई पूछने वाला भी नहीं है आपलोगों को..

सब एक दूसरे की टांग खींचते हैं
और सिर्फ अपना नाम बडा देखना
चाहते हैं !

किसी को सहयोग नहीं करते...
काम करने वाले की आलोचना करते है
और नीचा दिखाते हैं !

जाइये साहब...पहले अपने समाज को समझाइये और
मुकाम हासिल करिए !

और फिर आइयेगा मेरे पास... तो आप
जिस रेट में कहेंगे, उस रेट में आपकी
बिरादरी की बुद्धि बेचूंगा !!

मेरी जुबान पर ताला लग गया और
मैं अपना सा मुंह लेकर चला आया !

इस छोटी सी कहानी के माध्यम से
जो कुछ मैं कहना चाहता हूं,
आशा करता हूँ कि समझने वाले
समझ गये होंगे !

और जो ना समझना चाहे
वो अपने आपको
बहुत बडा खिलाडी
समझ सकते हैं !!!!!

यह आलेख हमें उत्तर प्रदेश सरकार में एक जनपद स्तरीय अधिकारी जो जाति से क्षत्रिय हैं ने भेजा है, जिसे हम यहाँ हुबहू प्रकाशित कर रहे हैं।  -सम्पादक, रेनबोन्यूज
 



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