सेन्ट जॉन्स स्कूल में खुली खिड़कियों की वजह से बच्चे ठिठुरने को मजबूर
| - Rainbow News Network - Jan 10 2020 4:07PM

अम्बेडकरनगर। जनपद के निजी प्रबन्धन वाले विद्यालयों के भवनों की हालत भले ही शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप हो परन्तु उनके कक्षों में लगे खिड़की-दरवाजों की स्थिति देखकर यह पता चलता है कि इसके लिए विभाग ने कोई मानक नहीं तय किया है। कई ऐसे विद्यालय हैं जिसमें पढ़ने वाले नन्हें-मुन्ने बच्चे प्रायः अस्वस्थ होते रहते हैं। इसके पीछे जो अहम कारण बताया गया है वह यह है कि शिक्षण कक्षों में बैठने की सुविधा तो है परन्तु दीवारों में बनी खिड़कियों में पट/दरवाजे नहीं लगे हैं, जिनसे साल के बारहों महीने ठण्डी, गर्म हवाएँ व बारिश में बौछारें बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती रहती हैं। 

अकबरपुर का एक पुराना कान्वेन्ट टाइप स्कूल है- सेन्ट जॉन्स स्कूल, जिसमें पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे मौसम की मार का शिकार होते रहते हैं। क्योंकि इन बच्चों के शिक्षण कक्षों में लम्बी-चौड़ी खिड़कियाँ पट व दरवाजा विहीन हैं। इस बावत सेन्ट जॉन्स के कुछ अध्यापकों ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। विद्यालय में समस्त सुविधाएँ हैं, बच्चे झूठ बोल रहे हैं। इस विद्यालय की खास बात यह है कि कोई जिम्मेदार पदाधिकारी कभी भी नहीं मिलता है और न ही अभिभावकों व संरक्षकों की समस्याओं का निराकरण ही होता है। 

इस विद्यालय में अन्य विद्यालयों की तरह माता-पिता एवं शिक्षकों की आपसी बैठकें भी नहीं होती हैं। यहाँ मात्र फीस वसूली की जाती है। वह भी बड़े ही अनैतिक तरीके से। बच्चों को हतोत्साहित किया जाता है। सेन्ट जॉन्स स्कूल के कई शिक्षण कक्षों में खिड़की, दरवाजे और शौचालय की दिक्कत के साथ-साथ बच्चों के खेल-कूद की भी व्यवस्था न के बराबर ही है। 



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