बाल तस्करी एवं यौन शोषण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
| - RN. Network - Jan 10 2020 5:37PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के आदेशानुसार एवं सिविल जज (सी0डि0)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अशोक कुमार के निर्देशानुसार 10 जनवरी 2020 को सायं 4 बजे से पुलिस लाइन (सभागार),  जनपद-अम्बेडकरनगर में बाल तस्करी एवं यौन शोषण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर को सम्बोधित करते हुये सिविल जज (जू0डि0) त्वरित, जनपद न्यायालय, अम्बेडकरनगर अजय कुमार मिश्र ने उपस्थित पुलिस कर्मियों को बाल तस्करी के बिन्दु पर संवेदनशीलता व कुशलता से कार्य करने पर बल दिया तथा इस सम्बन्ध में इमोरल ट्रैफिकिंग (प्रिवेन्शन) एक्ट 1956, बंाडेंड लेवर सिंस्टम एक्ट 1976, चाइल्ड लेबर, प्रोविशन एंड रेगुलेशन एक्ट 1986, जुवेनाइल जस्टिस, एअर एंड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन एक्ट 2000, के साथ-साथ भारतीय संविधान के निवि निवेशक तत्वों पर बल देते हुये बाल तस्करी को रोकने व बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया। विशेष रूप से देह व्यापार के लिये बच्चों की तस्करी के आंकड़ों को रेखांकित करते हुये ऐसे घिनौने कृत्य को रोकने में पुलिस की संवेदनशीलता एवं समाज से उनके जुड़ाव को बढ़ाने की अपेक्षा की गयी।

उन्होने बताया कि बच्चों की तस्करी मुख्यतः मानव अंगो के व्यापार, बाल श्रम, एवं बच्चों के यौन शोषण के लिये की जाती है। उन्होने बताया कि यदि किसी का बच्चा घर से गायब हो गया और तलाश करने पर नहीं मिलता तो उसे तत्काल सम्बन्धित थाने पर सूचना देनी चाहिये। एवं पुलिस को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिये व बाल तस्करी मानव समाज के लिये अभिशाप है तथा इसे रोकने के लिये पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जिले में बाल गुमशुदा केन्द्र (चाइल्ड मिसिंग सेल) की स्थापना की गयी है जो कि अपना कार्य संसाधनों के अभाव में कर रहा है। उन्होने बाल तस्करी को रोकने के लिये अपराधिक विधि व बच्चों के खोजने के सम्बन्ध में विवेचना के विशेष प्राविधानों पर ध्यान आकृष्ट कराया और अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम का संचालन करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रामचन्द्र वर्मा, ने बताया कि बाल तस्करी एवं उनके साथ घृणितम कृत्य के लिये ‘‘निठारी काण्ड‘‘ का दृष्टांत देते हुये बच्चों के कोमल भविष्य को सुरक्षित व संवर्धित करने के लिये पुलिस के योगदान का आवाहन किया गया। उन्होने बताया कि बाल यौन शोषण पर प्रकाश डालते हुये कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ ऐसा शर्मनाक हादसा होता है तो उसके अभिभावको को किसी प्रकार के शर्म हिचक या किसी दबाव में आये बिना इस अपराध के विरूद्ध दृढता पूर्वक लड़ना चाहिये एवं कानून के माध्यम से अपराधी को सख्त सजा दिलवानी चाहिये।

इस शिविर में सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, अम्बुज मिश्र, अपर सिविल जज (जू0डि0), सुश्री अल्का सिंह, अपर सिविल जज (जू0डि0), सुश्री कामाक्षी सागर, अपर सिविल जज (जू0डि0), श्री अमरनाथ, अपर सिविल जज (जू0डि0), जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर तथा डा0 अशोक कुमार, बृजेश कुमार, सुनील भारती, देवेश कुमार, अश्विनी कुमार, अरविन्द कुमार पाण्डेय, अमित कुमार, अजीत सिंह, मनीष कुमार गुप्ता, इशरतुल्लाह, एवं मोहम्मद फिरोज व पुलिसलाईन के कर्मचारीगण एवं मीडियाकर्मी आदि उपस्थित थे।



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