46 भारतीय नर्सों की रिहाई में शहीद कासिम सुलेमानी की अहम भूमिका थी : मौलाना मेहदी हसन वाइज़
| Rainbow News Network - Jan 14 2020 5:32PM

अम्बेडकरनगर। (हसन अब्बास) इराक में पिछले दिनों ईरानी कमांडर शहीद कासिम सुलेमानी व इराकी अर्धसैनिक बल के उप प्रमुख अबू मेहदी अल मोद्ददिस की गयी हत्या के बाद मजलिसों का सिलसिला लगातार जारी है तो वही अकबरपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम भड़सार में अंजुमन असगरिया कदीम के तत्वाधान में दिन मंगलवार की सुबह इमामबारगाह भड़सार में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए शिया धर्मगुरु मौलाना मेहदी हसन वाइज़ जलालपुरी ने कहॉ कि जर्नल कासिम सुलेमानी और अबू मेहदी अल मोद्ददिस ईरान में कितने महत्वपूर्ण थे।

अमेरिका के कट्टर प्रतिद्वंदी ईरान के लिए जर्नल कासिम सुलेमानी बेहद महत्वपूर्ण थे। पश्चिम एशिया के सभी अभियानों को वही अंजाम दिया करते थे। जर्नल सुलेमानी को अपने देश और देश के बाहर एक महत्वपूर्ण हस्ती का दर्जा मिला हुआ था। सीरिया और इराक युद्ध में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। मौलाना मेहदी हसन वाइज़ ने कहा कि इराक के तिकरित शहर में जब बगदादी के आतंकियों ने 46 भारतीय नर्सों को बंधक बना लिया था तब कासिम सुलेमानी ने नर्सों की रिहाई में बड़ी भूमिका निभाई थी आईएसआईएस के खात्मे में भी सुलेमानी का अहम योगदान था सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार बचाने में भी सुलेमानी ने बड़ा रोल निभाया।

यही नहीं मेजर कासिम सुलेमानी ने कुलभूषण जाधव के मामले में भी भारत का पक्ष लिया था और पाकिस्तान को बेनकाब किया था। मेजर कासिम सुलेमानी को शियाओं का जेम्स वॉड कहा जाता था। आखरी में मौलाना ने कहा कि हम अमरीका की पुरजोर मजम्मत करते हैं और बारगाह ए इलाही में दुआ करते हैं कि अमेरिका जल्द से जल्द नेस्तनाबूद हो जाए।अंत में मौलाना ने कर्बला के शहीदों की दास्तान बयां करके अज़ादारों की आंखों को नम कर दिया। वहीं मजलिस में सैकड़ों की संख्या में लोगों का जनसैलाब उमड़ा रहा!



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