जिला चिकित्सालय में ‘साम्प्रदायिक सौहार्द’ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
| - RN. Network - Jan 17 2020 4:30PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के आदेशानुसार एवं श्री अशोक कुमार, सिविल जज (सी0डि0)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर के निर्देशानुसार दिनांक 16 जनवरी 2020 को 4.00 बजे से संयुक्त जिला चिकित्सालय, अम्बेडकरनगर में साम्प्रदायिक सौहार्द विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर को सम्बोधित करते हुये अजय कुमार मिश्र, सिविल जज (जू0डि0) त्वरित, जनपद न्यायालय, अम्बेडकर नगर ने बताया कि मानवता ही सब कुछ है। मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। हर समुदाय के लोगों में एक ही खून दौड़ रहा है। फिर हम लोग आपस में एक समुदाय से दूसरे समुदाय के लोगों से वैमनस्यता क्यों रखते हैं? समाज में विनाश का जड़ वैमनस्यता ही है। उन्होंने बताया कि लोग अपने बच्चों को अधिक से अधिक पढ़ाई के लिये प्रेरित करें। यदि शिक्षा का विस्तार ज्यादा से ज्यादा होगा तो समाज में एक दूसरे में प्रेम मोहब्बत जगेगी, समाज उन्नति की ओर अग्रसित होगा।

जेहाद की विष-भावना नहीं जागृति होगी। समाज में आदि काल से हमारे सन्त पुरूषों ने भी सामाजिक एकरूपता बनाने के लिये अपने कविता के माध्यम से सन्देश दिया है। कबीर दास जी ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्म के आडम्बरों का विरोध किया है। कहने का आशय यह है कि किसी भी धर्म के आडम्बर का तिरस्कार करना चाहिये और अपने धर्मों की पूजा-अर्चना अपने विधि विधान से करना चाहिये। उन्होंने बताया कि आप चाहे किसी धर्म का सम्मान करें या न करें किन्तु किसी भी धर्म का अपमान न करें। सचिव ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के लोग हिन्दुओं के त्यौहार में शिरकत करते हैं तथा अबीर एवं गुलाल उड़ाते हैं तथा हिन्दू धुर्म के अनुयायी भी ईद जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार पर सेवईं खातें हैं और एक दूसरे के गले मिलते हैं।  

शिविर में बोलते हुये डा0 एस0 पी0 गौतम, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, संयुक्त जिला चिकित्सालय, अम्बेडकरनगर ने बताया कि अगर हमारी इच्छाशक्ति दृढ़ है, मजबूत है तो समाज में साम्प्रदायिक उन्माद पैदा नहीं हो सकता है। चन्द लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु समाज में जो यह साम्प्रदायिक उन्माद पैदा करना चाहते हैं उनका मुॅहतोड़ जबाव हम अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से दे सकते हैं। पहले समाज में समरसता कायम था किन्तु आज हम देखते हैं कि एक वर्ग दूसरे वर्ग के त्यौहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा नहीं ले रहे हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम लोग एक दूसरे के धर्म का आदर करें तभी समाज में समरसता कायम होगा और हम सुखी रहेंगें।

कार्यक्रम का संचालन करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता रामचन्द्र वर्मा, ने बताया कि शिक्षक सभी धर्म के लोगों को एक ही शिक्षा देता है भेद-भाव की भावना उसके दिल के अन्दर कभी नहीं रहती है परन्तु समाज में  विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद जब हम अपना दायित्व निभाते हैं तो हमारे अन्दर जाति का विभेद पैदा हो जाता है। यह गम्भीर विषय है। इस विषय पर आज चिन्तन करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मानवता सभी धर्मों से सर्वोपरि है।

इस शिविर में सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, अम्बुज मिश्र, अपर सिविल जज (जू0डि0), सुश्री अल्का सिंह, अपर सिविल जज (जू0डि0), सुश्री कामाक्षी सागर, अपर सिविल जज (जू0डि0), अमरनाथ, अपर सिविल जज (जू0डि0), जनपद न्यायालय अम्बेडकरनगर तथा डा0 हर्षित गुप्ता, अस्पताल प्रबन्धक, ओम प्रकाश, उमेश कुमार, नाज़नीन बेगम, अनुपम ंिसंह, भीष्मा, सीमा, प्रदीप एवं रिम्पु कुमार व अस्पताल के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।



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