गुजारिश....
| -RN. Feature Desk - Jan 25 2020 1:30PM

असुरक्षित समाज से, 
सुरक्षा की गुजारिश करता आदमी |
 निरीह, विरोधहीन समाज से,
सुरक्षा की गुहार लगाता आदमी। 
टैक्स पर टैक्स देता और बदले में, 
तारीख पर तारीख लेता आदमी। 
अपनी पराकाष्ठा से अर्जित मुद्रा को ,
श्री जी के पाखंडी अनुयायियों को समर्पित करता भक्त आदमी। 
 बदले में अपनी ही बहू बेटियों की अस्मत से  लुटता  मायूस आदमी। 
प्रतिदिन अपनों की लाशों पर, बिलाप करता आदमी |
 चिकित्सक रूपी भगवानों से रोज लूटता आम आदमी। 
अपनी बैखौफ निडर आवाज को, 
अटटालिकायो के पीछे खोता एक जागरूक आदमी ।
सत्ता के गलियारों के लिए गिरगिट से भी बदतर हो कर ,
अपने आप को बेचता खास आदमी। 
21वीं सदी की सफलताऔ को लपेटे हुए, 
एक जंगली जीवन जीता आदमी।



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