पद्मश्री मिलने पर अदनान सामी विवादों में
| Agency - Jan 27 2020 3:15PM

गणतंत्र दिवस के मौके पर केन्द्र सरकार ने बॉलीवुड गायक अदनान सामी को पद्मश्री पुरस्कार देने का ऐलान किया है। जिसपर महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी MNS ने गहरी आपत्ति दर्ज कराई। MNS ने सामी के सम्मान का विरोध किया, पार्टी का कहना है कि अदनान सामी भारत के मूल नागरिक नहीं हैं इसलिए उन्हें इसलिए वो इस पुरस्कार के हकदार नहीं हैं। वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोल दिया।

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले 25 जनवरी की शाम सरकार ने पद्म श्री अवॉर्ड की फेहरिस्त में जिन 118 हस्तियों के नाम दिए।  उनमें एक नाम मशहूर गायक और संगीतकार अदनान सामी का भी है। सरकार ने कला के क्षेत्र में सामी के जबरदस्त योगदान के चलते उन्हें पद्मश्री देने का ऐलान किया। लेकिन सामी को पद्म श्री देने वाली बात से देश के सियासी गलियारों में एक नया विवाद शुरू हो गया।
सामी को पद्म सम्मान दिए जाने की घोषणा पर सबसे पहले आपत्ति दर्ज की है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी MNS प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सरकार से पूछा कि सराकर ने अदनान सामी को पद्मश्री पुरस्कार देने में इतनी जल्दबाजी क्यों की ? MNS के सिनेमा विंग के प्रमुख अमय खोपकर ने ट्वीट कर कहा कि 'अदनान सामी मूल रूप से भारतीय नहीं हैं। एमएनएस का मानना है कि उन्हें कोई अवॉर्ड नहीं दिया जाना चाहिए। हम उन्हें पद्मश्री दिए जाने के फैसले का विरोध करते हैं। हमारी मांग है कि उनसे ये सम्मान वापस लिया जाए।

MNS के बाद कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर दिखाई दी। कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीव करते हुए कहा कि 'अदनान सामी को नागरिकता की सिफारिश करने के लिए मेरी आलोचना की गई थी। मुझे खुशी है कि उन्हें नागरिकता मिली और पद्म श्री पुरस्कार भी। सामी को पद्म श्री देने के मुद्दे पर। सरकार पर हमलावर हुए दिग्विज सिंह यहां भी नहीं रुके, केन्द्र की सत्ता में काबिज बीजेपी सरकार पर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति का आरोप लगाते हुए दिग्विजय ने आगे लिखा।

अगर सरकार एक पाकिस्तानी मुस्लिम को नागरिकता दे सकती है, तो नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए को लाने की क्या जरूरत है? इसे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करने के लिए लागू किया गया है। सामी को पद्म सम्मान से नवाजे जाने पर सियासी गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी जंग छिड़ गई है..जिसे चलते यूजर्स केन्द्र सरकार को जमकर ट्रोल भी कर रहे हैं ।

गौरतलब है कि अदनान सामी साल 2001 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। साल 2015 में भारत सरकार से मानवीय आधार पर उन्हें भारतीय नागरिकता देने की अपील की थी। उनकी अपील के बाद भारत सरकार ने तय मानकों के आधार पर उन्हें भारतीय नागरिकता दी थी। फिलहाल CAA को लेकर देशभर में विरोध की चिंगारी भड़क रही है, मुसलमान मोदी सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जता रहे हैं। देश में मुसलमानों की नागरिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं र ऐसे में बाहर देश से आए एक मुस्लिम कलाकर को देश के बड़े सम्मान से नवाजे जाने पर सियासत तेज हो गई है। अदनान के सम्मान पर उठा से सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, फिलहाल कहना मुश्किल है।



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