मैं गुजरात का दामाद, फिर भी मेरी नहीं सुनते मोदी : सुब्रह्मण्यम स्वामी
| Agency - Jan 27 2020 4:56PM

'मैं तो गुजरात का दामाद हूं, फिर भी अर्थतंत्र पर मोदी मेरी बातें नहीं सुनते। इकोनॉमी के संदर्भ में मैं उन्हें 2015 से चिट्ठी लिख रहा हूं।' यह कहना है भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी का। सुब्रह्मण्यम सूरत में एक चेम्बर की ओर से आयोजित 'इंडिया राइजिंग फ्यूचर ईकोनॉमिक आउटलुक' के कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में बैठे लोगों को संबोधित करते हुए सुब्रह्मण्यम ने अर्थव्यवस्था के सुधारों पर बात की।

डॉ. स्वामी ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर कहा कि जीडीपी ग्रोथ 10 साल तक 10 फीसदी रहे तभी देश में गरीबी खत्म हो पाएगी। बढ़ती मंदी पर बोले कि सरकार नए रास्ते अपनाए, नए नोट छापे। डिमांड जीरो हो गई है, लोग पैसा खर्च नहीं कर रहे। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने जो बीज बोया उससे ऐसी परेशानी खड़ी हो रही हैं।

सुब्रह्मण्यम ने यह भी कहा कि सरकार को देशवासियों के सिर से इनकम टैक्स का बोझ हटा देना चाहिए। इससे 4 लाख करोड़ रुपए ही तो आते हैं। यदि यह बोझ हट जाएगा, तो लोगों को राहत मिलेगी। सुब्रह्मण्यम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा कि मेरे गुजरात का दामाद होने के नाते उन्हें मेरी सुननी चाहिए, लेकिन वे नहीं सुनते।'

बता दें कि, इससे पहले सुब्रह्मण्यम एयर इंडिया को बेचने के खिलाफ भी बोल चुके हैं। उन्होंने एयर इंडिया को बेचे जाने के मोदी सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट चले जाने की बात कह डाली। सुब्रह्मण्यम ने कहा था कि यह सौदा राष्ट्रविरोधी है, मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा। अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ सुब्रह्मण्यम पहले भी कई दफा बयान दे चुके हैं।

सुब्रह्मण्यम मूल रूप से तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले हैं। वह जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे।



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