अयोध्या में विभिन्न विषयों पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| - RN. Network - Jan 30 2020 5:11PM

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार आज दिनांक 30.01.2020 को जिला कारागार, अयोध्या में प्ली बारगेनिंग एवं वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार विषय पर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में किशोर न्याय विषय पर तथा महिला शरणालय, अयोध्या में दहेज प्रथा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इन शिविरों में श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, अपर जिला जज, त्वरित, द्वितीय, अम्बेडकरनगर, अशोक कुमार, सचिव/सिविल जज(सी0डि0) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, सुश्री प्रीती भूषण, सिविल जज जू0डि0, टाण्डा, अम्बेडकरनगर, सी0पी0 त्रिपाठी, उपकारापाल, जिला कारागार अयोध्या, कृष्ण भगवान मिश्र, अधीक्षक, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या, श्रीमती भारती शुक्ला, अधीक्षिका, नारी शरणालय, अयोध्या,  प्रदीप एवं विकास सहित कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे।

शिविर को सम्बोधित करते हुये अशोक कुमार, सचिव/सिविल जज सी0डि0, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने प्ली बारगेनिंग विषय पर बोलते हुये कहा कि भारतीय संसद ने दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन अधिनियम 2/2006  द्वारा एक नया अध्याय 21(ए) (धारा 265-ए से 265-एल) प्ली बारगेनिंग नामक शीर्षक जोड़कर दांडिक अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामंजस्य से प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते हैं जिसके तहत अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकृति पर उसे हल्के दण्ड से दण्डित किया जाता है जो अन्यथा कठोर हो सकता है। भारत में प्ली बारगेनिंग का लाभ गंभीर अपराधों में नहीं उठाया जा सकता है।

प्ली बारगेनिंग समझौते का एक तरीका है। इसके तहत अभियुक्त कम सजा के बदले में अपने द्वारा किये गये अपराध को स्वीकार करके और पीड़ित व्यक्ति को हुये नुकसान और मुकदमें के दौरान हुये खर्चे की क्षतिपूर्ति करके कठोर सजा से बच सकता है। प्ली बारगेनिंग केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनके लिये कानून में सात वर्ष तक सजा का प्राविधान है। पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिर्पोट अथवा परिवाद प्रकरण में अभियुक्त प्ली बारगेनिंग हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

सचिव महोदय ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार विषय पर बताया कि बुजुर्ग किसी भी परिवार के हो, वो गहरी जड़ होते है, जिस पर पूरा परिवार टिका होता है। जिस तरह किसी पेड़ को मजबूत होने के लिये उसका जमीन में गहरी जड़ होना जरूरी है, जैसे किसी घर या बिल्ंिडग को ऊंचाई में पंहुचाने के लिये गहरी नींव जरूरी है, उसी तरह परिवार को फलने-फूलने व एक साथ रहने के लिये बुजुर्ग की जरूरत है। 60 वर्ष से ऊपर प्रत्येक नागरिक को वरिष्ठ नागरिक का दर्जा प्राप्त है तथा वे सरकारी सुविधाओं के हकदार हैं। बुजुर्ग वह है जो परिवार को एक धागे में पिरो के रखता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये श्री सी0 पी0 त्रिपाठी, उपकारापाल, जिला कारागार, अयोध्या ने बताया कि विचाराधीन कैदियों की संख्या को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में दण्ड प्रक्रिया संहिता में एक महत्वपूर्ण संशोधन करके प्ली बारगेनिंग का नया अध्याय जोड़ा गया। इसके तहत सात साल तक की सजा के मामले में आपसी सहमति से मुकदमों का निपटारा करने का विकल्प प्रदान किया गया है। अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार करने के एवज में सजा में आधी से अधिक छूट प्राप्त करके रिहा हो सकता है। इन प्राविधानों को व्यवहारिक बना कर विचाराधीन बंदियो की संख्या कम की जा सकती है।

उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में किशोर न्याय विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया तथा किशोर न्याय विषय पर सचिव महोदय द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त महिला शरणालय अयोध्या में दहेज प्रथा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। संवासिनियों को सचिव महोदय द्वारा उपरोक्त विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई।



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