प्रतिदिन अठन्नी खर्च कर हटवायें अपने घरों का कूड़ा: सरिता गुप्ता
| - Editor - Jan 31 2020 4:30PM

सरिता गुप्ता, अध्यक्ष, नपाप, अकबरपुर अम्बेडकरनगर 

अकबरपुर नगर पालिका में साफ-सफाई की नई व्यवस्था लागू

पहले खबर थी की नये साल 2020 में उत्तर प्रदेश सूबे के अम्बेडकरनगर जनपद की अकबरपुर नगर पलिका सीमा में रहने वाले लोगों को गृहकर और जलकर देना होगा, जिसके लिए सर्वे कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। परन्तु वह कार्य अभी चल ही रहा था कि नये साल के प्रारम्भिक दिनों में अकबरपुर वासियों को कूड़ा-कचरा सफाई कर जैसा नया तोहफा दे दिया गया। इसके तहत अब इस शहर के लोगों को 15 रूपए प्रतिमाह नगर पालिका अकबरपुर को अपने घरों से कूड़ा-कचरा उठाने के एवज में देना पड़ेगा (ऐसा उन्होंने शासनादेश के अनुरूप किया है)। न देने की स्थिति में लोगों के घर के अन्दर एकत्र कूड़ा-कचरे की सड़ान्ध से भले ही उनकी जीवन लीला समाप्त न हो किन्तु उन्हें गम्भीर बीमारियों का शिकर जरूर होना पड़ सकता है। 

अकबरपुर नगर जनों का यह सौभाग्य है कि उन्होंने वर्ष 2017 में हुए निकाय चुनाव में एक विदुषी, स्वस्थ, सौम्य, स्मार्ट महिला अध्यक्ष का चयन किया, जिसका नाम सरिता गुप्ता है। वही सरिता गुप्ता नगरवासियों को नगरीय सुविधा प्रदान करने के लिए नये-नये प्रयोग अपना रही हैं। यह बात दूसरी है कि कोई भी नया प्रयोग पहले अवश्य ही कष्टकारी लगता है परन्तु समय बीतने के साथ ही यह कष्ट प्रसव वेदना की तरह समाप्त होकर सामान्य लगने लगता है। देश-विदेश में जनप्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं जिन्हें आयरन लेडी कहा जाता रहा है को अपने नये प्रयोग पर तमाम तरह के जनविरोधों का सामना करना पड़ा है। अकबरपुर नगर पालिका परिषद की चेयरमैन सरिता गुप्ता के साथ भी ऐसी स्थिति आ सकती है, और आ भी रही है। निर्णय तो निर्णय जब इन्होंने नगर पालिका अकबरपुर को आदर्श नगर पालिका बनाने के लिए संकल्प ले ही लिया है तो इस तरह के जनविरोधी स्वरों का सामना करना ही पड़ेगा ।  -रीता

इस समय उत्तर प्रदेश सूबे के जनपद अम्बेडकरनगर के मुख्यालयी शहर अकबरपुर नगर पालिका क्षेत्र में सफाई हेतु कर्मचारियों की दो समानान्तर टीमों को लगाया गया है। इस नये प्रयोग से पुराने व नये सफाई कर्मियों में आपसी तालमेल में कमी की वजह से शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा कर रह गई है। यहाँ बता दें कि अकबरपुर नपा के 25 वार्डों में साफ-सफाई हेतु लगभग 300 सफाई कर्मियों की तैनाती है, जिनमें ढाई सौ दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मी ठेकेदार द्वारा लगाये गये हैं और शेष नगर पालिका के स्थाई कर्मचारी व संविदाकर्मी हैं। अब तक इन्हीं के भरोसे अकबरपुर नगर पालिका के 25 वार्डों की साफ-सफाई व्यवस्था थी, जिसे सन्तोषजनक कहा जा सकता था। परन्तु बीते वर्ष नगर पालिका परिषद प्रशासन द्वारा इतने ही अतिरिक्त सफाई कर्मियों को लगा दिये जाने से पूरी व्यवस्था गड्डमगड्ड होकर रह गई है। 

नगर को देखने पर ऐसा नहीं प्रतीत होता कि पालिका प्रशासन इसके साफ-सफाई पर ध्यान दे रहा है। पुराने सफाई कर्मी अब गली-मोहल्लों, कूंचों में दिखाई ही नहीं पड़ते। सुबह हल्ला बोल की तरह नये सफाई कर्मी लोगों के घरों से कचरा मांगते देखे जाते हैं, वह भी कभी-कभार और कहीं-कहीं। इन नये सफाई कर्मियों की वजह से हल्ला ज्यादा और काम कम हो रहा है।

इस नई व्यवस्था के बावत जिसमें नगर की साफ-सफाई चौपट होकर रह गई है- हमने नपाप अकबरपुर की अध्यक्ष श्रीमती सरिता गुप्ता से बातचीत किया, और स्वच्छता की विद्रूप होती दशा पर जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अकबरपुर नगर वासियों के घरों का कूड़ा-कचरा उठाने के लिए नये सफाई कर्मियों को लगाया गया है। अब यही नये कर्मी कूड़ा-कचरा उठायेंगे, और उसके निस्तारण हेतु नपाप के वाहनों पर लोड करेंगे। पुराने सफाई कर्मियों को इस कार्य से मुक्त कर दिया गया है। अब वह लोग पूर्व की तरह सुबह-शाम नगर के सभी वार्डों की साफ-सफाई करेंगे। 

जब उनसे कहा गया कि नगरजनों को यह शिकायत है कि नये सफाईकर्मी लोगों से कूड़ा उठाने के एवज में पैसों की मांग करते हैं तो उन्होंने कहा कि अकबरपुर में गरीब लोग रहते हैं उनकी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखते हुए हमने अठन्नी प्रतिदिन के हिसाब से प्रति घर से कूड़ा उठाने के लिए व्यवस्था दे रखी है। इसे हर कोई आसानी से दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि 15 रूपए प्रतिमाह खर्च करके साफ-सफाई व्यवस्था (कूड़ा-कचरा उठाई) अच्छी मिल रही है तो यह कोई बुरा नहीं है। अन्य शहरों/नगर पालिकाओं की अपेक्षा अकबरपुर को गरीब समझकर हमने यहाँ काफी कम सफाई चार्ज रखा है। उनसे जब यह कहा गया कि इस नई व्यवस्था के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है, नगरजन पुराने और नये सफाई कर्मियों की घालमेली- गड्डमगड्ड कार्यशैली देख रहे हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, नई व्यवस्था लागू के पूर्व हमने श्रमिकों हेतु टेण्डर ब्राण्डेड/बड़े अखबारों में इस्तहार के जरिये निकाला था। हो सकता है कि लोगों ने अखबारों को न पढ़ा हो। 

श्रीमती गुप्ता से जब यह कहा गया कि पुराने ठेकेदारी प्रथा से लगाये गये दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मियों में खुसुर-फुसुर चल रही है कि नपाप द्वारा उन्हें हटा दिया जायेगा तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। पुराने कर्मियों की टोली बनाकर वार्डों में सफाई के लिए लगाया गया है, नये कर्मी जो प्राइवेट हैं और ठेकेदार के माध्यम से उपलब्ध कराये गये हैं उनसे मात्र नगरजनों के घरों कूड़ा कचरा उठाने का काम लिया जा रहा है। यहाँ के लिए यह व्यवस्था अभी नई है। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ ही लोगों को आदत पड़ जायेगी और तब कोई दिक्कत नहीं आयेगी। 

यह तो रही नगर पालिका परिषद अकबरपुर की चेयरमैन की बात। वास्तविकता यह है कि अब इस समय पुराने और नये किसी भी सफाई कर्मी की सक्रियता देखने को नहीं मिलती है। नतीजा यह है कि शहर और इस सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी वार्डों में साफ-सफाई का अभाव देखने को मिल रहा है। उधर नई व्यवस्था लागू किए जाने के साथ ही इस वर्ष के शुरूआती दिनों से ही पुराने सफाई कर्मियों में हताशा-निराशा देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि वर्तमान चेयरमैन ने अपने शासनकाल के पूर्व (लगभग ढाई वर्ष पूर्व) लागू की गई व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला लिया है, और इसी का परिणाम है कि तत्समय के चेयरमैन चन्द्रप्रकाश वर्मा के समय में दी गई व्यवस्था के विपरीत अब यह नई व्यवस्था शुरू की गई है। इस तरह धीरे-धीरे करके वह पुरानी सभी व्यवस्थाओं को समाप्त कर देंगी।

नई सफाईकर्मी व्यवस्था की वजह से पुरानी व्यवस्था और उसमें लगे हुए श्रमिक तथा ठेकेदार इस समय हतप्रभ और बदहवाश से होकर रह गये हैं। इनमें खुसुर-फुसुर जारी है और ऐसा माना जा रहा है कि ये असंठित लोग जल्द ही एक संगठन बनायेंगे जिसके लिए ये सभी एक जुट होकर मंत्रणायें करने लगे हैं। संगठन हेतु इन पुराने श्रमिकों ने धन की व्यवस्था भी शुरू कर दिया है। आपस में ये लोग चन्दा एकत्र करने में जुट। वह दिन दूर नहीं जब यह गरीब और शोषित तबका जिसको दिहाड़ी के रूप में 270 रूपए प्रतिदिन दिया जाता है वह आन्दोलित होगा और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ विरोधी स्वर मुखर करेगा। -रीता विश्वकर्मा, 8423242878, 8765552676



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