'शिकारा' : कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी
| -RN. Feature Desk - Feb 13 2020 2:10PM

विधु विनोद चोपड़ा की चर्चित फ़िल्म 'शिकारा' का हाल ही में दिल्ली के एक थिएटर में स्क्रीनिंग-शो आयोजित किया गया। विधु के अलावा कई गणमान्य व्यक्ति और कश्मीरी पंडित इसमें शामिल हुए। कश्मीर से निर्वासित पंडितों की त्रासदी इस फ़िल्म का केंद्रीय थीम है।

फ़िल्म देखने के बाद एक कश्मीरी पंडित महिला ने जिस पीड़ा के साथ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की उसका विधु के पास कोई उत्तर नहीं था। वे बस बगलें ही झांकते रहे।एक मित्र ने तो विधु को संवेदना का सौदागर ही बता दिया। बहुत खूब!

सौदागर यानी ऐसा पटु व्यवसायी जो अपने माल को जैसे तैसे बेचे।।वही तुष्टिकरण का चोंचला!----"मैं दो साल तक कश्मीर में रहा।इस फ़िल्म को बनाने में वहां के मुसलमान भाइयों ने मेरी खूब मदद की।दो दोस्त अगर झगड़ते हैं तो बाद में एक हो जाते हैं।

तीस वर्षों के निर्वासन के बाद पंडित घाटी में ज़रूर लौट आएंगे आदि-आदि।" देखने वालों का कहना है कि फ़िल्म 'शिकारा' पंडितों के जख्मों पर नमक छिड़कने के बजाय उनके ज़ख्मों को और हरा करती है।



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