अकबरपुर: पुरानी तहसील तिराहा से पटेलनगर तक का क्षेत्र बना शराबियों, शोहदों का अड्डा
| - RN. Network - Feb 18 2020 3:21PM
  • संभ्रान्तजन, महिलाओं, युवतियों, सीधे-सादे युवाओं का घर से बाहर निकलना हुआ दूभर
  • शराबियों, शोहदों की सक्रियता से बस स्टेशन और डाकबंगला क्षेत्र बना काफी संवेदनशील

अम्बेडकरनगर। अकबरपुर शहर के पुरानी तहसील तिराहे से लेकर बस स्टेशन, पी.डब्ल्यू.डी. कार्यालय, डाकबंगला, अकबरपुर खण्ड विकास कार्यालय, पुराना सी.एम.ओ. कार्यालय, अकबरपुर विद्युत वितरण खण्ड कार्यालय के बाउन्ड्री वाल से सटी दुकानों पर और इनके इर्द-गिर्द, पटेलनगर तिराहा (टाण्डा रोड), फुटहिया मस्ज़िद आदि अनेकों स्थानों व सड़क की पटरियों पर लगने वाली स्थाई/अस्थाई दुकानों पर अराजकता का माहौल शाम से देर रात तक देखा जाता है।

इस बावत बताया जाता है कि यहाँ पर लगने वाली अण्डा, ऑमलेट व फास्टफूड की दुकानों पर शराबियों व शोहदे किस्म के लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे शान्तिप्रिय सम्भ्रान्त लोगों, महिलाओं, युवतियों, बच्चों का इन क्षेत्रों से गुजरना दिक्कत तलब होता है। उक्त क्षेत्रों में सड़क की पटरियों पर ठेले पर लगने वाली अण्डा, ऑमलेट, बिरयानी, चाट, भेलपुरी, एगरोल, मोमोज़ आदि फास्टफूड की दुकानों के इर्द-गिर्द इस तरह का जमघट लगाने वाले तत्व दुकानदारों के प्रिय ग्राहक होते हैं, जो प्रतिदिन इन दुकानों पर घण्टों बैठे फास्टफूड, अण्डा, ऑमलेट आदि के साथ शराब का सेवन करते हैं।

नशे में धुत ये तत्व कब किससे उलझ जायें कुछ भी कहना मुश्किल होता है। शाम से देर रात तक पी.डब्ल्यू.डी. कार्यालय गेट के अगल-बगल अवस्थित जलपान, गुटखा-पान, अण्डा आमलेट की दुकानों पर गजेड़ियों, शराबियों और लफंगों के जमावड़े और इनके द्वारा कसी जाने वाली फब्तियों से कॉलोनियों में निवास करने वाले संभ्रान्त जन महिलाएँ, बच्चे, युवतियाँ मुख्य सड़क मार्ग पर आने से कतराने लगी हैं। इनका आरोप है कि ये लोग अश्लील टिप्पणियाँ करते व फब्तियाँ कसते हैं और प्रतिरोध करने पर गाली-गलौज करते हैं। इनकी हरकतों से सभी लोग भयाक्रान्त हैं।

ये तत्व नशे की हालत में आपस में मार, पीट व गाली-गलौज करते हैं, जिससे क्षेत्र में अशान्ति का माहौल बना रहता है। सड़क पर चलने वाले राहगीर और अगल-बगल रहने वाले लोग इस स्थिति से सहमे रहते हैं। इनके भय से कोई इनका प्रतिरोध करने की हिम्मत नहीं करता। इन तत्वों के आगे लोग बेबस व लाचार से होकर रह गये हैं। शाम होते ही निकटवर्ती इलाकों की रिहायशी कॉलोनियों के लोग खरीदारी करने हेतु मार्केट निकलने से कतराने लगे हैं। इनको हमेशा यह भय बना रहता है कि कहीं उन्हें अण्डा, ऑमलेट, एगरोल, कबाब, बिरयानी, चाट, जलपान, चाय के ठेलों के इर्द-गिर्द एकत्र शोहदों की अश्लील टिप्पणियों और फब्तियों का शिकार न होना पड़े। 



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