यातायात व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले ई-रिक्शा बने हादसों का सबब
| - RN. Network - Feb 18 2020 5:19PM

अम्बेडकरनगर। मुख्यालयी शहर अकबरपुर व शहजादपुर में ई-रिक्शा के बढ़ते तादात के चलते जाम और हादसों से दोनों उपनगर प्रतिदिन दो-चार हो रहे हैं। बड़े वाहन और उसके चालक ट्रैफिक नियमों का पालन तो कुछ हद तक कर रहे हैं परन्तु ई-रिक्शा के चालक सारे नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। शहर के मुख्य सड़क मार्ग और संकरी गलियों में आड़ा-तिरछा और जिग-जैग स्टाइल में ई-रिक्शा चलाने वालों को आसानी से देखा जा सकता है। ये नित्य-नियमित शहर में होने वाले छोटे-बड़े हादसों का सबब बने हुए है। साथ ही यदि कोई भला मानुष इनके व्यवहार और रिक्शा संचालन स्टाइल का विरोध करता है तो उसके साथ अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट तक करने पर उतारू हो जाते हैं।

मनबढ़े ई-रिक्शा चालकों का कहना होता है कि वह लोग पुलिस, यातायात पुलिस और परिवहन महकमा के अलावा लोकल दबंग, प्रभावशाली लोगों को ऑब्लाइज़ करते हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। लगभग सभी रिक्शा चालक एक हाथ में मोबाइल, कान में ब्लूटूथ व ईयरफोन तथा रिक्शा में तेज साउण्ड बूफर लगाये ट्रैफिक नियमों को धता बताते सड़कों पर मौज-मस्ती करते हुए फर्राटा भर रहे हैं। बड़े वाहन और इनके चालक तो गनीमत हैं किन्तु ई-रिक्शा चालक तो बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो रहे हैं।

चूंकि ई-रिक्शा बैटरी चालित होता है सड़क अथवा मार्ग पर चलते समय इसमें से किसी भी प्रकार की आवाज नहीं सुनाई पड़ती है ऊपर से चालकों की मस्ती भरी स्टाइल और तेज रफ्तार से आगे निकलने की होड़ में साइकिल, मोटर साइकिल और पैदल चलने वाले राहगीर इनकी चपेट में आते रहते हैं। तू-तू मैं-मैं जैसी तकरारें होती हैं परन्तु ये रिक्शा चालक गली का शेर बने हुए अपने विरोधियों की आवाजें डरा-धमका कर बन्द कर देते हैं। ई-रिक्शा चालकों का यह भी कहना है कि नियम-कानून, लाइसेन्स, पंजीयन, हार्न, हेडलाइट आदि से उनका कोई लेना-देना नहीं है। जब पुलिस और परिवहन महकमा उनसे माहवारी वसूल रहा है तो ऐसे में क्या नियम और कैसा कानून........।

उनका कहना शायद गलत न हो क्योंकि जिस पर पुलिस, यातायात और परिवहन महकमे के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्रीय दबंगों का वरदहस्त हो उसका कोई क्या बिगाड़ लेगा। जिला मुख्यालयी शहर अकबरपुर और शहजादपुर में बिना रूट निर्धारण के मुख्य सड़क मार्गों पर हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं, जिनकी वजह से यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। आये दिन ये रिक्शे हादसे का सबब बन रहे हैं। हर चौराहे पर इनका जमावड़ा लगा रहता है। मानक से अधिक सवारियाँ बैठाकर चालक नियमावली की धज्जियाँ उड़ाने वाले ई-रिक्शा चालक यात्रियों से गन्तव्य तक पहुँचाने के लिए मनमाना किराया भी वसूल रहे हैं। इन सबके बावजूद पुलिस, प्रशासन और परिवहन महकमा चुप्पी साधे हुए है।

मजे की बात यह है कि ई-रिक्शा रात को हेड लाइट बन्द करके अथवा उसके अभाव में सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। इनके चालक बैटरी बचाने के चक्कर में रात को हेड लाइट बुझाकर चलते हैं। बिना लाइट के सड़क पर दौड़ते इन ई-रिक्शा चालकों को सड़के के गड्ढे और ब्रेकर आदि नहीं दिखते हैं, जिसके कारण अक्सर हादसे होते हैं। इनमें आवाज न होने के कारण आगे चल रहे वाहन चालकों को इनके पीछे से आने का अन्दाज भी नहीं लग पाता। जाहिर सी बात है तब ऐसे में ये ई-रिक्शा हादसों की वजह क्यों नहीं बनेंगे। ये ई-रिक्शा चालक इतने दबंग और घाघ हैं और पैसा कमाने के लिए विभागीय मानक को ताक पर रखते हैं। ई-रिक्शा में मात्र 4 सवारियाँ बैठाने का मानक है फिर भी चालक आठ से 10 सवारियाँ बैठाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। 

अकबरपुर के ई-रिक्शा चालकों की यह शिकायत है कि....

इस समय जोरों पर चर्चा है कि अकबरपुर/शहजादपुर में कुछ चतुर, चालाक किस्म के रिक्शा चालकों ने कोई संगठन बना रखा है, और व्यापक रूप से मासूम रिक्शा चालकों से उनके कल्याण व इधर-उधर की बातें कहकर संगठन में जुड़ने हेतु सदस्यता शुल्क की अच्छी रकम भी वसूल रहे हैं। यह कार्य इस समय जोरों पर चल रहा है। मुख्यालय से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों रिक्शा चालकों ने ऐसे तत्वों पर लगाम लगाये जाने की बात कही है। उनके अनुसार यदि ऐसा नहीं किया गया तो मजबूर होकर वह लोग ई-रिक्शा संचालन या तो बन्द कर देंगे या फिर अन्य जगहों पर पलायन कर जायेंगे। कई ने कहा कि इस बावत वह लोग जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, परिवहन महकमा के मुखिया और उत्तर प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र देंगे। 



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